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प्रश्न
उदारीकरण ने रोजगार के प्रतिमानों को किस प्रकार प्रभावित किया है?
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
- उदारीकरण के कारण भारतीय बाजारों तथा दुकानों में विदेशी सामान बड़ी सहजता से मिलने लगे हैं। इसके कारण कुछ श्रमिकों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा है।
- बहुत सारी भारतीय कंपनियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने खरीद लिया। किंतु इसके साथ ही बहुत सारी भारतीय कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनी के रूप में भी उभरीं। उदाहरण के तौर पर पारले पेय को कोका कोला ने खरीद लिया।
- उदारीकरण का दूसरा क्षेत्र खुदरा व्यापार का क्षेत्र है। बड़ी विदेशी कंपनियों तथा व्यापारियों के भारत में आने से भारत के छोटे व्यापारी, दुकानदार, हस्तकला विक्रेता, हॉकर इत्यादि अपना रोजगार खो बैठे अथवा उनका छोटा व्यापार इससे बुरी तरह से प्रभावित हुआ। इसका कारण बड़े-बड़े मॉल, शोरूम, रिलायंस अथवा शुभिच्छा थे।
- विश्व के बड़े व्यापारिक संस्थान; जैसे-वॉलमार्ट स्टोर्स, कैरेफोर तथा टिस्को भारत में प्रवेश की राह तलाश रहे हैं जबकि बाजार में सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगा रखा है।
- वॉलमार्ट, कैरीफोर तथा टिस्को एक संयुक्त उपक्रम स्थापना करने वाली हैं। भारत का खुदरा व्यापार क्षेत्र लोगों को केवल इसलिए नहीं आकर्षित कर रहा है कि यह तेजी से संवृद्धि कर रहा है बल्कि इसलिए कि छोटी-छोटी दुकानों का व्यापार कुल राष्ट्रीय व्यापर का 97% है। लेकिन उद्यमों की इस विशेषता को देखते हुए सरकार विदेशियों को बाजार में प्रवेश करने से क्यों रोक रही है।
- सरकार सार्वजनिक कंपनियों के अपने हिस्से को निजी क्षेत्र की कंपनियों को बेचने का प्रयास कर रही है। इसे विनिवेश कहा जाता है। कई सरकारी कर्मचारी इससे भयभीत हैं कि कहीं विनिवेश के कारण उनकी नौकरी न चली जाए।
- कंपनियाँ अपने स्थायी कर्मचारियों की संख्या में कमी कर रही हैं तथा छोटी-छोटी कंपनियों के द्वारा अपना काम करवा रही हैं (बायस्रोत के रूप में)। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए बाहयस्रोतों से काम करवाना अब वैश्विक रूप धारण करता जा रहा है। ये कंपनियाँ भारत जैसे विकासशील देशों में, जहाँ कि श्रम काफी सस्ता है, बाह्यस्रोतों से काम करवा रही हैं, छोटे-छोटे धर्मों में संगठित होना श्रम संगठनों के लिए बेहद कठिन है।
shaalaa.com
भारत में औद्योगीकरण
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