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प्रश्न
उत्तर लिखिए:
प्रथम तथा तृतीय चरण की मात्राएँ ______ हैं। | नित नूतन मंगल पुरमाही। निमिष सरिस दिन-जामिनि जाहीं।। बड़े भोर भूपतिमनि जागे। जाचक गुनगन गावन लागे।। |
यह ______ छंद है। |
सारिणी
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उत्तर
प्रथम तथा तृतीय चरण की मात्राएँ १६ - १६ हैं। | नित नूतन मंगल पुरमाही। निमिष सरिस दिन-जामिनि जाहीं।। बड़े भोर भूपतिमनि जागे। जाचक गुनगन गावन लागे।। |
यह चौपाई छंद है। |
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छंद और उनके प्रकार
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित पद्यांश में मात्राओं की गणना करके छंद के नाम लिखिए :
कबिरा संगत साधु की, ज्यों गंधी की बास।
जो गंधी कुछ दे नहीं, तो भी बास सुवास।।
- प्रथम चरण = ______ मात्राएँ
- द्वितीय चरण = ______ मात्राएँ
- तृतीय चरण= ______ मात्राएँ
- चतुर्थ चरण = ______ मात्राएँ
- छंद : ______
निम्नलिखित पद्यांश में मात्राओं की गणना करके छंद के नाम लिखिए :
भोजन करत बुलावत राजा। नहिं आवत तजि बाल समाजा।
कौसल्या जब बोलन जाई। ठुमकु-ठुमकु प्रभु चलहि पराई।।
- प्रथम चरण = ______ मात्राएँ
- द्वितीय चरण = ______ मात्राएँ
- तृतीय चरण= ______ मात्राएँ
- चतुर्थ चरण = ______ मात्राएँ
- छंद : ______
उत्तर लिखिए:
प्रथम तथा तृतीय चरण की मात्राएँ ______ है। | श्री गुरु चरन सरोज रंज,निजमन मुकुर सुधार। बरनौं रघुवर विमल जसजो दायक फल चार॥ |
यह ______ छंद है। |