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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) ९ वीं कक्षा

वैज्ञानिक तथा पर्यावरणस्नेही कूड़ा व्यवस्थापन पद्धतियाँ बताएँ। - Science and Technology [विज्ञान और प्रौद्योगिकी]

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प्रश्न

वैज्ञानिक तथा पर्यावरणस्नेही कूड़ा व्यवस्थापन पद्धतियाँ बताएँ।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

ठोस कचरे का वर्गीकरण और विभाजन करने के बाद, हम कार्बनिक खाद बनाने की प्रक्रिया का अनुसरण कर सकते हैं, जिससे हम कंपोस्ट बना सकते हैं। हम केचुआ खाद भी तैयार कर सकते हैं, और सुरक्षित भूमिभराव स्थल तैयार कर सकते हैं। साथ ही, हम पायरोलिसिस जैसी वैज्ञानिक और पर्यावरण के लिए हितकर प्रक्रियाओं का उपयोग करके ठोस कचरे का प्रबंधन कर सकते हैं।

  1. कचरे का विभाजन तथा वर्गीकरण: यह प्रक्रिया ठोस कचरे के प्रबंधन की पहली सीढ़ी होती है। इसमें गीला और सूखा कचरा, यानी अपघटनशील तथा अनपघटनशील को अलग करने के लिए, घर-घर जाकर सबसे पहले उसे इकठ्ठा करना पड़ता है।
  2. कंपोस्टिंग: घर में उत्पन्न होने वाले अपघटनशील कचरे को घर के आस-पास की जगहों में या बाग में कंपोस्टिंग करके उनसे कार्बनिक खाद (Manure) बना सकते हैं। घर में बचे हुए खाने, फल, सब्जी के छिलके, बाग के कचरे, पूजा के फूल, आदि पदार्थों को कंपोस्टिंग की प्रक्रिया से सड़ने से आप उनसे उच्च गुणवत्ता वाली प्राकृतिक खाद प्राप्त कर सकते हैं।
  3. कृमि कंपोस्टिंग: ठोस कचरे को त्वरित रूप से अपघटित करने के लिए हम केचुआ का उपयोग करते हैं। इस प्रक्रिया से बनने वाली खाद में उत्कृष्ट गुणवत्तावाले पोषण सामग्री होती है। इस खाद का उपयोग बागवानी और कृषि में किया जाता है।
  4. सुरक्षित भूमिभराव स्थल: भूमिभरण प्रक्रिया में इकट्ठित किया गया कचरा मिट्टी के नीचे दबाया जा सकता है। इस स्थल को कम से कम 2 किलोमीटर की दूरी पर जल स्रोतों से और मानव निवासों या बस्तियों से पर्याप्त दूरी पर होना चाहिए। वर्गीकरण करने के बाद, इन खड्डों में मिट्टी और प्लास्टिक के अलग-अलग स्तर बनाने से पहले उन्हें सुरक्षित भूमिभरण स्थल में दबाया जाता है। इस तरह की सावधानी से भूमि और जल प्रदूषण को रोका जा सकता है। औद्योगिक ठोस कचरा भी इसी तरीके से गाड़ा जाता है।
  5. पायरोलिसिस: इस तकनीक में कचरे को उच्च तापमान पर जलाया जाता है। इस प्रक्रिया का उपयोग हवा और विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है। यह संभावना है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से अर्धजले ज्वलनशील पदार्थ को जलकर नष्ट किया जाता है। महानगरपालिका द्वारा कचरे के प्रबंधन में पायरोलिसिस प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है।
  6. जैववैद्यकीय कचरा प्रबंधन: इस पद्धति का कचरा संसर्गजन्य होने के कारण उसे भट्‌ठी में उच्च तापमान पर जलाया जाता है।
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ठोस कचरा व्यवस्थापन के नियम
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अध्याय 9: पर्यावरण व्यवस्थापन - स्वाध्याय [पृष्ठ १०७]

APPEARS IN

बालभारती Science and Technology [Hindi] 9 Standard Maharashtra State Board
अध्याय 9 पर्यावरण व्यवस्थापन
स्वाध्याय | Q 3. आ. | पृष्ठ १०७
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