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विद्यार्थियों के भविष्य की नींव विद्यालय में डाली जाती है। - Marathi (Second Language) [मराठी (द्वितीय भाषा)]

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प्रश्न

विद्यार्थियों के भविष्य की नींव विद्यालय में डाली जाती है।

लघु उत्तरीय

उत्तर

विद्यालय किसी भी छात्र के शिक्षा, चरित्र और व्यक्तित्व निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र होता है। यह न केवल ज्ञान प्रदान करता है बल्कि विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिकता और सामाजिकता का भी विकास करता है।

विद्यालय की भूमिका

  • शिक्षा का आधार – विद्यालय विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों का ज्ञान देकर उनका बौद्धिक विकास करता है।
  • व्यक्तित्व विकास – यहाँ खेल, सांस्कृतिक गतिविधियाँ और नैतिक शिक्षाएँ दी जाती हैं, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • संस्कार और अनुशासन – विद्यालय बच्चों में अनुशासन, आदर और जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है।
  • भविष्य की तैयारी – शिक्षा और मार्गदर्शन के माध्यम से छात्रों को उनके करियर और जीवन की दिशा दी जाती है।

विद्यालय एक ऐसी शिक्षा और संस्कारों की प्रयोगशाला है, जहाँ छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी जाती है। इसलिए, यह आवश्यक है कि शिक्षा प्रणाली को मजबूत और प्रभावी बनाया जाए ताकि विद्यार्थी सक्षम, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। 

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अध्याय 1.5: प्रगति - अंतःपाठ प्रश्न [पृष्ठ १५]

APPEARS IN

बालभारती Integrated 7 Standard Part 2 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
अध्याय 1.5 प्रगति
अंतःपाठ प्रश्न | Q २०. | पृष्ठ १५
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