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प्रश्न
वित्तीय विवरणों की सीमाएँ क्या हैं?
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
यद्यपि वित्तीय विवरण तैयार करने में तथा उपयोगकर्त्ताओं को सूचना प्रदान करने में अत्यधिक सावधानी बरती जाती है, तथापि इनकी निम्नलिखित सीमाएँ है-
- वर्तमान स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते - वित्तीय विवरण को ऐतिहासिक लागत के आधार पर तैयार किया जाता है। चूंकि धन की क्रय शक्ति बदलती रहती है। अत: वित्तीय विवरणों में दर्शाई गई परिसंपत्तियों एवं दायित्वों (देयताओं) के मूल्य चालू या वर्तमान बाज्ञार स्थिति को नहीं दर्शाते हैं।
- परिसंपत्तियाँ वसूल नहीं की जा सकतीं - लेखांकन को विशेष रूढियों के आधार पर किया जाता है। कुछेक परिसंपत्तियाँ संभवत: कथित मूल्य पर वसूल नहीं की जा सकतीं, अगर कंपनी 'पर परिसमापन का ज़ोर डाला जाए। तुलन-पत्र में दर्शाई गई परिसंपत्तियाँ केवल असमाप्त या अपरिशोधित लागत प्रदर्शित करती हैं।
- पक्षपाती - वित्तीय विवरण अभिलिखित तथ्यों, संकल्पनाओं तथा प्रयुक्त परंपराओं का परिणाम होते हैं और लेखाकार या लेखापाल के द्वारा विभिन्न स्थितियों में निजी धारणा के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं। अत: परिणामों में पक्षपात दिखता है और वित्तीय विवरणों में दर्शाई गई वित्तीय स्थिति वास्तविक नहीं होती है।
- समग्र सूचना - वित्तीय विवरण समग्र सूचना दर्शाते हैं न कि विस्तृत सूचना। अतैव, वे शायद उपयोगकर्ता को निर्णय लेने में अधिक सहायक नहीं होते।
- अनिवार्य सूचना का अभाव - तुलन-पत्र बाज़ार से संबंधित हानि, समझौते के उल्लंघन के बारे में सूचना या जानकारी नहीं दर्शाते हैं। जो कि उद्यम हेतु काफ़ी महत्त्वपूर्ण है।
- गुणवत्तापूर्ण या गुणात्मक सूचना की कमी - वित्तीय विवरण में केबल आर्थिक जानकारी समाहित होती है तथा इनमें औद्योगिक संबधों, औद्योगिक वातावरण, श्रम संबंधों, कार्य एवं श्रम की गुणवत्ता आदि जैसी गुणात्मक जानकारियाँ नहीं होती हैं।
- ये केवल आंतरिम रिपोर्ट होती हैं - लाभ व हानि विवरण केवल विशिष्ट अवधि के लाभों/हानियों को दर्शाता है यह आने वाले समय में अर्जन क्षमता के बारे में कुछ नहीं बताता। उसी प्रकार तुलन-पत्र में दर्शाई गई वित्तीय स्थिति एक समय बिंदु पर सत्य हो सकती है पंरतु भविष्य की तिथि पर होने वाला परिवर्तन नहीं दर्शाया जाता।
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वित्तीया विवरणों की सीमाएँ
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