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"वरदान माँगूँगा नहीं" काव्य का रचना बोध लिखिए। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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प्रश्न

"वरदान माँगूँगा नहीं" काव्य का रचना बोध लिखिए।

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उत्तर

इस गीत में, कवि ने स्वाभिमानी बने रहने, सुख और दुख में समान भाव रखने और कर्तव्यपूर्ण राह पर अडिग रहने की प्रेरणा दी है। कवि के अनुसार, हार और जीत तो जीवन के स्वाभाविक चरण हैं, इसलिए इनसे विचलित होने की बजाय, हमें चुनौतियों का सामना करते हुए अपने पथ पर दृढ़ता से खड़े रहना चाहिए।

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वरदान माँगूँगा नहीं
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अध्याय 1.09: वरदान माँगूँगा नही - रचना बोध [पृष्ठ ३३]

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बालभारती Hindi - Lokbharati 9 Standard Maharashtra State Board
अध्याय 1.09 वरदान माँगूँगा नही
रचना बोध | Q (१) | पृष्ठ ३३
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