Advertisements
Advertisements
प्रश्न
यद्यपि Be–H आबंध ध्रुवीय है, तथापि BeH2 अणु का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
sp संकरण के कारण BeH2 अणु की ज्यामिति रेखीय होती है। इस कारण इसमें उपस्थित दोनों Be–H आबंधों के आबंध आघूर्ण (bond moments) एक-दूसरे के विपरीत दिशा में कार्य करते हैं। परिणाम में समान होने के कारण तथा विपरीत दिशा में कार्य करने के कारण ये एक-दूसरे का निराकरण कर देते हैं। फलस्वरूप BeH2 का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य प्राप्त होता है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
आबंध प्रबलता को आबंध कोटि के रूप में आप किस प्रकार व्यक्त करेंगे?
आबंध लंबाई की परिभाषा दीजिए।
\[\ce{CO^{2-}_3}\] आयन के संदर्भ में अनुनाद के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट कीजिए।
नीचे दी गई संरचनाओं (1 तथा 2) द्वारा H3PO3 को प्रदर्शित किया जा सकता है। क्या ये दो संरचनाएँ H3PO3 के अनुनाद संकर के विहित (केनॉनीकल) रूप माने जा सकते हैं? यदि नहीं, तो उसका कारण बताइए।
![]() |
![]() |
(1) | (2) |
SO3 की अनुनाद संरचनाएँ लिखिए।
NH3 तथा NF3 में किस अणु का द्विध्रुव-आघूर्ण अधिक है और क्यों?
'आबंध कोटि' से आप क्या समझते हैं?
निम्नलिखित में आबंध कोटि का परिकलन कीजिए-
N2, O2, \[\ce{O^+_2}\] तथा \[\ce{O^-_2}\]
NO2 की अनुनाद संरचनाएँ लिखिए।
\[\ce{NO^-_3}\] की अनुनाद संरचनाएँ लिखिए।