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Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Commerce (Hindi Medium) Class 12 [कक्षा १२] CBSE Syllabus 2025-26

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CBSE Class 12 [कक्षा १२] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Syllabus - Free PDF Download

CBSE Syllabus 2025-26 Class 12 [कक्षा १२]: The CBSE Class 12 [कक्षा १२] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Syllabus for the examination year 2025-26 has been released by the Central Board of Secondary Education, CBSE. The board will hold the final examination at the end of the year following the annual assessment scheme, which has led to the release of the syllabus. The 2025-26 CBSE Class 12 [कक्षा १२] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Board Exam will entirely be based on the most recent syllabus. Therefore, students must thoroughly understand the new CBSE syllabus to prepare for their annual exam properly.

The detailed CBSE Class 12 [कक्षा १२] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Syllabus for 2025-26 is below.

Academic year:

CBSE Class 12 [कक्षा १२] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Revised Syllabus

CBSE Class 12 [कक्षा १२] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) and their Unit wise marks distribution

CBSE Class 12 [कक्षा १२] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Course Structure 2025-26 With Marking Scheme

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Syllabus

CBSE Class 12 [कक्षा १२] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Syllabus for Chapter 1: प्रबंध के सिद्धांत और कार्य

1 प्रबंध की प्रकृति एवं महत्त्व
  • प्रबंध की प्रकृति एवं महत्त्व  
    • प्रबंध की प्रकृति एवं महत्त्व का परिचय
    • अवधारणा
  • प्रबंध की विशेषताएँ  
    • प्रबंध एक उद्देश्यपूर्ण प्रक्रिया है
    • प्रबंध सर्वव्यापी है
    • प्रबंध बहुआयामी है
    • प्रबंध एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है
    • प्रबंध एक सामूहिक क्रिया है
    • प्रबंध एक गतिशील कार्य  है
    • प्रबंध एक अमूर्त शक्ति है
  • प्रबंध के उद्देश्य  
    • संगठनात्मक उद्देश्य
    • सामाजिक उद्देश्य
    • कर्मचारीगण उद्देश्य
  • प्रबंध का महत्त्व  
    • प्रबंध सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक होता है
    • प्रबंध क्षमता में वृद्धि करता है
    • प्रबंध गतिशील संगठन का निर्माण करता है
    • प्रबंध व्यक्तिगत उद्देश्यों की प्राप्त में सहायक होता है
    • प्रबंध समाज के विकास में सहायक होता है
  • प्रबंध की प्रकृति  
  • प्रबंध एक कला  
    • सैद्धांतिक ज्ञान का होना
    • व्यक्तिगत योग्यतानुसार उपयोग
    • व्यवहार एवं रचनात्मकता पर आधारित
  • प्रबंध एक विज्ञान के रूप में  
    • क्रमबद्ध ज्ञान-समूह
    • परीक्षण पर आधारित सिद्धांत
    • व्यापक वैधता
  • प्रबंध एक पेशे के रूप में  
  • पेशे के निम्न विशेषताएँ हैं  
    • भली-भाँति परिभाषित ज्ञान का समूह
    • अवरोधित प्रवेश
    • पेशागत परिषद्
    • नैतिक आचार संहित
    • सेवा का उद्देश्य
  • प्रबंध के स्तर  
    • उच्च स्तरीय प्रबंध
    • मध्य स्तरीय प्रबंध
    • पर्यवेक्षीय अथवा प्रचालन प्रबंधन
  • प्रबंध के कार्य  
    • नियोजन
    • संगठन 
    • कर्मचारी नियुक्तिकरण
    • निदेशन
    • नियंत्रण
  • समन्वय प्रबंध का सार है  
  • समन्वय की प्रकृति  
    • समन्वय सामूहिक कार्यों में एकात्मकता लाता है
    • समन्वय कार्यवाही में एकता लाता है
    • समन्वय निरंतर चलने वाली प्रक्रिया
    • समन्वय सर्वव्यापी कार्य है
    • समन्वय सभी प्रबंधकों का उत्तरदायित्व है
    • समन्वय सोचा समझा कार्य है
  • समन्वय का महत्त्व  
    • संगठन का आकार
    • कार्यात्मक विभेदीकरण
    • विशिष्टीकरण
  • इक्कीसवीं शताब्दी में प्रबंधन  
2 प्रबंध के सिद्धांत
  • प्रबंध के सिद्धांत  
    • प्रबंध के सिद्धांत का परिचय
    • अवधारणा
  • प्रबंध के सिद्धांत की प्रकृति  
    • सर्व प्रयुक्त
    • सामान्य मार्गदर्शन
    • व्यवहार एवं शोध व्दारा निर्मित
    • लोच
    • मुख्यत: व्यावहारिक
    • कारण एवं परिणाम का संबंध
    • अनिश्चित
  • प्रबंध के सिद्धांतों का महत्त्व  
    • प्रबंधकों को वास्तविकता का उपयोगी सूक्ष्म ज्ञान प्रदान करना
    • संसाधनों का अधिकतम उपयोग एवं प्रभावी प्रशासन
    • वैज्ञानिक निर्णय
    • बदलती पर्यावरण की आवश्यकताओं को पूरा करना
    • प्रबंध प्रशिक्षण, शिक्षा एवं अनुसंधान
  • टेलर का वैज्ञानिक प्रबंध  
  • वैज्ञानिक प्रबंध के सिद्धांत  
    • विज्ञान पद्धति न कि अंगूठा टेक नियम
    • सहयोग न कि टकराव
    • सहयोग, न कि व्यक्तिवाद
    • प्रत्येक व्यक्ति का उसकी अधिकाधिक क्षमता एवं समृद्धि के लिए विकास
  • वैज्ञानिक प्रबंध की तकनीक  
  • कार्यात्मक फोरमैनशिप  
  • कार्य का प्रमापीकरण एवं सरलीकरण  
  • कार्य पद्धति अध्ययन  
  • गति अध्ययन  
  • समय अध्ययन  
  • थकान अध्ययन  
  • विभेदात्मक पारिश्रमिक प्रणाली  
  • फेयॉल के प्रबंध के सिद्धांत  
    • कार्य विभाजन
    • अधिकार एवं उत्तरदायित्व
    • अनुशासन
    • आदेश की एकता
    • निदेश की एकता
    • सामूहिक हितों के लिए व्यक्तिगत हितों का समर्पण
    • कर्मचारियों को प्रतिफल
    • केंद्रीकरण एवं विकेंद्रीकरण
    • सोपान श्रृंखला
    • व्यवस्था
    • समता
    • कर्मचारियों की उपयुक्तता
    • पहल क्षमता
    • सहयोग की भावना
  • फेयॉल बनाम टेलर-तुलना  
3 व्यवसायिक पर्यावरण
  • व्यवसायिक पर्यावरण का परिचय  
  • व्यवसायिक पर्यावरण का अर्थ  
    • बाहा शक्तियों की समग्रता
    • विशिष्ट एवं साधारण शक्तियाँ
    • आंतरिक संबंध
    • गतिशील प्रकृति
    • अनिशिचतता
    • जटिलता
    • तुलनात्मकता
  • व्यवसायिक पर्यावरण का महत्त्व  
    • संभावनाओं/अवसरों की पहचान करने एवं पहल करने के लाभ
    • खतरे की पहचान एवं समय से पहले चेतावनी में सहायक
    • उपयोगी संसाधनों का दोहन
    • तीव्रत से हो रहे परिवर्तनों का सामना करना
    • नियोजन एवं नीति निर्धारण में सहायता
    • निष्पादन में सुधार
  • पर्यावरण के आयाम  
    • आर्थिक पर्यावरण
    • सामाजिक पर्यावरण 
    • प्रौद्योगिकीय पर्यावरण
    • राजनैतिक पर्यावरण
    • विधिक पर्यावरण
  • भारत में आर्थिक पर्यावरण  
    • उदारीकरण
    • निजीकरण
    • वैश्वीकरण
  • विमुद्रीकरण  
    • विशेषताएँ
  • व्यवसाय एवं उद्योग पर सरकारी नीतियों में परिवर्तन का प्रभाव  
    • प्रतियोगिता में वृद्धि
    • अधिक अपेक्षा रखने वाले ग्राहक
    • प्रौद्योगिकी पर्यावरण में तेज़ी से परिवर्तन
    • परिवर्तन की आवश्यकता
    • मानव संसाधनों के विकास की आवश्यकता
    • बाज़ार अभिविन्यास
    • सार्वजनिक क्षेत्र को बजटीय समर्थन का अभाव
4 नियोजन
  • नियोजन  
    • नियोजन का परिचय
    • अर्थ
  • नियोजन का महत्त्व  
    • नियोजन निर्देशन की व्यवस्था करता है 
    • नियोजन अनेश्चितता की जोखिम को कम करता है 
    • नियोजन, नव-प्रवर्तन विचारों को प्रोत्साहित करता है 
    • नियोजन निर्णम लेने को सरल करता है 
    • नियोजन नियंत्रण के मनकों का निर्धारण करता है 
  • नियोजन की विशेषताएँ  
    • नियोजन का केंद्र बिंदु लक्ष्य प्राप्ति होती है
    • नियोजन प्रबंधन का प्राथमिक कार्य
    • नियोजन सर्वव्यापी है
    • नियोजन अविरत है
    • नियोजन भविष्यवादी है
    • नियोजन में निर्णय रचना निहित है
    • नियोजन एक मानसिक अभ्यास है
  • नियोजन की सीमाएँ  
    • नियोजन दृढ़ता उत्पन्न करता है
    • परिवर्तनशील वातावरण में नियोजन प्रभावी नहीं रहता
    • नियोजन रचनात्मकता को कम करता है
    • नियोजन में भारी लागत आती है
    • नियोजन समय नष्ट करने वाली प्रक्रिया है
    • नियोजन सफलता का आश्वासन नहीं है
  • नियोजन प्रक्रिया  
    • उद्देश्यों का निर्धारण
    • विकसशील आधार
    • कार्यवाही की वैकल्पिक विधियों की पहचान
    • विकल्पों का मूल्यांकन
    • विकल्पों का चुनाव
    • योजना को लागू करना
    • अनुवर्तन
  • नियोजन के प्रकार  
  • योजनाओं के प्रकार  
    • एकल प्रयोग तथा स्थायी योजनाएँ
    • एकल प्रयोग योजना.
    • स्थायी योजना
  • उद्देश्य  
  • व्यूह-रचना  
  • नीति  
  • पक्रिया  
  • विधि  
  • नियम  
  • कार्यक्रम  
  • बजट  
5 संगठन
  • संगठन  
    • संगठन का परिचय
    • अर्थ
  • संगठन पक्रिया में कदम  
    • कार्य की पहचान तथा विभाजन
    • विभागीकरण
    • कर्त्तव्यों का निर्धारणा
    • वृतांत रिपोर्टिंग संबंध स्थापन
  • संगठन का महत्त्व  
    • विशिष्टीकरण के लाभ
    • कार्य करने में संबंधो का स्पष्टीकरण
    • संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग
    • परिवर्तनों का अनुकूलन
    • प्रभावी प्रशासन
    • कार्मिकों का विकास
    • विकास एवं विस्तार 
  • संगठन ढाँचा  
  • संगठन ढाँचों के प्रकार  
    • कार्यात्मक संगठन ढाँचा
    • प्रभागीय संगठन ढाँचा
  • औप्रभागीय एवं अनौप्रभागीय संगठन  
  • अनौपचारिक संगठन  
  • अंतरण  
    • अधिकार अंतरण के तत्व
  • अंतरण का महत्त्व  
    • प्रभावी प्रबंध
    • कर्मचारियों का विकास
    • कर्मचारियों को प्रेरणा
    • विकास का सरलीकरण
    • प्रबंध सोपानिकी (पदानुक्रम) का आधार
    • उत्तम सामंजस्य
  • विकेंद्रीकरण  
  • केंद्रीकरण एवं विकेंद्रीकरण  
  • विकेंद्रीकरण का महत्त्व  
    • अधीनस्थों में पहल भावना का विकास
    • भविष्य के लिए प्रबंधकीय प्रतिभा का विकास
    • शीघ्र निर्णय
    • शीर्ष प्रबंध का राहत
    • श्रेष्ठ नियंत्रण
6 नियुक्तिकरण
  • नियुक्तिकरण  
    • नियुक्तिकरण का परिचय
    • अर्थ
  • नियुक्तिकरण की आवश्यकता तथा महत्त्व  
    • नियुक्तिकरण-मानव संसाधन प्रबंध के अंग के रूप में
  • मानव संसाधन प्रबंधन का क्रम विकास  
  • नियुक्तिकरण प्रक्रिया  
    • मानव-शक्ति आवश्यकताओं का आकलन
    • भर्ती
    • चयन
    • प्रशिक्षण तथा विकास
    • निष्पादन मूल्यांकन
    • पदोन्नति एवं भविष्य नियोजन
    • परिश्रमिक
  • नियुक्तिकरण के विभिन्न पहलू  
    • भर्ती
    • चयन
    • पशिक्षण
  • भर्त्ती  
  • भर्त्ती के स्रोत  
    • आंतरिक स्त्रोत-(संस्था के अंदर से ही भर्ती)
    1. स्थानांतरण
    2. पदोन्नति
  • आंतरिक स्त्रोतों के लाभ  
  • आंतरिक स्त्रोतों की कामियाँ  
  • बाहा स्रोत  
    • प्रत्यक्ष भर्ती
    • प्रतीक्षा सूची
    • विज्ञापन
    • रोज्रगार कार्यालय
    • स्थापन एजेंसी तथा प्रबंध परामर्शदाता
    • महाविद्यालय/विश्वविद्यालय से भर्ती
    • कर्मचारियों व्दारा अनुशंसा
    • जॉबर एवं ठेकेदार
    • विज्ञापन अथवा दूरदर्शन
    • वैब प्रसारण
  • बाहा स्रोत के लाभ  
    • योग्य कर्मचारी
    • विस्तृत विकल्प
    • नयी प्रतिभाएँ
    • प्रतियोगिता की भावना
  • बाहा स्रोत की कमियाँ/सीमाएँ  
    • वर्तमान कर्मचारियों में असंतोष की भावना
    • महँगी प्रक्रिया
  • चयन  
    • चयन प्रक्रिया
    1. प्रारंभिक जाँच
    2. चयन परीक्षाएँ
    • महत्त्वपूर्ण परीक्षाएँ जिनका प्रयोग कर्मचारियों के चयन हेतु किया जाता है
    1. बुद्धि परीक्षाएँ
    2. कौशल परीक्षा
    3. व्यक्तित्व परीक्षाएँ
    4. व्यापार परीक्षा
    5. अभिरुचि परीक्षा
    6. रोज्रगार साक्षात्कार
    7. संदर्भ तथा पृष्ठभूमि जाँच/परीक्षण
    8. चयन निर्णय
    9. शारीरिक एवं डॉक्टरी परीक्षण
    10. पद-प्रस्ताव
    11. रोजगार समझौता
  • प्रशिक्षण तथा विकास  
    • प्रशिक्षण तथा विकास की आवश्यकता
    • संगठन को लाभ
    • कर्मचारियों को लाभ
    • प्रशिक्षण, विकास एवं शिक्षा
  • प्रशिक्षण विधियाँ  
  • ऑन द जॉब विधियाँ  
    • प्रशिक्षणार्थी कार्यक्रम
    • शिक्षण (कोचिंग)
    • स्थानबद्ध प्रशिक्षण (इंटर्नशिप प्रशिक्षण) संयुक्त प्रशिक्षण परियोजना
    • कार्य बदली
  • ऑफ द जॉब विधियाँ  
    • कक्षा कक्ष व्याख्यान/सम्मेलन
    • चलचित्र
    • समस्यात्मक अध्ययन (केस स्टडी)
    • कंप्यूटर प्रतिमान
    • प्रकोष्ठ प्रशिक्षण
    • नियोजित अनुदेश/ प्रशिक्षण
7 निर्देशन
  • निर्देशन  
    • निर्देशन का परिचय
    • अर्थ
    1. निर्देशन क्रिया को प्रारंभ करती है
    2. निर्देशन प्रबंधन के प्रत्येक स्तर पर निष्पादित होता है
    3. निर्देशन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है
    4. निर्देशन ऊपर से नीचे की तरफ प्रवाहित होता है
  • निर्देशन का महत्त्व  
  • निर्देशन के सिद्धांत  
    • अधिकतम व्यक्तिगत योगदान
    • संगठनिक उद्देश्यों में ताल-मेल
    • आदेश की एकता
    • निर्देशन तकनीकों की उपयुक्तता/औचित्य
    • प्रबंधकीय संप्रेषण
    • अनौपचारिक संगठन का प्रयोग
    • नेतृत्व
    • अनुसरण करना
  • निर्देशन के तत्व  
  • पर्यवेक्षण  
  • पर्यवेक्षण के महत्त्व  
  • अभिप्रेरणा-अर्थ  
  • अभिप्रेरणा  
    • उद्देश्य
    • अभिप्रेरणा
    • अभिप्रेरक
  • अभिप्रेरणा की प्रक्रिया  
  • अभिप्रेरणा का महत्त्व  
  • मास्लो की आवश्यकता-क्रम अभिप्रेरणा का सिध्दांत  
    • आधारभूत/ शारीरिक आवश्यकताएँ 
    • सुरक्षा आवश्यकताएँ 
    • संस्था से जुडाव/संस्था से संबंध
    • मान सम्मान (प्रतिष्ठा) आवश्यकता
    • आत्म संतुष्टि आवश्यकताएँ 
  • वित्तीय तथा गैर वित्तीय प्रोत्साहन  
  • वित्तीय प्रोत्साहन  
    • वेतन तथा भत्ता
    • उत्पादकता संबंधित पारिश्रमिक/ मजदूरी प्रोत्साहन
    • बोनस/ अधिलाभांश
    • लाभ में भागीदारी
    • सह-साझेदारी/ स्कंध (स्टॉक) विकल्प
    • सेवानिवृत्ति लाभ
    • अनुलाभ/ परक्विज़र
  • गैर वित्तीय प्रोत्साहन  
    • पद प्रतिष्ठा/ ओहदा
    • संगठनिक वातावरण
    • जीवनवृत्ति विकास के सुअवसर
    • पद संवर्धन
    • कर्मचारियों को पहचान/ मान सम्मान देने संबंधित कार्यक्रम
    • पद सुरक्षा स्थायित्व
    • कर्मचारियों की भागीदारी
    • कर्मचारियों का सशक्तीकरण
  • नेतृत्व  
  • नेतृत्व की विशेषताएँ  
  • नेतृत्व का महत्त्व  
  • अच्छे नेता के गुण  
    • शारीरिक विशेषताएँ
    • ज्ञान
    • सत्यनिष्ठा/ईमानदारी
    • पहल
    • संप्रेषण कौशल
    • अभिप्रेरणा कौशल
    • आत्म-विश्वास
    • निर्णय लेने की क्षमता
    • सामाजिक कौशल
  • नेतृत्व शैली  
    • एकतंत्रीय अथवा सत्तावादी नेता
    • लोकतंत्रीय अथवा सहभागी नेता
    • अबंध अथवा मुक्त रोक नेता
  • संप्रेषण  
  • संप्रेषण प्रक्रिया के तत्व  
    • प्रेषक/ संदेश भेजने वाला
    • कूट/ संदेश
    • एनकोडिंग
    • माध्यम
    • डिकोडिंग
    • संदेश प्राप्तकर्ता
    • प्रतिपुष्टि
    • ध्वनि/ कोलाहल
  • संप्रेषण का महत्त्व  
    • समन्वयन के आधार के रूप में कार्य करती है
    • उद्यम के निर्विघ्न चलनें में सहायता करती है
    • निर्णय लेने की क्षमता के आधार के रूप में कार्य करती है
    • प्रबंधकीय कुशलता को बढ़ाता है
    • सहयोग तथा औद्योगिक शांति को बढ़ाती है
    • प्रभावी नेतृत्व को स्थापित करती है
    • मनोवृत्ति बढ़ाती है तथा अभिप्रेरित करती है
  • औपचारिक तथा अनौपचारिक संप्रेषण  
  • औपचारिक संप्रेषण  
    • एकल श्रृंखला
    • चक्र
    • गोला
    • स्वतंत्र प्रवाह
    • विलोम
  • अनौपचारिक संप्रेषण  
  • अंगूरीलता तंत्र  
  • प्रभावी संप्रेषण में बाधाएँ  
  • संकेतिक/ संकेतीक बाधाएँ  
    • संदेश की अनुपयुक्त अभिव्यक्ति 
    • विभिन्न अर्थों सहित संकेतक
    • त्रुटिपूर्ण रूपांतर /अनुवाद
    • अस्पष्ट संकल्पनाएँ
    • तकनीकी विशिष्ट शब्दावली
    • शारीरिक भाषा तथा हाव भाव की अभिव्यक्ति की डिकोडिंग
  • मनोवैज्ञानिक बाधाएँ  
    • असामयिक मूल्यांकन
    • सावधानी का अभाव/ ध्यान न होना
    • संप्रेषण के प्रसारण में लोप/ क्षय तथा अपयोप्त प्रतिधारण
    • अविश्वास
  • संगठनिक बाधाएँ  
    • संगठनिक नीति
    • नियम तथा अधिनियम
    • पदवी/ पद
    • संगठन की संरचना में जटिलता
    • संगठनिक सुविधाएँ
  • व्यक्तिगत बाधाएँ  
    • सत्ता के सामने चुनौती का भय
    • अधिकारी का अपने अधीनस्थों में विश्वास का अभाव
    • संप्रेषण में अनिच्छा
    • उपयुक्त प्रोत्साहनों का अभाव
  • प्रभावी संप्रेषण के लिए सुधार  
    • संप्रेषण करने से पहले विचार/ लक्ष्य स्पष्ट करने चाहिए
    • संदेश प्राप्तकर्ता की आवश्यकतानुसर संप्रेषण करें
    • संप्रेषण के पहले अन्य लोगों से भी परामर्श करें
    • संदेश में प्रयुक्त भाषा, शैली तथा उसकी विषय वस्तु के लिए जागरूक
    • ऐसा संप्रेषण करें जो सुनने वालों के लिए सहायक हो तथा महत्वपूर्ण/ मूल्यवान हो
    • उपयुक्त प्रतिपुष्टि निश्चित करें
    • वर्तमान तथा भविष्य दोनों के लिए संप्रेषण करें
    • संप्रेषण का अनुसरण
    • एक अच्छा श्रोता बनिए
8 नियंत्रण
  • नियंत्रण  
    • नियंत्रण का परिचय
    • अर्थ
  • नियंत्रण का महत्त्व  
    • संठगनात्मक लक्ष्यों की निष्पत्ति
    • मनकों की यथार्थता को आँकना
    • संसाधनों का फलोत्पादक उपयोग
    • कर्मचारियों की अभिप्रेरणा में सुधार
    • आदेश एवं अनुशासन की सुनिश्चितता
    • कार्य में समन्वय की सुविधा
  • नियंत्रण की सीमाएँ  
    • परिमाणात्मक  मानकों के निर्धारण में कठिनाई
    • बाहा घटकों पर अल्प नियंत्रण
    • कर्मचारियों से प्रतिरोध
    • महँगा सौदा 
  • नियोजन एवं नियंत्रण में संबंध  
  • नियंत्रण प्रक्रिया  
    • निष्पादन मानकों का निर्धारण
    • वास्तविक निष्पादन की माप
    • वास्तविक निष्पादन की मानकों से तुलना
    • विचलन विश्लेषण
    • सुधारात्मक कार्यवाही करना
  • प्रबंधकीय नियंत्रण की तकनीक  
    • पारंपरिक तकनीकें
    • आधुनिक तकनीकें
  • पारंपरिक तकनीकें  
    • व्यक्तिगत अवलोकन
    • सांख्यकीय प्रतिवेदन (रिपोर्ट्स)
    • बिना लाभ-हानि व्यापार विश्लेषण
    • बजटीय नियंत्रण
  • आधुनिक तकनीकें  
    • निवेश पर प्रत्याय
    • अनुपात विश्लेषण
    1. तरलता अनुपात
    2. शोधन क्षमता अनुपात
    3. लाभदायकता अनुपात
  • उत्तरदायित्व लेखाकरण  
    • लागत केंद्र
    • आगम केंद्र
    • लाभ केंद्र
    • विनियोग केंद्र
  • प्रबंध अंकेक्षण  
  • पुनरावलोकन तकनीक (पी. ई. आर. टी) एवं आलोचनात्मक उपाय प्रणाली ( सी. पी. एम)  
    • प्रबंध सूचना पद्धति
    • प्रबंध सूचना पद्धति के प्रबंधकों को लाभ

CBSE Class 12 [कक्षा १२] Business Studies (व्यवसाय अध्ययन) Syllabus for Chapter 2: व्यवसाय, वित्त एवं विपणन

1 व्यवसायिक वित्त
  • व्यवसायिक वित्त  
    • व्यवसायिक वित्त का परिचय
    • अर्थ
  • वित्तीय प्रबंध  
    • भूमिका
  • उद्देश्य  
  • वित्तीय निर्णय  
    • निवेश संबंधी निर्णय
    • पूँजी बजटिंग निर्णयों को प्रभावित करने वाले कारक
    • वित्तीयन संबंधी निर्णय
    • वित्तीय निर्णय को प्रभावित करने वाले कारक
    • लाभांश से संबंधित निर्णय
    • लाभांश निर्णय को प्रभावित करने वाले कारक
  • वित्तीय नियोजन  
  • वित्तीय नियोजन का महत्त्व  
  • पूँजी संरचना  
    • पूँजी संरचना को प्रभावित करने वाले कारक
    1. रोकड़ प्रवाह स्थिति
    2. ब्याज आवरण अनुपात (आई. ओ.आर)
    3. ऋण सेवा आवरण अनुपात (डी. एस. सी. आर)
    4. निवेश पर आय ( आर. ओ. आई)
    5. ऋण की लागत
    6. कर दर
    7. समता की लागत
    8. प्रवर्तन लागत
    9. जोखिम का ध्यान
    10. लचीलापन
    11. नियंत्रण
    12. नियामक ढांचा
    13. शेयर बाज़ार की दशाएँ
    14. अन्य कंपनियों की पूँजी संरचना
  • स्थाई एवं कार्यशील पूँजी  
    • अर्थ
    • स्थाई पूँजी का प्रबंधन
    • स्थाई पूँजी की आवश्यकता को प्रभावित करने वाले घटक
    1. व्यवसाय की प्रकृति
    2. संक्रिया का मापदंड
    3. तकनीक का विकल्प
    4. तकनीकी उत्थान
    5. विकास प्रत्याशा
    6. विविधीकरण
    7. वित्तीय विकल्प
    8. सहयोग का स्तर
  • कार्यशील पूँजी  
  • कार्यशील पूँजी आवश्यकता को प्रभावित करने वाले कारक  
    • व्यवसाय की प्रकृति
    • संचालन का स्तर
    • व्यवसाय चक्र
    • मौसमी कारक
    • उत्पादन चक्र
    • उधार क्रय सुविधा
    • संचालन कार्य कुशलता
    • कच्चे माल की उपलब्धि
    • विकास प्रत्याशा
    • प्रतियोगिता का स्तर
    • मुद्रा स्फीति
2 वित्तीय बाज़ार
  • वित्तीय बाज़ार की संकल्पना (अवधारणा)  
  • वित्तीय बाज़ार के प्रकार्य  
    • बचतों को गतिशील बनाना तथा उन्हें अधिवाधिक उत्पादक उपयोग में सरणित करना
    • मूल्य खोज को सुसाध्य बनाना
    • वित्तीय परिसंपत्तियों हेतु द्रवता उपलब्ध कराना
    • लेन-देन की लागत को घटाना
  • द्रव्य या मुद्रा बाज़ार  
  • मुद्रा बाज़ार के प्रपत्र (इंस्ट्रूमेंड)  
    • ट्रेजरी (राजकोष) बिल मूलत
    • वाणिज्यिक (या तिजारती) पत्र
    • शीघ्रावधि द्रव्य
    • बचत प्रमाण पत्र
    • वाणिज्यिक बिल
  • पूँजी बाज़ार  
    • पूँजी बाज़ार एवं मुद्रा बाज़ार में अंतर
    1. भाग लेने वाले
    2. प्रलेख
    3. निवेश राशि
    4. अवधि 
    5. तरलता
    6. सुरक्षा
    7. संभावित प्रतिफल
  • प्राथमिक बाज़ार  
    • अस्थायी पूँजी (फ्लोटेशन) की विधियाँ
    • विवरण पत्रिका के माध्यम से प्रस्ताव
    • विक्रय के लिए प्रस्ताव
    • निजी नियोजन या विनियोग
    • अधिकार निर्गम
    • इलेक्ट्रॉनिक आरंभिक सार्वजनिक निर्गम ( ई- आई.पी. ओज.)
  • व्दितीयक बाज़ार  
  • स्टॉक एक्सचेंज या शेयर बाज़ार  
    • शेयर बाज़ार (स्टॉक एक्सचेंज) का तात्पर्य
    • एक शेयर बाज़ार के क्रियाकलाप
  • व्यापारिक तथा निपटान कार्यविधि  
    • व्यापारिक एवं निपटान प्रक्रिया के चरण
    • विभौतिकीकरण तथा निक्षेपागार (डिमैटीरियलाइजेशन तथा डिपोज़िटरीज़)
    • डीमैट प्रणाली की कार्यविधि
    • निक्षेपागार (डिपोज़िटरी)
  • भारत का राष्ट्रीय शेयर बाज़ार (नेशनल स्टॉल एक्सचेंज ऑफ इंडिया)  
  • राष्ट्रीय शेयर बाज़ार (NSE) के उद्देश्य  
  • राष्ट्रीय शेयर बाज़ार (एन. एस. ई.) के बाज़ार खंड  
  • बी.एस. ई. (पूर्व में बॉम्बेस्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड)  
  • भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)  
    • सेबी (SEBI) की स्थापना के कारण
    • सेबी (SEBI) की भूमिका एवं उद्देश्य
    • सेबी के उद्देश्य
    • सेबी के कार्य
    1. सुरक्षात्मक कणर्य
    2. नियमन कर्त्ता कार्य
    3. विकासपूर्ण कार्य
    • सेबी का संगठनात्मक ढाँचा
3 विपणन
  • विपणन का अर्थ  
  • विपणन की विशेषताएँ  
    • अपेक्षा एवं आवश्यकता
    • उत्पाद का सृजन
    • ग्राहक के योग्य मूल्य
    • विनिमय पद्धति
  • विपणन प्रबंध  
    • विपणन प्रबंध दर्शन
    • उत्पादन की अवधारणा
    • उत्पाद की अवधारणा
    • बिक्री की अवधारणा
    • विपणन की अवधारणा
  • विपणन के कार्य  
    • बाज़ार संबंधी सूचना एकत्रित करना तथा उसका विश्लेषण करना
    • विपणन नियोजन
    • उत्पाद का रूपांकन एवं विकास
    • प्रमाणीकरण (मानकीकरण) एवं ग्रेड तय करना
    • पैकेजिंग एवं लेबलिंग
    • ब्रांडिंग
    • ग्राहक समर्थन सेवाएँ
    • उत्पाद का मूल्य निर्धारण
    • संवर्धन
    • वितरण
    • परिवहन
    • संग्रहण अथवा भंडारण
  • उत्पाद  
  • उत्पादों का वर्गीकरण  
  • उपभोक्ता वस्तुएँ  
    • उपभोक्ता वस्तुएँ के प्रकार हैं
    1. सुविधा उत्पाद
    2. क्रय योग्य वस्तुएँ 
    3. विशिष्ट उत्पाद
    • उत्पादों का टिकाऊपन
    1. गैर-टिकाऊ उत्पाद
    2. टिकाऊ उत्पाद
    3. सेवाएँ
  • औद्योगिक उत्पाद  
    • वर्गीकरण
  • ब्रांडिंग  
    • ब्रांड
    • ब्रांड नाम
    • ब्रांड चिह्न
    • ट्रेड मार्क
    • एक अच्छे ब्रांड नाम की विशेषताएँ
  • पैकेजिंग  
    • पैकेजिंग के स्तर
    1. प्राथमिक पैकेज
    2. व्दितीयक पैकेजिंग
    3. परिवहन के लिए  पैकेजिंग
    • पैकेजिंग का महत्त्व
    • पैकेजिंग के कार्य
    • लेबालिंग
    1. उत्पाद का विवरण एवं विषय वस्तु
    2. उत्पाद अथवा ब्रांड की पहचान करना
    3. उत्पादों का श्रेणीकरण
    4. उत्पाद के प्रवर्तन में सहायता लेबल का एक और महत्वपूर्ण कार्य है
    5. कानून सम्मत जानकारी देना
  • मूल्य निर्धारण  
    • मूल्य/ कीमत निर्धारण के निर्धारक तत्व
    1. वस्तु की लगत
    2. उपयोगिता एवं माँग
    3. बाज़ार में प्रतियोगिता की सीमा
    4. सरकार एवं कानूनी नियम
    5. मूल्य निर्धारण का उद्देश्य
    6. विपणन की पद्धतियाँ
  • भौतिक वितरण  
    • भौतिक वितरण के घटक
    1. आदेश का प्रक्रियण
    2. परिवहन
    3. भंडारण
    4. संगृहित माल पर नियंत्रण
  • प्रवर्तन  
  • प्रवर्तन मिश्र  
  • विज्ञापन  
    • विज्ञापन के लाभ
  • विज्ञापन की आलोचना  
    • लागत में वृद्धि
    • सामाजिक मूल्यों में कमी
    • क्रेताओं में असमंजस
    • घटिया उत्पादों की बिक्री को प्रोत्साहन
  • वैयक्तिक विक्रय  
    • वैयक्तिक विक्रय की विशेषताएँ
    • वैयक्तिक विक्रय के लाभ
  • वैयक्तिक विक्रय की भूमिका  
    • व्यवसायी को लाभ
    • ग्राहकों के लिए महत्त्व
    • समाज के लिए महत्त्व
  • विक्रय संवर्धन  
    • विक्रय संवर्धन के लाभ
    • विक्रय संवर्धन की सीमाएँ
    • विक्रय संवर्धन की सामान्य रूप से प्रयोग में आने वाली क्रियाएँ
    1. छूट
    2. कटौती
    3. वापसी
    4. उत्पादों का मिश्रण
    5. अतिरिक्त मात्रा उपहार स्वरूप
    6. तुरंत ड्रा एवं घोषित उपहार
    7. लक्की ड्रा/ किस्मत आजमाएँ
    8. उपयोग योग्य लाभ
    9. शून्य प्रतिशत पर पुरा वित्तीयन
    10. नमूनों का वितरण
    11. प्रतियोगिता
  • प्रचार  
  • जनसंपर्क  
    • जनसंपर्क की भूमिका
    1. प्रैस संपर्क
    2. उत्पाद प्रचार
    3. निगमित सम्प्रेषण
    4. लॉबी प्रचार
    5. परामर्श
4 उपभोक्ता संरक्षण
  • उपभोक्ता संरक्षण का महत्त्व  
    • उपभोक्ताओं का दृष्टिकोण
    1. उपभोक्ता की अज्ञानता
    2. असंगठित उपभोक्ता
    3. उपभोक्ताओं का चौतरफा शोषण
    • व्यवसाय की दृष्टि से
    1. व्यवसाय का दीर्घ अवधिक हित
    2. व्यवसाय समाज के संसाधनों का उपयोग करता है
    3. समाजिक उत्तरदायित्व
    4. नैतिक औचित्य
    5. सरकारी हस्तक्षेप
  • उपभोक्ताओं को कानूनी संरक्षण  
    • उपभोक्ता संरक्षण अधिनिय, 1986
    • प्रसंविदा अधिनिय, 1982
    • वस्तु विक्रय अधिनिय, 1930
    • आवश्यक वस्तु अधिनिय, 1955
    • कृषि उत्पाद (श्रेणीकरण एवं चिन्हांकन) अधिनिय, 1937
    • खाद्य मिलावट अवरोध अधिनियम, 1954
    • माप तौल मानक अधिनियम, 1976
    • ट्रेड मार्क अधिनियम, 1999
    • प्रतियोगिता अधिनियम, 2002
    • भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 1986
  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986  
  • उपभोक्ताओं के अधिकार  
    • सुरक्षा का अधिकार
    • सूचना का अधिकार
    • चयन का अधिकार
    • शिकायत का अधिकार
    • क्षतिपूर्ति का अधिकार
    • उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
  • उपभोक्ता के दायित्व  
    • उपभोक्ता संरक्षण के तरीके एवं साधन
    1. व्यवसाय द्वारा स्वयं नियमन
    2. व्यावसायिक संगठन
    3. उपभोक्ता जागरूकता
    4. उपभोक्ता संगठन
    5. सरकार
  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत शिकायत निवारण एजेंसियाँ  
    • उपभोक्ता
    • शिकायत कौन कर सकता है
    1. जिला फोरम
    2. राज्य कमीशन
    3. राष्ट्रीय कमीशन
  • उपभोक्ता संगठनों एवं गैर सरकारी संगठनों (NGOs) की भूमिका  
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