Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Science and Technology [विज्ञान और प्रौद्योगिकी] Syllabus - Free PDF Download
Maharashtra State Board Syllabus 2025-26 9th Standard [९ वीं कक्षा]: The Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Science and Technology [विज्ञान और प्रौद्योगिकी] Syllabus for the examination year 2025-26 has been released by the MSBSHSE, Maharashtra State Board. The board will hold the final examination at the end of the year following the annual assessment scheme, which has led to the release of the syllabus. The 2025-26 Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Science and Technology [विज्ञान और प्रौद्योगिकी] Board Exam will entirely be based on the most recent syllabus. Therefore, students must thoroughly understand the new Maharashtra State Board syllabus to prepare for their annual exam properly.
The detailed Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Science and Technology [विज्ञान और प्रौद्योगिकी] Syllabus for 2025-26 is below.
Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Science and Technology [विज्ञान और प्रौद्योगिकी] Revised Syllabus
Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Science and Technology [विज्ञान और प्रौद्योगिकी] and their Unit wise marks distribution
Maharashtra State Board 9th Standard [९ वीं कक्षा] Science and Technology [विज्ञान और प्रौद्योगिकी] Course Structure 2025-26 With Marking Scheme
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Syllabus
- गति और विराम
- विस्थापन और दूरी
- चाल और वेग
- चाल और दिशा का वेग पर होने वाला प्रभाव
- एकसमान और असमान गति
- त्वरण
- त्वरण के प्रकार
- धनात्मक त्वरण
- ऋणात्मक त्वरण (अवत्वरण या मंदन)
- शून्य त्वरण
- रेखीय गति का ग्राफ़ीय निरूपण
- दूरी-समय ग्राफ़
- एकसमान गति के लिए दूरी - समय ग्राफ़
- असमान गति के लिए दूरी - समय ग्राफ़
- वेग-समय ग्राफ़
- एकसमान गति के लिए वेग - समय ग्राफ़
- एकसमान त्वरित गति के लिए वेग - समय ग्राफ़
- दूरी-समय ग्राफ़
- ग्राफ़िय विधि से गति के समीकरण
- वेग-समय संबंध के लिए समीकरण
- समय-स्थिति संबंध के लिए समीकरण
- वेग-स्थिति संबंध के लिए समीकरण
- एकसमान वृत्तीय गति
- एकसमान वृत्ताकार वेग की दिशा ज्ञात करना
- न्यूटन के गति संबंधी नियम
- न्यूटन का गति का प्रथम नियम
- न्यूटन का गति का द्वितीय नियम
- न्यूटन का गति का तृतीय नियम
- रेखीय संवेग का संरक्षण और उसका सिद्धांत
- कार्य का परिचय
- कार्य
- कठोर काम करने के बावजूद कुछ अधिक 'कार्य' नहीं !
- कार्य की वैज्ञानिक संकल्पना
- एक नियत बल द्वारा किया गया कार्य
- कार्य की इकाई
- ज्यूल और अर्ग में संबंध
- कार्य का मापन
- कार्य की अभिव्यक्ति ( W = F S cos θ)
- धनात्मक, ऋणात्मक और शून्य कार्य
- ऊर्जा
- ऊर्जा
- ऊर्जा के रूप
- ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक
- यांत्रिक ऊर्जा और इसके प्रकार
- गतिज ऊर्जा
- गतिज ऊर्जा
- गतिज ऊर्जा का समीकरण
- स्थितिज ऊर्जा
- स्थितिज ऊर्जा
- स्थितिज ऊर्जा का समीकरण
- गतिज ऊर्जा
- ऊर्जा के विभिन्न रूप परस्पर परिवर्तनीय हैं?
- ऊर्जा संरक्षण का नियम
- मुक्त पतन
- गुरुत्वीय त्वरण g के मान का परिकलन
- पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के प्रभाव में वस्तुओं की गति
- शक्ति
- विद्युत
- विद्युत विभव और विभवांतर
- विद्युत सेल का विभवांतर
- मुक्त इलेक्ट्रॉन
- तार से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा
- विद्युत धारा
- ओम (ओह्म) का नियम
- चालक का प्रतिरोध और प्रतिरोधकता
- विद्युत परिपथ
- विद्युत अवयवों के विभिन्न प्रतीक और कार्य
- सुचालक और विसंवाहक
- ओम (ओह्म) के नियम का प्रायोगिक सत्यापन करना
- प्रतिरोधकों के निकाय का प्रतिरोध
- श्रेणीक्रम में संयोजित प्रतिरोधक
- पार्श्वक्रम में संयोजित प्रतिरोधक
- घरेलू विद्युत संयोजन
- घरेलू विद्युत संयोजन
- संगलक तार
- विद्युत धारा के उपयोग संबंधी सावधानियाँ
- रासायनिक संयोजन के नियम
- द्रव्यमान-संरक्षण का नियम (द्रव्य की अविनाशिता का नियम)
- स्थिर अनुपात का नियम (निश्चित अनुपात के नियम)
- परमाणु : पदार्थ के निर्माण खंड
- परमाणु
- परमाणु कितने बड़े हैं?
- परमाणु कैसे होते हैं?
- परमाणु द्रव्यमान
- विभिन्न तत्वों के परमाणुओं के आधुनिक प्रतीक
- तत्त्व और यौगिकों के अणु
- आण्विक द्रव्यमान
- आण्विक द्रव्यमान
- सूत्र इकाई द्रव्यमान
- मोल संकल्पना
- एवोगैड्रो संख्या
- संयोजकता
- परिवर्ती संयोजकता
- यौगिकों के रासायनिक सूत्र
- मूलक (आयन) और उनके प्रकार
- मूलक
- मूलक के प्रकार
1. लवणीय मूलक
2. अम्लीय मूलक
- अम्ल, क्षारक एवं लवण का परिचय
- आयनिक यौगिक
- आयनिक यौगिकों का वियोजन
- आयनिक यौगिकों का वियोजन
- अर्हिनियस का अम्ल तथा क्षारक सिद्धांत
- अर्हिनियस का अम्ल तथा क्षारक सिद्धांत
- अम्ल का वर्गीकरण
- तीव्र और सौम्य अम्ल
- अम्ल की क्षारकता
- अम्लों की सांद्रता
- क्षारकों का वर्गीकरण
- तीव्र भस्म, सौम्य क्षारक और क्षार
- क्षारकों की अम्लता
- क्षारकों की सांद्रता
- विलयन की pH
- वैश्विक सूचक
- उदासीनीकरण अभिक्रिया
- अम्लों की अभिक्रिया
- धातुओं के साथ अम्लों की अभिक्रिया
- धातुओं के ऑक्साइडों के साथ अम्लों की अभिक्रिया
- धातुओं के कार्बोनेट तथा बाइकार्बोनेट क्षारों के साथ अम्लों की अभिक्रिया
- क्षारकों की अभिक्रिया
- अधातुओं के ऑक्साइड के साथ क्षारकों की अभिक्रिया
- लवण
- लवण परिवार
- लवणों का pH
- साधारण नमक से रसायन
- क्या लवण के क्रिस्टल वास्तव में शुष्क हैं?
- लवणों के प्रकार
- अम्लीय लवण
- क्षारीय लवण
- उदासीन लवण
- केलासीय जल
- आयनिक यौगिक और विद्युत चालकता
- आयनों का विचरण और विद्युत चालकत्व
- विद्युत अपघटन
- पानी का विद्युत अपघटन
- अम्ल और क्षार के बीच अंतर
- वर्गीकरण और जैव विकास
- वनस्पतियों के वर्गीकरण का आधार
- वनस्पति जगत (प्लांटी किंगडम)
- वनस्पति जगत
- वनस्पति जगत की विशेषताएँ
- उपजगत - अबीजपत्री वनस्पतियाँ
- उपजगत - बीजपत्री वनस्पतियाँ
- उपजगत - अबीजपत्री वनस्पतियाँ
- थैलोफ़ायता
- ब्रायोफ़ायता
- टेरिडोफ़ायता
- उपजगत - बीजपत्री वनस्पतियाँ
- अनावृत्तबीजी वनस्पतियाँ (जिम्नोस्पर्म)
- आवृत्तबीजी वनस्पतियाँ (एंजियोस्पर्म)
- परितंत्र के ऊर्जा प्रवाह
- आहार श्रृंखला
- आहार जाल
- ऊर्जा का पिरामिड
- जैव रासायनिक चक्रण
- कार्बन चक्र
- ग्रीन हाउस प्रभाव
- ऑक्सीजन चक्र
- नाइट्रोजन चक्र
- कार्बन चक्र
- सूक्ष्मजीव और सूक्ष्मजीवशास्त्र
- उपयुक्त सूक्ष्मजीव
- लैक्टोबैसिलाई
- राइजोबियम: सहजीवी जीवाणु
- राइजोबियम का कार्य और महत्त्व
- किण्व
- प्रतिजैविक
- पेनिसिलीन
- उपद्रवी सूक्ष्मजीव
- कवक
- क्लॉस्ट्रीडियम
- अन्य रोगकारक सूक्ष्मजीव
- मौसम और जलवायु
- तापमान
- वायु दाब
- पवन
- आर्द्रता
- सजीव जगत में जलवायु का महत्त्व
- मौसम विज्ञान
- मौसम विज्ञान
- भारतीय मौसम विभाग
- मानसून का प्रारूप और मौसम का अनुमान
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
- ठोस कचरा व्यवस्थापन की आवश्यकता
- अपशिष्ट और इसकी श्रेणियाँ
- ठोस कचरे के दुष्परिणाम
- ठोस कचरा व्यवस्थापन के नियम
- आपदा प्रबंधन
- आपदापूर्व-प्रबंधन
- आपदा-आघात के पश्चात का प्रबंधन
- प्रथमोपचार और आपत्कालीन कृती
- प्रथमोपचार के मूलतत्त्व
- रोगी का वहन कैसे करें?
- प्रथमोपचार पेटी
- सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी
- सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी
- सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के साधन
- संगणक
- संगणक के भाग और उनके कार्य
- संगणक के घटक
- इनपुट युनिट
- प्रोसेसर
- आउटपुट युनिट
- कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर
- संगणक के Microsoft Word की सहायता से लेख और समीकरण तैयार कीजिए।
- Microsoft Excel की सहायता से प्राप्त संख्यात्मक जानकारी का आलेख खींचना।
- Microsoft Powerpoint की सहायता से प्रस्तुतीकरण तैयार करना।
- विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सूचना संचार का महत्त्व
- निर्देशन
- अनुमान लगाना
- वैज्ञानिक जानकारी संग्रहित करना।
- संगणक क्षेत्र में सुअवसर
- प्रकाश का परिचय
- दर्पण और दर्पण के प्रकार
- समतल दर्पण और परावर्तन
- गोलीय दर्पण
- गोलीय दर्पण
- गोलीय दर्पण से संबंधित चिन्ह
1. ध्रुव
2. वक्रता केंद्र
3. वक्रता त्रिज्या
4. मुख्य अक्ष
5. मुख्य नाभि
6. नाभ्यांतर
- गोलीय दर्पणों द्वारा परावर्तित किरणों को आरेखित करने के नियम
- नियम 1: यदि आपतित किरण अक्ष के समांतर है तो परावर्तित किरण मुख्य नाभि से होकर जाती है।
- नियम 2: यदि आपतित किरण मुख्य नाभि से जाती है तो परावर्तित किरण मुख्य अक्ष के समांतर जाती है।
- नियम 3: यदि आपतित किरण वक्रता केंद्र में से जाती है तो परावर्तित किरण उसी मार्ग से वापस लौट जाती है।
- अवतल दर्पण
- अवतल दर्पण के गुणधर्म और उपयोग
- अवतल दर्पण द्वारा प्राप्त होने वाले प्रतिबिंब
- उत्तल दर्पण
- उत्तल दर्पण के गुणधर्म और उपयोग
- उत्तल दर्पण द्वारा प्राप्त होनेवाला प्रतिबिंब
- प्रकाश का विचलन और अभिसरण
- गोलीय दर्पणों द्वारा परावर्तन के लिए कार्तीय चिह्न परिपाटी
- दर्पण सूत्र
- गोलीय दर्पण द्वारा होने वाला आवर्धन (M)
- ध्वनि
- परिचय
- ध्वनि तरंग
- ध्वनि के प्रकार
- ध्वनि का संचरण
- ध्वनि तरंग की विशेषताएँ
- आवृत्ति (υ)
- आयाम (A)
- आवर्तनकाल / तरंगकाल (T)
- तरंगलांबी (λ)
- स्वरमान
- ध्वनि की चाल
- विभिन्न माध्यमों में ध्वनि की चाल
- ध्वनि की श्रव्य क्षमता और श्रेणी
- श्राव्य, अवश्राव्य व श्राव्यातीत ध्वनि
- श्राव्यातीत ध्वनि का उपयोग
- ध्वनि का परावर्तन
- ध्वनि के योग्य परावर्तक व अयोग्य परावर्तक
- प्रतिध्वनि
- अनुरणन
- सोनार
- सोनोग्राफी
- मानवी कर्ण
- मानव कर्ण की संरचना
- कार्बन : एक बहुमुखी तत्त्व
- कोयले की कहानी
- कोयला: एक बहुमुखी तत्व
- कोयले की घटना
- कार्बन के गुणधर्म
- अपरूपता तथा कार्बन के अपरूप
- कार्बन के केलासीय रूप : हीरा
- कार्बन के केलासीय रूप : ग्रेफाइट
- कार्बन के केलासीय रूप : फुलरिन
- गैर-क्रिस्टलीय / अनाकार रूप: कोयला
- गैर-क्रिस्टलीय / अनाकार रूप: कोक
- गैर-क्रिस्टलीय / अनाकार रूप: चारकोल
- हाइड्रोकार्बन : मूलभूत कार्बनिक यौगिक
- सह संयोजकीय बंध
- सह संयोजकीय यौगिकों के गुणधर्म
- संतृप्त तथा असंतृप्त हाइड्रोकार्बन
- कार्बन की विलेयता
- कार्बन की रासायनिक अभिक्रिया
- कार्बन की ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया
- कार्बन डाइऑक्साइड
- कार्बन डाइऑक्साइड गैस तैयार करना
- कार्बन डाइऑक्साइड के गुणधर्म
- कार्बन डाइऑक्साइड के उपयोग
- अग्निशामक यंत्र
- मिथेन
- मिथेन
- मिथेन की उपस्थिति
- मिथेन के गुणधर्म
- मिथेन के भौतिक गुणधर्म
- मिथेन के रासायनिक गुणधर्म
1. मिथेन
2. क्लोरिनेशन
- मिथेन के उपयोग
- बायोगैस संयंत्र
- बायोगैस निर्मिति प्रक्रिया
1. अम्लनिर्मिति
2. मिथेन वायु निर्मिति
- बायोगैस निर्मिति प्रक्रिया
- दैनिक जीवन में उपयोगी पदार्थ
- दैनिक जीवन में महत्त्व के लवण
- सोडिअम क्लोराइड (सादा नमक) के गुणधर्म और उपयोग
- सोडियम बाइकार्बोनेट (खाने का सोडा) के गुणधर्म और उपयोग
- कैल्शियम ऑक्सिक्लोराइड (ब्लिचिंग पावडर) के गुणधर्म और उपयोग
- धोने का सोडा के गुणधर्म और उपयोग
- कुछ केलासीय लवण
- हमारे दैनिक उपयोग के केलासन जल युक्त पदार्थ
- साबुन
- परिचय
- साबुन के प्रकार
- संश्लेषित अपमार्जक
- प्रयोग
- रेडियाेधर्मी पदार्थ
- रेडियोसक्रिय किरणों के स्वरूप
- रेडियो सक्रिय तत्त्व के प्रकार
- प्राकृतिक रेडियोसक्रिय तत्त्व
- कृत्रिम रेडियोसक्रिय तत्त्व
- अल्फा, बीटा और गामा किरणों के गुणधर्म
- रेडियो सक्रिय समस्थानिकों के उपयोग
- केवल किरणों का उपयोग करके
- रेडियोसक्रिय तत्त्व का प्रत्यक्ष उपयोग करके
- रेडियो सक्रिय पदार्थों व किरणों के दुष्परिणाम
- दैनिक जीवन के कुछ रासायनिक पदार्थ
- खाद्य रंग और सुगंधित द्रव्य
- डाय
- कृत्रिम रंग
- दुर्गंधनाशक
- टेफ्लॉन
- पावडर कोटिंग
- एनोडिकरण
- मृत्तिका
- सजीवों में परिवहन
- वनस्पतियों में परिवहन
- वनस्पतियों में पानी का वहन
- मूलीय दाब
- वाष्पोत्सर्जन
- वनस्पतियों में अन्न और अन्य पदार्थों का परिवहन
- उत्सर्जन: पदार्थों का सफाया करने के लिए
- वनस्पतियों में होने वाला उत्सर्जन
- मानव उत्सर्जन तंत्र
- वृक्क
- मूत्र वाहिनियां
- मूत्राशय
- मूत्रमार्ग
- मूत्ररंध्र
- रक्त अपोहन
- समन्वय
- पादपों में समन्वय
- उद्दीपन के लिए तत्काल अनुक्रिया
- वृद्धि के कारण गति
- मनुष्य में समन्वय
- तांत्रिकी नियंत्रण
- तांत्रिकी नियंत्रण
- तंत्रिका कोशिका
- तंत्रिका कोशिकाओं के प्रकार
- मानवीय तंत्रिका तंत्र
- मध्यवर्ती तंत्रिका तंत्र
- परिधीय तंत्रिका तंत्र
- स्वंयनिर्देशक तत्ंरिका तंत्र
- केंद्रीय तंत्रिका तंत्र
- मस्तिष्क और मेरूरज्जू
- मानवी मस्तिष्क : रचना
- मस्तिष्क की रचना
1. प्रमस्तिष्क
2. अनुमस्तिष्क
3. मस्तिष्कपुच्छ
- मस्तिष्क की रचना
- परिधीय तंत्रिका तंत्र
- मस्तिष्किय तंत्रिकाएँ
- मेरू तंत्रिका
- स्वयंशासित तंत्रिका तंत्र
- प्रतिवर्ती क्रिया
- रासायनिक नियंत्रण
- अंत:स्रावी ग्रंथियाँ
- अंतःस्रावी ग्रंथि - स्थान और कुछ महत्त्वपूर्ण कार्य
- वंशागति
- आनुवंशिकता
- वंशागत लक्षण
- लक्षणों की वंशागति के नियम - मेंडल का योगदान
- यह लक्षण अपने आपको किस प्रकार व्यक्त करते हैं?
- लिंग निर्धारण
- आनुवंशिक लक्षण और लक्षणों का प्रकटीकरण
- गुणसूत्र
- गुणसूत्रों के प्रकार
- मध्यकेंद्री
- उपमध्यकेंद्री
- अग्रकेंद्री
- अंत्यकेंद्री
- डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक अम्ल (डी.एन.ए.) और उसकी संरचना
- जनुक
- राइबोन्यूक्लिक अम्ल (आर.एन.ए.)
- मेंडल के आनुवंशिकता का सिद्धांत
- मेंडेल का एकसंकर संतति का प्रयोग
- मेंडेल की द्विसंकर संतति
- आनुवंशिक विकृति
- गुणसूत्रों की अपसामान्यता के कारण निर्माण होने वाली विकृतियाँ
1. डाउन्स सिंड्रोम अथवा मंगोलिकता (डाउन्स-संलक्षण : (46 + 1) 21 के गुणसूत्र की त्रिसमसूत्री अवस्था)
2. टर्नर सिंड्रोम (टर्नर- संलक्षण)
3. क्लाईनफेल्टर्स सिंड्रोम (क्लाईनफेल्टर्स संलक्षण) : 44 + XXY - एकजनुकीय उत्परिवर्तन के कारण होने वाले रोग (एकजनुकीय विकार)
1. रंजकहीनता
2. दात्रकोशिका रक्ताल्पता (सिकलसेल एनिमिया) - तंतुकणिकीय विकार
- बहुजनुकीय उत्परिवर्तन के कारण होने वाले विकार (बहुघटकीय विकार)
- गुणसूत्रों की अपसामान्यता के कारण निर्माण होने वाली विकृतियाँ
- ऊतक - "श्रमिकों की टीम"
- प्राणि (जंतु) ऊतक
- उपकला (अभिस्तर) ऊतक
- सरल उपकला:-
- शल्की उपकला
- घनाकार उपकला
- स्तंभाकर उपकला
- संयुक्त उपकला
- संयोजी ऊतक
- संयोजी ऊतक के प्रकार:-
- लचीले संयोजी ऊतक
- संघन संयोजी ऊतक
- विशिष्टकृत संयोजी ऊतक
- पेशी ऊतक
- पेशी ऊतक के प्रकार:-
- कंकाल पेशी
- चिकनी पेशी
- हृदय पेशी
- तंत्रिका ऊतक
- उपकला (अभिस्तर) ऊतक
- पादप (पौधे) ऊतक
- विभज्योतक (विभाजी) ऊतक
- स्थायी ऊतक
- सरल ऊतक
- जटिल ऊतक
- स्थायी ऊतक
- सरल स्थायी ऊतक
- जटिल स्थायी ऊतक
- ऊतक तंत्र
- जैवप्रौद्योगिकी
- जैवप्रौद्योगिकी के लाभ
- ऊतक संवर्धन
- जैवप्रौद्योगिकी के व्यावहारिक उपयोग
- फसल जैवप्रौद्योगिकी
- संकरित बीज
- जनुकीय दृष्टि से उन्नत फसले (Geneticaly modified crops) : बीटी कपास, बीटी बैंगन, गोल्ड़न राईस, तृणनाशकरोधी वनस्पतियॉ
- जैविक खाद (Biofertilizers)
- पशु संवर्धन (Animal Husbandry)
- मानवी स्वास्थ्य (Human health)
- टीका और टीकाकरण (Vaccine and Vaccination) : खाद्य टीके (Edible Vaccines)
- रोगोपचार
- इंटरफेरॉन (Interferon)
- जनुकीय उपचार (Gene therapy)
- क्लोनिंग (Cloning): प्रजननात्मक क्लोनिंग (Reproductive), उपचारात्मक (Therapeutic) क्लोनिंग
- औद्योगिक उत्पाद (श्वेत जैव प्रौद्योगिकी)
- पर्यावरण और जैव प्रौद्योगिकी
- खाद्य जैव तकनिक
- ड़ी.एन.ए. फिंगरप्रिंटिंग (D.N.A. Finger printing)
- कृषि पर्यटन
- पशुपालन (पशुसंवर्धन)
- फार्म तथा फार्म पशुओं का प्रबंधन
- डेरी फार्म प्रबंधन
- कुक्कुट फार्म प्रबंधन
- पशु प्रजनन
- मधुमक्खी पालन (Bee keeping)
- मत्स्यकी (Fisheries)
- पशु कृषि
- कुक्कुट (मुर्गी पालन)
- मुर्गी पालन प्रबंधन
- मुर्गी पालन प्रबंधन के घटक
- अंडा और ब्रायलर उत्पादन
- मुर्गीयों को होनेवाला रोग
- रेशम कीटकपालन
- अंतरिक्ष अवलोकन का परिचय
- प्रकाश के विविध रूप
- दूरदर्शी (दूरबीनें)
- दूरदर्शी (दूरबीन)
- दूरबीन के प्रकार
1. दृश्य-प्रकाश दूरबीन
2. रेडियो दूरबीन
- दृश्य-प्रकाश दूरबीन
- रेडियो दूरबीन
- अंतरिक्ष की दूरबीन
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इस्त्रो), बेंगलुरु
- एस्ट्रोसॅट