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1989 के बाद की अवधि में भारतीय राजनीति के मुख्य मुद्दे क्या रहे हैं? इन मुद्दों से राजनितिक दलों के आपसी जुड़ाव के क्या रूप सामने आए हैं? - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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प्रश्न

1989 के बाद की अवधि में भारतीय राजनीति के मुख्य मुद्दे क्या रहे हैं? इन मुद्दों से राजनितिक दलों के आपसी जुड़ाव के क्या रूप सामने आए हैं?

दीर्घउत्तर

उत्तर

  • 1989 के बाद की अवधि में भारतीय राजनीती के मुख्य मुद्दे इस प्रकार से थे -
  1. लोकसभा के आम चुनाव में कांग्रेस की हार हुई। इसे सिर्फ 197 सीटें मिली। इस कारण सरकारें अस्थिर रहीं और 1991 में पुनः मध्यावधि चुनाव हुआ। कांग्रेस की प्रमुखता समाप्त होने के कारण देश के राजनितिक दलों में आपसी जुड़ाव बढ़ा। राष्ट्रिय मोर्चे की दो बार सरकारों बनी परन्तु कांग्रेस द्वारा समर्थन खींचने और विरोधों दलों में एकता के अभाव के कारण देश में राजनैतिक अस्थितरता रही।
  2. देश राजनीति में मंडल मुद्दे का उदय हुआ। इसने 1989 के बाद की राजनीति में अहम भूमिका निभाई। सभी पार्टियों वोटों की राजनीति करने लगीं। इसलिए पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण दिए जाने के मामले में अधिकतर दलों में आपसी जुड़ाव हुआ।
  3. 1990 के बाद से ही विभिन्न दलों की सरकारों ने जो आर्थिक नीतियाँ अपनाई वे बुनियादी तौर पर बदल चुकी थीं। आर्थिक सुधार और नई आर्थिक निति के कारण देश के अनेक दक्षिण पंथी राष्ट्र और क्षेत्रीय दल परस्पर जुड़ने लगे। इस संदर्भ में दो प्रवृत्तत्रियाँ उभरकर आई। कुछ दल गैर कांग्रेसी गठबंधन और कुछ दल गैर भाजपा दल गठबंधन के समर्थक बने।
  4. दिसंबर 1992 में अयोध्या स्थित एक विवादित ढाँचा (बाबरी महजिद के रूप में प्रसिद्द) विध्वंस कर दिया गया। इस घटना के बाद भारतीय राष्ट्रवाद और धर्म निरपेक्षता पर बहस तेज हो गई। इन बदलावों का संबंध भाजपा के उदय और हिंदुत्व की राजनीति से है।
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गठबंधन का युग
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 9: भारतीय राजनीति : नए बदलाव - प्रश्नावली [पृष्ठ १९४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Political Science [Hindi] Class 12
पाठ 9 भारतीय राजनीति : नए बदलाव
प्रश्नावली | Q 3. | पृष्ठ १९४

संबंधित प्रश्‍न

उन्नी - मुन्नी ने अखबार की कुछ कतरनों को बिखेर दिया है। आप उन्हें कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित करें:

  1. जनता दल का गठन
  2. बाबरी मस्ज़िद का विध्वंस
  3. इंदिरा गाँधी की हत्या
  4. राजग सरकार का गठन
  5. सेंप्रग सरकार का गठन
  6. गोधरा की दुर्घटना और उसके परिणाम

निम्नलिखित में मेल करें:

(क) सर्वानुमति की राजनीती (i) शाहबानो मामला
(ख) जाति आधारित दल (ii) अन्य पिछड़ा वर्ग का उभार
(ग) पर्सनल लॉ और लोगिक न्याय (iii) गठबंधन सरकार
(घ) क्षेत्रीय पार्टियों की बढ़ती ताकत (iv) आर्थिक नीतियों पर सहमति

"गठबंधन की राजनीति के इस नए दौर में राजनीतिक दल विचारधारा को आधार मानकर गठजोड़ नहीं करते हैं।" इस कथन के पक्ष या विपक्ष में आप कौन - से तर्क देंगे।


आपातकाल के बाद के दौर में भाजपा एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरी इस दौर में इस पार्टी के विकास - क्रम का उल्लेख करें।


कांग्रेस के प्रभुत्व का दौर समाप्त हो गया है। इसके बावजूद देश की राजनिति पर कांग्रेस का असर लगातार कायम है। क्या आप इस बात से सहमत हैं? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।


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