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प्रश्न
आप किस प्रकार मृदा निर्माण प्रक्रियाओं तथा मृदा निर्माण कारकों के बीच अंतर ज्ञात करते हैं? जलवायु एवं जैविक क्रियाओं की मृदा निर्माण में दो महत्त्वपूर्ण कारकों के रूप में क्या भूमिका है?
उत्तर
मृदा निर्माण की प्रक्रिया-मृदा निर्माण में अपक्षय की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। भौतिक अपक्षय धरातलीय शैलों को विघटित करके उन्हें बारीक चूर्ण में बदल देता है। जल इन छोटे-छोटे शैल कणों को परतों के रूप में बिछा देता है। जैविक अपक्षय से ह्यूमस बनता है। यह जैव पदार्थ पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं के क्रियाकलापों से बनता है, जो मृदा के निर्माण में सहायता करता है। अपक्षय की प्रक्रिया से भिन्न-भिन्न रंगों और गुणों वाली मृदाओं का निर्माण होता है। मृदा निर्माण के कारक-मृदा निर्माण को नियंत्रित करने वाले कारकों में मूल शैल, उच्चावचे, समय, जलवायु तथा जैविक तत्व शामिल हैं। मूल शैल, उच्चावच, समय को निष्क्रिय कारक और जलवायु तथा जैविक तत्व को क्रियाशील कारक कहते हैं। आधारी शैल तथा जलवायु मृदा निर्माण के दो महत्त्वपूर्ण कारक हैं, क्योंकि ये अन्य कारकों को प्रभावित करते हैं। मृदा निर्माण के कारक
- मूल शैल – मृदा विभिन्न खनिजों से युक्त शैल या मूल शैल पदार्थों से निर्मित होती है।
- उच्चावच – किसी क्षेत्र की स्थलाकृति मूल शैल पदार्थों के अपरदन की मात्रा तथा वहाँ बहने वाले जल की गति को प्रभावित करती है। इस प्रकार मृदा निर्माण में सहायक प्रक्रियाएँ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में उच्चावच से प्रभावित होती हैं।
- समय – मृदा का निर्माण बहुत धीरे-धीरे होता है। इसलिए पूर्णरूप से विकसित मृदा के निर्माण में अधिक समय लगता है।
- जलवायु – मृदा निर्माण की प्रक्रिया में जलवायु सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण कारक है।
- वनस्पति तथा जीव – पेड़-पौधे तथा जीव-जन्तु मूल शैल पदार्थों को विकसित मृदा में बदलने में एक सक्रिय भूमिका निभाते हैं।