मराठी

आप यह कैसे कह सकते हैं कि प्राकृतिक उर्वरता तथा खाद्य उत्पादन के उच्च स्तर ही आरंभ में शहरीकरण के कारण थे? - History (इतिहास)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

आप यह कैसे कह सकते हैं कि प्राकृतिक उर्वरता तथा खाद्य उत्पादन के उच्च स्तर ही आरंभ में शहरीकरण के कारण थे?

दीर्घउत्तर

उत्तर

शहरीकरण तभी संभव हो सकता है जब खेती से इतनी उपजे होती हो कि वह शहर में रहने वाले लोगों का भी पेट भरने में समर्थ हो सके। शहर में लोग घनी बस्तियों में रहते हैं। अतः जहाँ शहर का विकास होता है वहाँ की जमीन | का प्राकृतिक रूप से उपजाऊ होना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। क्योंकि ऐसी जमीन ही अधिक-से-अधिक लोगों को खाद्यान्न प्रदान करने में समर्थ हो सकती है।

लेकिन केवल प्राकृतिक उर्वरता और खाद्य उत्पादन के उच्च स्तर ही शहरीकरण के कारण कदापि नहीं हो सकते हैं। शहरीकरण के अन्य कारक भी हैं; जैसे—उद्योगों का विकास, उन्नत व्यापार, लेखन-कला का विकास, श्रम-विभाजन और कुशल परिवहन व्यवस्था आदि। इन कारकों ने भी शहरीकरण के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्राचीन काल में उद्योगों का विकास शहरीकरण की एक अति आवश्यक शर्त थी। उद्योग मात्र शहरों में रहने वाले लोगों की विभिन्न आवश्यकताओं को ही पूरा नहीं करते, अपितु विभिन्न प्रकार के मजदूरों एवं कारीगरों को आजीविका के साधन भी उपलब्ध कराते हैं। वास्तव में नगर जीवन और लोगों को एक स्थान पर बसना तभी संभव है, जब विशाल संख्या में लोग अलग-अलग गैर-खाद्यान्न उत्पादक कार्यों में लगे हों।

उन्नत व्यापार शहरीकरण का एक अन्य महत्त्वपूर्ण कारक है। व्यापार के द्वारा ही नगरों में बनने वाला माल ग्रामों में पहुँचता है और ग्रामों से कच्चा माल तथा खाद्यान्न शहरों में पहुँचता है। उदाहरण के लिए, मेसोपोटामिया में अच्छी लकड़ी, ताँबा, राँगा, सोना, चाँदी, विभिन्न प्रकार के पत्थर आदि तुर्की, ईरान से आयात करते थे। इसके स्थान पर मेसोपोटामिया से कपड़ा तथा कृषि संबंधी उत्पाद अन्य देशों को क्षिर्यात किए जाते थे।

शहरी विकास के लिए लेखन कला की अहम् भूमिका रही है। इसका कारण यह है कि हिसाब-किताब की व्यवस्था के बिना व्यापार की किसी प्रकार की प्रगति संभव नहीं है। नि:संदेह लेखन कला के विकास ने मेसोपोटामिया में नगरों के उदय में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। लेखन कला के साथ-साथ शहरीकरण के लिए सुव्यवस्थित प्रशासनिक व्यवस्था भी अतिआवश्यक है। व्यापार की प्रगति के लिए शांति और सुरक्षा की स्थापना कुशल प्रशासन द्वारा ही संभव है। इस संबंध में उल्लेखनीय है कि कांस्य युग में जीवन निर्वाह के लिए आवश्यक वस्तुओं के अतिरिक्त अन्य वस्तुओं के उत्पादक मुख्य रूप से शासक वर्ग और मंदिरों पर ही निर्भर होते थे। प्रशासक वर्ग केवल कानून और व्यवस्था का संचालन ही नहीं करते थे, अपितु श्रम-विभाजन को भी नियंत्रित करते थे।

नि:संदेह श्रम-विभाजन ने ही शहरीकरण की गति को बल दिया। नगरी जीवन और लोगों का एक स्थान पर बसना तभी संभव हो पाता है जब अनेक लोग विभिन्न गैर-खाद्यान्न उत्पादक रोजगारों, उदाहरण के लिए धातुकर्म, मुहर, नक्काशी, प्रशासन, मंदिर सेवा आदि में लगे हुए हों। ऐसी स्थिति में शहरी अर्थव्यवस्था में सामाजिक संगठन का होना नितांत आवश्यक है। इसका कारण यह है कि शहर के निर्माताओं को अपने-अपने उद्योगों के लिए विभिन्न वस्तुओं की आवश्यकता होती है जिन्हें केवल किसी एक स्थान से प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार एक ही व्यक्ति सभी प्रकार की वस्तुओं के निर्माण में कुशल नहीं हो सकता। यही कारण है कि औद्योगिक एवं व्यापारिक विकास में श्रम-विभाजन का पालन अतिआवश्यक हो जाता है। कुशल परिवहन व्यवस्था भी शहरीकरण के लिए अतिआवश्यक होती है। परिवहन व्यवस्था अच्छी होने पर ग्रामों से पर्याप्त मात्रा में अनाज शहरों में भेजा जा सकता है और शहरों में तैयार वस्तुओं को ग्रामों तक पहुँचाया जा सकता है। मेसोपोटामिया की नहरें तथा प्राकृतिक जल संसाधन छोटी-बड़ी बस्तियों के बीच परिवहन के अच्छे साधन थे। यही कारण है कि उन दिनों फ़रात नदी व्यापार के विश्व-मार्ग का कार्य करती थी।

अतः उपरोक्त विवेचना के आधार पर कहा जा सकता है कि शहरीकरण के विकास में प्राकृतिक उर्वरता और खाद्य-उत्पादन के उच्च स्तर के साथ-साथ अनेक अन्य कारण भी उत्तरदायी थे।

shaalaa.com
लेखन कला और शहरी जीवन का परिचय
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2: लेखन कला और शहरी जीवन - अभ्यास [पृष्ठ ४८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी History [Hindi] Class 11
पाठ 2 लेखन कला और शहरी जीवन
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ ४८
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×