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प्रश्न
ऐसीटिक अम्ल, ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल एवं ट्राइफ्लुओरो ऐसीटिक अम्ल की समान मात्रा से जल के हिमांक में अवनमन इनके उपर्युक्त दिए गए क्रम में बढ़ता है। संक्षेप में समझाइए।
उत्तर
\[\begin{array}{cc}
\ce{H}\phantom{..............}\ce{Cl}\phantom{................}\ce{F}\phantom{........}\\
\backslash\phantom{...............}\backslash\phantom{................}\backslash\phantom{......}\\
\ce{H - C - COOH Cl - C - COOH F - C - COOH}\\
/\phantom{...............}/\phantom{...............}/\phantom{.......}\\
\phantom{..}\ce{\underset{{ऐसीटिक अम्ल}}{\phantom{..}H}\phantom{...}\underset{{ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल}}{\phantom{.}Cl}\underset{{ट्राइफ्लुओरोऐसीटिक अम्ल\phantom{..}}}{F\phantom{.....}}}
\end{array}\]
हिमांक में अवनमन निम्न क्रम में होता है –
ऐसीटिक अम्ल < ट्राइक्लोरोऐसीटिक अम्ल < ट्राइफ्लुओरोऐसीटिक अम्ल
फ्लोरीन अधिक ऋणविद्युती होने के कारण उच्चतम इलेक्ट्रॉन निष्कासन प्रेरणिक प्रभाव रखती है। अतः ट्राइफ्लुओरोऐसीटिक अम्ल प्रबल अम्ल है जबकि ऐसीटिक अम्ल दुर्बलतम अम्ल है। अतः ट्राइफ्लुओरोऐसीटिक अम्ल अत्यधिक आयनित होकर अधिक आयन उत्पन्न करता है जबकि ऐसीटिक अम्ल सबसे कम आयन उत्पन्न करता है। अधिक आर्यन उत्पन्न करने के कारण ट्राइफ्लुओरोऐसीटिक अम्ल हिमांक में अधिक अवनमन करता है एवं ऐसीटिक अम्ल सबसे कम।
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Kf = 3.9 K kg mol−1
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(Ka = 1.4 × 10-3, Kf = 186 K kg mol-1)