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''अपना सोना खोटा तो परखवैया का कौन दोस?'' से लेखक का क्या तात्पर्य है? - Hindi (Elective)

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प्रश्न

''अपना सोना खोटा तो परखवैया का कौन दोस?'' से लेखक का क्या तात्पर्य है?

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

इसका तात्पर्य है कि यदि दोष हमारी वस्तु में है, तो हमें परखने वाले को दोष नहीं देना चाहिए। अर्थात परखने वाला तो वहीं दोष निकालेगा, जो उस वस्तु में होगा। अतः परखने वाले को किसी भी प्रकार से दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। लेखक पुरातत्व महत्व की वस्तु को देखते ही अपने साथ ले जाता था। उसकी इस आदत से सभी परिचित थे। अतः कहीं भी मूर्ति गायब हो जाती थी, तो लोग लेखक का नाम ही लेते थे। अतः लेखक कहता है कि इसमें दोष नाम लेने वाला का नहीं स्वयं उसका है।

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कच्चा चिट्ठा
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.03: ब्रजमोहन व्यास (कच्चा चिट्ठा) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ९९]

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एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
पाठ 2.03 ब्रजमोहन व्यास (कच्चा चिट्ठा)
प्रश्न-अभ्यास | Q 4. | पृष्ठ ९९

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