Advertisements
Advertisements
प्रश्न
अतिथि रूपी देवता और लेखक रूपी मनुष्य को साथ-साथ रहने में क्या परेशानियाँ दिख रही थीं?
उत्तर
भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता माना गया है जिसका स्वागत करना हर मनुष्य का कर्तव्य होता है। इस देवता और अतिथि को साथ रहने में यह परेशानी है कि देवता दर्शन देकर चले जाते हैं, परंतु आधुनिक अतिथि रूपी देवता मेहमान नवाजी का आनंद लेने के चक्कर में मनुष्य की परेशानी भूल जाते हैं। जिस मनुष्य की आर्थिक स्थिति अच्छी न हो उसके लिए आधुनिक देवता का स्वागत करना और भी कठिन हो जाता है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
गिलहरी के घायल बच्चे का उपचार किस प्रकार किया गया?
लेखिका का ध्यान आकर्षित करने के लिए गिल्लू क्या करता था?
माँ लेखक की स्कूली पढ़ाई को लेकर क्यों चिंतित रहती थी?
लेखक ने अर्धमृत्यु की हालत में कहाँ रहने की जिद की और क्यों?
लेखक ने अपने पिता से किया हुआ वायदा किस तरह निभाया? इससे आपको क्या सीख मिलती है?
हामिद खाँ ने अपने व्यवहार से भारतीय संस्कृति की किस विशेषता की यादें ताज़ी कर दीं, और कैसे?
किस कारण से प्रेरित हो स्थानीय कलेक्टर ने पटेल को गिरफ़्तार करने का आदेश दिया?
नदी पार करने के लिए सत्याग्रहियों ने रात दस बजे के बाद का समय क्यों चुना?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए −
किसी व्यक्ति की पोशाक को देखकर हमें क्या पता चलता है?
बूढ़ी महिला द्वारा खरबूजे बेचे जाने को लोग घृणित कार्य क्यों समझ रहे थे?
भगवान का मुँह अँधेरे खरबूजे तोड़ना किस तरह जानलेवा साबित हुआ?
पर्वतारोहण से संबंधित दस चीज़ों के नाम लिखिए।
निम्नलिखित शब्दों के पर्याय लिखिए
- वारिस – ____________
- जिगरी – ___________
- कहर – ___________
- मुकाम – ___________
- रूबरू – ___________
- फ़र्क – ___________
- तालीम – ___________
- गिरफ्तार – ___________
महादेव भाई स्वयं को गांधी जी का ‘पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर’ क्यों कहते थे?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए −
साधारण से साधारण आदमी तक के दिल में क्या बात अच्छी तरह घर कर बैठी है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए −
धर्म के स्पष्ट चिह्न क्या हैं?
अग्रिम दल ने एवरेस्ट अभियान दल की मदद किस तरह की?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −
कौन-सा आघात अप्रत्याशित था और उसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
यहाँ है बुद्धि पर परदा डालकर पहले ईश्वर और आत्मा का स्थान अपने लिए लेना, और फिर धर्म, ईमान, ईश्वर और आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए लोगों को लड़ाना-भिड़ाना।
उदाहरण के अनुसार ‘त्व’ प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाइए-
उदाहरण : देव + त्व = देवत्व