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प्रश्न
औपनिवेशिक मद्रास में शहरी और ग्रामीण तत्व किस हद तक घुल-मिल गए थे?
उत्तर
अंग्रज व्यापारियों ने वस्त्र उत्पादों की खोज में 1639 ई० में पूर्वीतट पर मद्रास पट्टनम में एक व्यापारिक बस्ती की स्थापना की। सुरक्षा की दृष्टि से उन्होंने मद्रास की किलेबंदी करवाई और यह किला फोर्ट सेंट जॉर्ज के नाम से प्रसिद्ध हुआ। 1761 ई० में फ्रांसीसियों की पराजय के परिणामस्वरूप मद्रास और अधिक सुरक्षित हो गया तथा शीघ्र ही एक महत्त्वपूर्ण व्यावसायिक शहर बन गया। यूरोपीय किलेबंद क्षेत्र के अंदर रहते थे, जिसे ‘व्हाइट टाउन’ कहा जाता था। फोर्ट सेंट जॉर्ज ‘व्हाइट टाउन’ का केंद्रक था। भारतीय ब्लैक टाउन, जिसे किलेबंद क्षेत्र के बाहर स्थापित किया गया था, में रहते थे। उल्लेखनीय है कि मद्रास का विकास अनेक ग्रामों को मिलाकर किया गया था। अतः इसमें शहरी और ग्रामीण तत्वों का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। मद्रास में भिन्न-भिन्न समुदायों के लिए रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध थे।
अतः विविध प्रकार के आर्थिक कार्य करने वाले अनेक समुदाय यहाँ आए और यहीं बस गए। दुबाश, तेलुगू कोमाटी और वेल्लालार इसी प्रकार के समुदाय थे। दुबाश स्थानीय भाषा और अंग्रेज़ी दोनों को बोलने में कुशल थे। अतः वे भारतीयों एवं गोरों के बीच मध्यस्थ का काम करते थे। वेल्लालार नवीन अवसरों का लाभ उठाने वाली एक स्थानीय ग्रामीण जाति थी और तेलुगू कोमाटी अनाज व्यापार में लगा एक प्रभावशाली व्यावसायिक समुदाय था। 18वीं शताब्दी से गुजराती बैंकर भी यहाँ बस गए थे। पेरियार एवं वन्नियार गरीब श्रमिक वर्ग के अंतर्गत आते थे। समीप ही स्थित ट्रिप्लीकेन मुस्लिम जनसंख्या का केंद्र था। अर्काट के नवाब भी यहाँ रहते थे। माइलापुर तथा ट्रिप्लीकेन जाने-माने हिंदू धार्मिक केंद्र थे। अनेक ब्राह्मण अपनी आजीविका यहीं से प्राप्त करते थे। सानथोम तथा वहाँ का बड़ा गिरजाघर रोमन कैथोलिक लोगों का केंद्र था।
ये सभी बस्तियाँ मद्रास शहर का भाग बन गई थीं। इस प्रकार, अनेक ग्रामों को मिला लिए जाने के कारण मद्रास दूर-दूर तक फैली शहर बन गया। भारत में ब्रिटिश सत्ता मजबूत हो जाने पर यूरोपीय किलेबंद क्षेत्र से बाहर, माउंट रोड और पूनामाली रोड पर अपने-अपने रहने के लिए गार्डन हाउसेस अर्थात् बगीचों वाले मकानों का निर्माण करवाने लगे। अंग्रेजों की जीवन-शैली का अनुकरण करते हुए सम्पन्न भारतीय इसी प्रकार के निवास स्थान बनवाने लगे। इस प्रकार, मद्रास के आस-पास स्थित ग्रामों के स्थान पर नए उपशहरी क्षेत्र विकसित होने लगे। गरीब लोग अपने काम के स्थान के निकट स्थित ग्रामों में रहने लगे। इस प्रकार, मद्रास के क्रमिक शहरीकरण के परिणामस्वरूप इन ग्रामों के मध्य स्थित शहर के अंतर्गत आ गए। इस प्रकार मद्रास का स्वरूप एक अर्ध ग्रामीण शहर जैसा हो गया।