मराठी

औपनिवेशिक संदर्भ में शहरीकरण के रुझानों को समझने के लिए जनगणना संबंधी आँकड़े किस हद तक उपयोगी | होते हैं? - History (इतिहास)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

औपनिवेशिक संदर्भ में शहरीकरण के रुझानों को समझने के लिए जनगणना संबंधी आँकड़े किस हद तक उपयोगी | होते हैं?

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

औपनिवेशिक शासनकाल में शहरों के विस्तार पर नज़र रखने के उद्देश्य से नियमित रूप से जनगणना की जाती थी। 1872 ई० में अखिल भारतीय जनगणना का प्रथम प्रयास किया गया। तत्पश्चात् 1881 ई० से दशकीय अर्थात् प्रत्येक 10 वर्षों में की जाने वाली जनगणना व्यवस्था को नियमित रूप दे दिया गया। औपनिवेशिक संदर्भ में शहरीकरण के रुझानों को समझने में जनगणना संबंधी आँकड़ों से महत्त्वपूर्ण एवं ठोस जानकारी उपलब्ध होती है

  1. जनसंख्या संबंधी आँकड़ों से औपनिवेशिक भारत के विभिन्न शहरों में रहने वाले श्वेत और अश्वेत लोगों की कुल संख्या को सरलतापूर्वक पता लगाया जा सकता है।
  2. जनगणना संबंधी आँकड़ों से श्वेत एवं अश्वेत शहरों, शहरों के निर्माण, विस्तार, उनमें रहने वाले लोगों के जीवन-स्तर, | भयंकर बीमारियों के जनता पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों आदि के विषय में भी महत्त्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध होती है।
  3. जनगणना संबंधी आँकड़ों से शहरों में रहने वाले लोगों की उम्र, लिंग, जाति एवं व्यवसाय आदि के विषय में भी महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ प्राप्त की जा सकती हैं।
  4. जनगणना संबंधी आँकड़ों से जनसंख्या के विषय में प्राप्त सामाजिक जानकारियों को सुगम आँकड़ों में परिवर्तित किया जा सकता है। इस प्रकार, जनसंख्या संबंधी आँकड़ों से औपनिवेशिक संदर्भ में शहरीकरण के रुझानों को समझने में महत्त्वपूर्ण सहायता मिलती है।

जनगणना संबंधी आँकड़ों की भ्रामकता–विद्वान इतिहासकारों के विचारानुसार जनगणना संबंधी आँकड़े अनेक रूपों में भ्रामक सिद्ध हो सकते हैं, इसलिए उनका प्रयोग अत्यधिक सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।

shaalaa.com
औपनिवेशिक शहरों की पड़ताल
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 12: औपनिवेशिक शहर - अभ्यास [पृष्ठ ३४४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी History [Hindi] Class 12
पाठ 12 औपनिवेशिक शहर
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ ३४४
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×