Advertisements
Advertisements
प्रश्न
‘भारतीय त्योहारों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण निहित हैं’ इस संदर्भ मे अंतरजाल से जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर
प्रत्येक भारतीय त्योहार का न केवल वैज्ञानिक महत्व है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा मकसद भी छुपा हुआ होता है। इसके विपरीत पश्चिमी सहित अन्य देशों में मनाए जाने वाले त्योहारों का कोई वैज्ञानिक महत्व नहीं होता। भारतीय संस्कृति में कमजोर व असहाय की रक्षा करना सबसे बड़ा धर्म माना जाता है। हमारे यहाँ मनाए जाने वाले त्योहारों में मुख्य रूप से मकर संक्रांति, होली, दीपावली, दशहरा और श्रावणी इत्यादि शामिल है। उन्होंने वैद्धिककाल की गणना को पूरी तरह से वैज्ञानिक बताते हुए कहा कि जनवरी-फरवरी आदि की गणना सृष्टि के अनुसार सही नहीं है। इसलिए हमें एक जनवरी को नववर्ष के रूप में नहीं मनाना चाहिए। हिन्दु धर्म में माना जाता है कि दीपावली के दिन यानि कार्तिक मास कि अमावस्या को अयोध्या के राजा भगवान श्री राम चन्द्र जी अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे। इसी खुशी में अयोध्या वासियों ने घी के दीपक जला कर उनका स्वागत किया। तब से इस परम्परा को भारतवासी आज तक निभाते आ रहे हैं। यह हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला भारत का सबसे प्राचिन और बड़ा त्यौहार है। दीपावली को मनाने के पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी है। दीपावली वर्षा ऋतु के बाद आती है। इसलिए यह समय किटों, फफूंदीयों आदि के पोषण का समय होता है। अर्थात इस समय किड़े-मकोड़े अधिक हो जाते क्योंकि इनको सही वातावरण मिलता है। और इतने अधिक किट भयानक बीमारियां पैदा कर सकते हैं। दीपावली के उपलक्ष पर घरों की सफाई की जाती है। जिससे किटों का खतरा कम हो जाता है और घी और तेल के दिपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता है। जिससे किड़े मर जाते हैं। आज कल पटाखों से कार्बन डाईआक्साइड और अन्य गैंस इतनी ज्यादा मात्रा में निकलती है कि इससे किड़े-मकोड़े मर जाते है। और त्यौहार के साथ-साथ सभी भयानक बीमारीयों के खतरे से भी बच जाते हैं।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवयित्री किसका पथ आलोकित करना चाह रही हैं?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए −
कवयित्री को आकाश के तारे स्नेहहीन से क्यों प्रतीत हो रहे हैं?
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
दे प्रकाश का सिंधु अपरिमित,
तेरे जीवन का अणु ल गल !
इस कविता में जो भाव आए हैं, उन्हीं भावों पर आधारित कवयित्री द्वारा रचित कुछ अन्य कविताओं का अध्ययन करें; जैसे-
(क) मैं नीर भरी दुख की बदली
(ख) जो तुम आ जाते एकबार
ये सभी कविताएँ ‘सन्धिनी’ में संकलित हैं।
इस कविता को कंठस्थ करें तथा कक्षा में संगीतमय प्रस्तुति करें।
विश्व के शीतल-कोमल प्राणी क्या भोग रहे हैं और क्यों ?
‘मधुर-मधुर मेरे दीपक जल’ के आधार पर विश्व-शलभ की स्थिति स्पष्ट कीजिए। ऐसे लोगों के प्रति कवयित्री की क्या सोच है?
मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! सीमा ही लघुता का बंधन, है अनादि तू मत घड़ियाँ गिन; मैं दृग के अक्षय कोषों से तुझ में भरती हूँ आँसू जल ! सजल-सजल मेरे दीपक जल ! |
इस पद्यांश पर ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर निम्न शब्द हों।
- सीमा = ______
- आँसू जल = ______
मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! सीमा ही लघुता का बंधन, है अनादि तू मत घड़ियाँ गिन; मैं दृग के अक्षय कोषों से तुझ में भरती हूँ आँसू जल ! सजल-सजल मेरे दीपक जल ! |
पद्यांश में आए उपसर्ग-प्रत्यययुक्त शब्दों काे ढूँढ़कर लिखिए।
मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! |
पद्यांश की प्रथम पाँच पंक्तियों का सरल अर्थ लिखिए।