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बहुत अधिक दूरियों पर (30,000 km से अधिक) पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र अपनी द्विध्रुवीय आकृति से काफी भिन्न हो जाता है। कौन-से कारक इस विकृति के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं? - Physics (भौतिक विज्ञान)

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प्रश्न

बहुत अधिक दूरियों पर (30,000 km से अधिक) पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र अपनी द्विध्रुवीय आकृति से काफी भिन्न हो जाता है। कौन-से कारक इस विकृति के लिए उत्तरदायी हो सकते हैं?

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

पृथ्वी के आयनमण्डल में अनेक आवेशित कण विद्यमान रहते हैं जिनकी गति एक अलग चुम्बकीय-क्षेत्र उत्पन्न करती है। यही चुम्बकीय-क्षेत्र, पृथ्वी तल से अधिक दूरी पर पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र को विकृत कर देता है। आयनों के कारण उत्पन्न चुम्बकीय-क्षेत्र सौर पवन पर निर्भर करता है।

(f) सूत्र R = `"mv"/"qB"`से,

`"R" prop 1/"B"`

इससे स्पष्ट है कि अत्यन्त क्षीण चुम्बकीय-क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण अति विशाल त्रिज्या का मार्ग अपनाती है जो कि थोड़ी दूरी में लगभग सरल रेखीय प्रतीत होता है; अतः छोटी दूरियों के लिए सूक्ष्म चुम्बकीय-क्षेत्र अप्रभावी प्रतीत होते हैं परन्तु बड़ी दूरियों में ये प्रभावी विक्षेपण उत्पन्न करते हैं।

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चुंबकीकरण एवं चुंबकीय तीव्रता
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पाठ 5: चुंबकत्व एवं द्रव्य - अभ्यास [पृष्ठ २००]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Physics [Hindi] Class 12
पाठ 5 चुंबकत्व एवं द्रव्य
अभ्यास | Q 5.2 - (e) | पृष्ठ २००

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