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बस्तर और जावा के औपनिवेशिक वन प्रबंधन में क्या समानताएँ हैं? - Social Science (सामाजिक विज्ञान)

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प्रश्न

बस्तर और जावा के औपनिवेशिक वन प्रबंधन में क्या समानताएँ हैं?

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

बस्तर में वन प्रबंधन अंग्रेजों के हाथों में और जावा में डचों के हाथों में था। किंतु दोनों सरकारों का उद्देश्य एक ही था।

दोनों ही सरकारें अपनी जरूरतों के लिए लकड़ी चाहते थे और उन्होंने अपने एकाधिकार के लिए काम किया। दोनों ने ही ग्रामीणों को घुमंतू खेती करने से रोका। दोनों ही औपनिवेशिक सरकारों ने स्थानीय समुदायों को विस्थापित करके वन्य उत्पादों का पूर्ण उपयोग कर उनको पारंपरिक आजीविका कमाने से रोका।

बस्तर के लोगों को आरक्षित वनों में इस शर्त पर रहने दिया गया कि वे लकड़ी का काम करने वाली कंपनियों के लिए काम मुफ्त में किया करेंगे। इसी प्रकार के काम की माँग जावा में ब्लैन्डाँगडिएन्स्टेन प्रणाली के अंतर्गत पेड़ काटने और लकड़ी ढोने के लिए ग्रामीणों से की गई।

जब दोनों स्थानों पर जंगली समुदायों को अपनी जमीन छोड़नी पड़ी तो विद्रोह हुआ जिन्हें अंततः कुचल दिया गया। जिस प्रकार 1770 में जावा में कलंग विद्रोह को दबा दिया गया उसी प्रकार 1910 में बस्तर का विद्रोह भी अग्रेजों द्वारा कुचल दिया गया।

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वन-विद्रोह
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पाठ 4: वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद - प्रश्न [पृष्ठ ९६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Social Science - India and the Contemporary World 1 [Hindi] Class 9
पाठ 4 वन्य समाज एवं उपनिवेशवाद
प्रश्न | Q 2. | पृष्ठ ९६
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