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प्रश्न
‘‘चखा भी नहीं जननि का क्षीर’’ काव्य पंक्ति से कर्ण की विवशता स्पष्ट कीजिए।
थोडक्यात उत्तर
उत्तर
पौराणिक आख्यानों के अनुसार यद्यपि कर्ण सूर्य और कुंती का पुत्र था। चूँकि कर्ण का जन्म कुंती के विवाह के पूर्व हुआ था, इसलिए लोकलाज के भय से कुंती ने कर्ण को एक झाँपी में रखकर नदी में बहा दिया। वह झाँपी राधा नाम की एक महिला को मिली। उसी ने कर्ण का पालन-पोषण किया। ईश्वरीय न्याय भी बड़ा विचित्र होता है। राजकुल में पैदा होने के बावजूद वह राजकुल के सुखों से वंचित रहा। उसे गुरु द्रोणाचार्य ने अपना शिष्य बनाने से भी मना कर दिया। विवश होकर कर्ण ने धनुर्विद्या की कला परशुराम से सीखी तथा अर्जुन से बढ़कर धनुर्धर बना। कर्ण को रंगभूमि में अर्जुन का सामना करने से भी रोका गया। दुर्योधन ने कर्ण को अंगदेश का राजा घोषित किया। इसके पश्चात वह अर्जुन से युद्ध करने के योग्य समझा गया।
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अद्भुत वीर
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?