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CO2 के परिवहन (ट्रांसपोर्ट) की मुख्य क्रियाविधि क्या है; व्याख्या करें? - Biology (जीव विज्ञान)

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प्रश्न

CO2 के परिवहन (ट्रांसपोर्ट) की मुख्य क्रियाविधि क्या है; व्याख्या करें?

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

कार्बन डाइऑक्साइड का रुधिर द्वारा परिवहन ऊतकों में संचित खाद्य पदार्थों के ऑक्सीकरण से उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड विसरण द्वारा रुधिर केशिकाओं में चली जाती है। रुधिर केशिकाओं द्वारा इसकापरिवहन श्वसनांगों तक निम्नलिखित तीन प्रकार से होता है
(1) प्लाज्मा में घुलकर:
लगभग 7% कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन प्लाज्मा में घुलकर कार्बोनिक अम्ल के रूप में होता है।

(2) बाइकार्बोनेट्स के रूप में:
लगभग 70% कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन बाइकार्बोनेट्स के रूप में होता है। प्लाज्मा के अन्दर कार्बोनिक अम्ल का निर्माण धीमी गति से होता है। अत: कार्बन डाइऑक्साइड का अधिकांश भाग (93%) लाल रुधिराणुओं में विसरित हो जाता है। इसमें से 70% कार्बन डाइऑक्साइड से कार्बोनिक अम्ल व अन्त में बाइकार्बोनेट्स का निर्माण हो जाता है। लाल रुधिराणुओं में कार्बोनिक एनहाइड्रेज एन्जाइम की उपस्थिति में कार्बोनिक अम्ल का निर्माण होता है।

\[\ce{CO2 + H2O->[\text{कार्बोनिक एनहाड्रेज}][\text{एन्जाइम}]H2CO3->H+ + HCO3^-}\]

प्लाज्मा में, कार्बोनिक एनहाइड्रेज एन्जाइम अनुपस्थित होता है; अत: प्लाज्मा में बाइकार्बोनेट कम मात्रा में बनता है। बाइकार्बोनेट आयन `("HCO"_3^-)` लाल रुधिराणुओं के पोटैशियम आयन (K+) तथा प्लाज्मा के सोडियम आयन (Na+) से क्रिया करके क्रमशः पोटैशियम तथा सोडियम बाइकार्बोनेट बनाता है।

  1. प्लाज्मा में - \[\ce{HCO_3^- + Na+->\underset{\text{सोडियम बाइकार्बोनेट}}{NaHCO3}}\]
  2. लाल रुधिराणुओं में - \[\ce{HCO3^- + K+ ->\underset{\text{पोटैशियम बाइकार्बोनेट}}{KHCO3}}\]

क्लोराइड शिफ्ट या हैम्बर्गर परिघटना सामान्य pH तथा विद्युत तटस्थता बनाए रखने के लिए जितने बाइकार्बोनेट आयन रुधिर कणिकाओं से प्लाज्मा में आते हैं, उतने ही क्लोराइड आयन (Cl) रुधिर कणिकाओं में जाकर उसकी पूर्ति करते हैं। इस क्रिया के फलस्वरूप प्लाज्मा में बाइकार्बोनेट तथा लाल रुधिरे कणिकाओं में क्लोराइड आयनों का जमाव हो जाता है। इस क्रिया को क्लोराइड शिफ्ट कहते हैं। श्वसन तल पर प्रक्रियाएँ विपरीत दिशा में होती हैं जिससे CO2 मुक्त होकर वायुमण्डल में चली जाती है।

(3) कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन के रूप में:
कार्बन डाइऑक्साइड का लगभग 23% भाग लाल रुधिर कणिकाओं के हीमोग्लोबिन से मिलकर अस्थायी यौगिक बनाता है

हीमोग्लोबिन + CO2 → कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन

सोडियम तथा पोटैशियम के बाइकार्बोनेट्स तथा कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन आदि पदार्थों से युक्त रुधिर अशुद्ध होता है। यह रुधिर ऊतकों और अंगों से शिराओं द्वारा हृदय में पहुँचता है। हृदय से यह रुधिर फुफ्फुस धमनियों द्वारा फेफड़ों में शुद्ध होने के लिए जाता है। फेफड़ों में ऑक्सीजन की अधिक मात्रा होने के कारण रुधिर की हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन से मिलकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है। ऑक्सीहीमोग्लोबिन, हीमोग्लोबिन की अपेक्षा अधिक अम्लीय होता है। ऑक्सीहीमोग्लोबिन के अम्लीय होने के कारण श्वसन सतह पर कार्बोनेट्स तथा कार्बोनिक अम्ल का विखण्डन होता है

  1. \[\ce{2NaHCO3->[\text{ऑक्सीहीमोग्लोबिन}][\text{की अम्लीयता}]Na2CO3 + H2O + CO2↑}\]
  2. \[\ce{2KHCO3->[\text{ऑक्सीहीमोग्लोबिन}][\text{की अम्लीयता}]K2CO3 + H2O + CO2↑}\]
  3. \[\ce{H2CO3->H2O + CO2↑}\]
  4. कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन → हीमोग्लोबिन + CO2

कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन तथा प्लाज्मा प्रोटीन के रूप में बने अस्थायी यौगिक भी ऑक्सीजन से संयोजित होकर कार्बन डाइऑक्साइड को मुक्त कर देते है

उपर्युक्त प्रकार से मुक्त हुई कार्बन डाइऑक्साइड रुधिर केशिकाओं तथा फेफड़ों की पतली दीवारों से विसरित होकर फेफड़ों में पहुँचती है जहाँ से यह उच्छ्वास द्वारा बाहर निकाल दी जाती है।

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गैसों का परिवहन - कार्बनडाइऑक्साइड का परिवहन
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पाठ 14: श्वसन और गैसों का विनिमय - अभ्यास [पृष्ठ १९२]

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एनसीईआरटी Biology [Hindi] Class 11
पाठ 14 श्वसन और गैसों का विनिमय
अभ्यास | Q 4. | पृष्ठ १९२
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