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दबाव-समूहों और राजनीतिक दलों के आपसी संबंधों का स्वरूप कैसा होता है? वर्णन करें। - Social Science (सामाजिक विज्ञान)

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प्रश्न

दबाव-समूहों और राजनीतिक दलों के आपसी संबंधों का स्वरूप कैसा होता है? वर्णन करें।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

दबाव-समूह दलीय राजनीति में सीधे भाग नहीं लेते लेकिन वे चुनावों के समय तथा चुनावों के बाद राजनीतिक दलों पर असर डालना चाहते हैं। दबाव-समूह राजनीतिक दलों के माध्यम से ही अपनी माँगें मनवाने की कोशिश करते हैं। दबाव- समूह और राजनीतिक दल के बीच का रिश्ता कई रूप धारण कर सकता है1. कुछ मामलों में दबाव-समूह राजनीतिक दलों द्वारा ही बनाए गए होते हैं अथवा उनका नेतृत्व राजनीतिक दलों के नेता करते हैं

  1. कुछ दबाव - समूह राजनीतिक दल की एक शाखा के रूप में काम करते हैं। जैसे- भारत के अधिकतर मजदूर संगठन और छात्र संगठन या तो बड़े राजनीतिक दलों द्वारा बनाए जाते हैं या उनसे संबंधित होते हैं।
  2. दबाव - समूह चुनावों के समय राजनीतिक दलों की आर्थिक मदद करते हैं तथा इस मदद के बदले में चुनावों के बाद यदि वह राजनीतिक दल सरकार में आता है तो उस पर ये दबाव डालकर अपने हितों की पूर्ति के लिए नीतियाँ बनवाते हैं। इस प्रकार राजनीतिक दल व दबाव-समूह दोनों एक-दूसरे के लिए जरूरी हैं।
  3. अधिकांशतः दबाव - समूहों का राजनीतिक दलों से प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता। दोनों परस्पर विरोधी पक्ष लेते हैं फिर भी इनके बीच संवाद कायम रहता है और सुलह की बातचीत चलती रहती है। राजनीतिक दलों के अधिकतर नए नेता दबाव-समूह अथवा आंदोलनकारी समूहों से आते हैं।
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दबाव-समूह और आंदोलन
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 5: जन-संघर्ष और आंदोलन - प्रश्नावली [पृष्ठ ६९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Social Science (Political Science) - Democratic Politics 2 [Hindi] Class 10
पाठ 5 जन-संघर्ष और आंदोलन
प्रश्नावली | Q 2. | पृष्ठ ६९

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दबाव-समूह और राजनीतिक दल में क्या अंतर है?


जो संगठन विशिष्ट सामाजिक वर्ग जैसे मज़दूर, कर्मचारी, शिक्षक और वकील आदि के हितों को बढ़ावा देने की गतिविधियाँ चलाते हैं उन्हें ______ कहा जाता है।


निम्नलिखित में से किस कथन से स्पष्ट होता है कि दबाव-समूह और राजनीतिक दल में अंतर होता है


सूची-I ( संगठन और संघर्ष) का मिलान सूची-II से कीजिए और सूचियों के नीचे दी गई सारणी से सही उत्तर चुनिए –

  सूची-I सूची-II
1 किसी विशेष तबके या समूह के हितों को बढ़ावा देने वाले संगठन (क) आंदोलन
2 जन - सामान्य के हितों को बढ़ावा देने वाले संगठन (ख) राजनीतिक दल
3 किसी सामाजिक समस्या के असाधान के लिए चलाया गया एक ऐसा संघर्ष जिसमे सांगठनिक संरचना हो भी सकती है और नहीं भी। (ग) वर्ग - विशेष के हित समूह
4 ऐसा संगठन जो राजनितिक सत्ता पाने की गरज़ से लोगों को लामबंद करता है। (घ) लोक कल्याणकरी हित समूह

सूची-I का सूची-II से मिलान करें और सूचियों के नीचे दी गई सारणी में से सही उत्तर को चुनें –

  सूची-I सूची-II
1. दवाब-समूह  नर्मदा बचाओ आंदोलन
2. लंबी अवधि का आन्दोलन  असम गण परिषद् 
3. एक मुद्दे पर आधारित आंदोलन महिला आंदोलन
4. राजनीतिक दल  खाद विक्रेताओ का संघ

दबाव-समूहों और राजनीतिक दलों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।

(क) दबाव-समूह समाज के किसी खास तबके के हितों की संगठित अभिव्यक्ति होते हैं।
(ख) दबाव-समूह राजनीतिक मुद्दों पर कोई-न-कोई पक्ष लेते हैं।
(ग) सभी दबाव -समूह राजनीतिक दल होते हैं।

अब नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनें –


मेवात हरियाणा का सबसे पिछड़ा इलाका है। यह गुड़गाँव और फ़रीदाबाद जिले का हिस्सा हुआ करता था। मेवात के लोगों को लगा कि इस इलाके को अगर अलग ज़िला बना दिया जाय तो इस इलाके पर ज्यादा ध्यान जाएगा। लेकिन, राजनीतिक दल इस बात में कोई रुचि नहीं ले रहे थे। सन् 1996 में मेवात एजुकेशन एंड सोशल आर्गनाइजेशन तथा मेवात साक्षरता समिति ने अलग ज़िला बनाने की माँग उठाई। बाद में सन् 2000 में मेवात विकास सभा की स्थापना हुई। इसने एक के बाद एक कई जन-जागरण अभियान चलाए। इससे बाध्य होकर बड़े दलों यानी कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल को इस मुद्दे पर अपना समर्थन देना पड़ा। उन्होंने फ़रवरी 2005 में होने वाले विधान सभा के चुनाव से पहले ही कह दिया कि नया जिला बना दिया जाएगा। नया ज़िला सन् 2005 की जुलाई में बना।

इस उदाहरण में आपको आंदोलन, राजनीतिक दल और सरकार के बीच क्या रिश्ता नज़र आता है? क्या आप कोई ऐसा उदाहरण दे सकते हैं जो इससे अलग रिश्ता बताता हो?


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