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प्रश्न
धनुष टूटने से क्रोधित परशुराम ने राम से क्या कहा?
उत्तर
धनुष टूटने से क्रोधित परशुराम ने राम से कहा कि सेवक वह है जो सेवा का कार्य करे। शत्रुता का कार्य करके वैर ही मोल लिया जाता है। उन्होंने राम से यह भी कहा कि राम! जिसने भी शिव धनुष तोड़ा है वह सहस्रबाहु के समान मेरा दुश्मन है।
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बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही||
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सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा||
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साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है। इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
भाव स्पष्ट कीजिए -
गाधिसू नु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।
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कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।
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