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प्रश्न
दूसरे पद का सरल अर्थ लिखिए।
हरि बिन कूण गती मेरी ।।
तुम मेरे प्रतिपाल कहिये मैं रावरी चेरी ।।
आदि-अंत निज नाँव तेरो हीमायें फेरी ।
बेर-बेर पुकार कहूँ प्रभु आरति है तेरी ।।
यौ संसार बिकार सागर बीच में घेरी ।
नाव फाटी प्रभु पाल बाँधो बूड़त है बेरी ।।
बिरहणि पिवकी बाट जौवै राखल्यो नेरी ।
दासी मीरा राम रटत है मैं सरण हूँ तेरी ।।
उत्तर
हे हरि, आपके बिना मेरा कौन है? अर्थात आपके सिवा मेरा कोई ठिकाना नहीं है। आप ही मेरा पालन करने वाले हैं और मैं आपकी दासी है। मैं रात-दिन, हर समय आपका ही नाम जपती रहती हूँ। मैं बार-बार आपको पुकारती हूँ, क्योंकि मुझे आपके दर्शनों की तीव्र लालसा है।विकारों से भरे इस भवसागर में मेरी नाव के पाल फट गए है और अब इस नाव को डूबने में समय नहीं लगेगा।हे प्रभु मेरी नाव के पाल बाँध दो। यह तुम्हारी (अपने प्रिय की ) ही राह देख रही है। मुझे अपनी शरण में ले लो। यह दासी मीरा तुम्हारे ही नाम की रट लगाए हुए है, तुम्हारी शरण में है। इसे बचाकर इसकी लाज रख लो।
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संबंधित प्रश्न
संजाल पूर्ण कीजिए :
प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए :
इस अर्थ में आए शब्द लिखिए :
अर्थ | शब्द | |
(१) | दासी | ______ |
(२) | साजन | ______ |
(३) | बार-बार | ______ |
(४) | आकाश | ______ |
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरों न कोई जाके सिर मोर मुकट, मेरो पति सोई 'छाँड़ि दई कुल की कानि, कहा करिहै कोई? संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक लाज खोई। अँसुवन जल सींचि-सीचि प्रेम बेलि बोई। अब तो बेल फैल गई आँंद फल होई॥ दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से बिलोई। भगत देखि राजी हुई जगत देखि रोई दासी 'मीरा' लाल गिरिधर तारो अब मोहीं ॥ |
(1) पद्यांश के आधार पर संबंध जोड़कर उचित वाक्य तैयार कीजिए: (2)
(i) तकिया | गुल्लक |
(ii) बच्चों | शुन्य |
रूई |
- ____________
- ____________
(2) (i) निम्नलिखित के लिए पद्यांश से शब्द ढूँढ़कर लिखिए। (1)
- दही मथने का बरतन - ______
- साजन - ______
(ii) पद्यांश में आए 'ढिग' शब्द के अलग-अलग अर्थ लिखिए। (1)
- ____________
- ____________
(3) प्रथम दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
फागुन के दिन चार होरी खेल मना रे। बिन करताल पखावज बाजै, अणहद की झनकार रे। बिन सुर राग छतीसूँ गावै, रोम-रोम रणकार रे।। सील संतोख की केसर घोली, प्रेम-प्रीत पिचकार रे। उड़त गुलाल लाल भयो अंबर, बरसत रंग अपार रे।। घट के पट सब खोल दिए हैं, लोकलाज सब डार रे। 'मीरा' के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कँवल बलिहार रे।। |
(1) पद्यांश के आधार पर संबंध जोड़कर उचित वाक्य तैयार कीजिए- (2)
(i) सुमन | काँटे |
(ii) पँखुड़ी | गंध |
उपवन |
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- ____________
(2) (i) निम्नलिखित के लिए पद्यांश से शब्द ढूँढ़कर लिखिए- (1)
- पेड़-पौधों का समूह - ______
- नई कोमल पत्तियाँ - ______
(ii) पद्यांश में आए 'गंध' शब्द के अलग-अलग अर्थ लिखिए- (1)
- ____________
- ____________
(3) प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)