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प्रश्न
द्विदंतुर लिगन्ड से क्या तात्पर्य है?
उत्तर
एक द्विदंतुर लिगन्ड, जिसे उभयदंती संलग्नी के नाम से भी जाना जाता है। एक लिगन्ड है जो दो दाता परमाणुओं का उपयोग करके धातु आयन के साथ समन्वय बंधन बना सकता है। ये दाता परमाणु आमतौर पर लिगन्ड की संरचना में परमाणुओं की एक विशिष्ट संख्या से अलग होते हैं, जिससे एक कीलेट संकुल बनता है।
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संबंधित प्रश्न
दो उदाहरण देते हुए निम्नलिखित को समझाइए।
समन्वय समूह
0.1 mol CoCl3 (NH3)5 की AgNO3 के आधिक्य से अभिक्रिया कराने पर AgCl के 0.2 mol प्राप्त होते हैं। विलयन की चालकता ______ के समकक्ष होगी।
निम्नलिखित में से कौन-से संकुल होमोलेप्टिक हैं?
(i) [Co(NH3)6]3+
(ii) [Co(NH3)4Cl2]+
(iii) [Ni(CN)4]2–
(iv) [Ni(NH3)4Cl2]
एथेन-1, 2-डाइऐमीन के लिगंड की तरह व्यवहार के संबंध में सही कथन हैं-
(i) यह उदासीन लिगंड है।
(ii) यह द्विदंतुर लिगंड है।
(iii) यह कीलेटी लिगंड है।
(iv) यह एकदंतुर लिगंड है।
निम्नलिखित संकुलों को उनके विलयनों की बढ़ती हुई चालकता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए-
[Co(NH3)3Cl3], [Co(NH3)4Cl2]Cl, [Co(NH3)6]Cl3, [Cr(NH3)5Cl]Cl2
अभिकथन: आविषी धातु आयन कीलेटी लिगंडों द्वारा निष्काषित किए जाते हैं।
तर्क: कीलेट संकुलों की प्रवृत्ति अधिक स्थायी होने की होती है।
दो उदाहरण देते हुए निम्नलिखित को समझाइए।
उपसहसंयोजन बहुफलक
दो उदाहरण देते हुए निम्नलिखित को समझाइए।
उपसहसंयोजन संख्या
द्विदंतुर लिगन्ड का दो उदाहरण दीजिए।
उभयदंतुर लिगन्ड का दो उदाहरण दीजिए।