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प्रश्न
एक व्यावसायिक फ़र्म की द्रवता उसकी दीर्घकालिक दायित्वों के समय आने पर भुगतान हेतु उसकी क्षमता की संतुष्टि हेतु मापी जाती है। इस उद्देश्य के लिए किन अनुपातों का प्रयोग किया जाता है? टिप्पणी कीजिए।
उत्तर
वे व्यक्ति जो व्यवसाय में अग्रिम धन दीर्घकालिक आधार पर लगाते हैं उन्हें आवधिक ब्याज के भुगतान की सुरक्षा में रुचि के साथ-साथ, ऋण अवधि की समाप्ति पर मूलधन की राशि के पुनर्भुगतान की चिंता भी रहती है। ऋण शोधन क्षमता अनुपात का परिकलन व्यवसाय द्वारा दीर्घकाल में ऋण चुकाने की क्षमता को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। व्यवसाय की ऋण शोधन क्षमता के मूल्यांकन हेतु सामान्यतः निम्नलिखित अनुपातों को परिकलित किया जाता है-
-
ऋण समता अनुपात -
ऋण समता अनुपात दीर्घकालिक ऋण और समता के बीच संबंध को मापता है। यदि कुल दीर्घकालिक निधियों में ऋण संघटक लघु हैं तो बाहरी लोग अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से अधिक समता तथा कम ऋण का पूँजी ढाँचा अधिक अनुकूल माना जाता है क्योंकि यह दिवालियेपन के अवसर घटा देता है।
ऋण समता अनुपात = `"दीर्घकालिक ऋण"/"अंशधारक निधि"` -
ऋण पर नियोजित पूँजी अनुपात -
ऋण पर नियोजित पूँजी अनुपात दीर्घकालिक ऋण हेतु कुल बाहरी एवं आंतरिक निधियों (नियोजित पूँजी या निवल परिसंपत्तियों) के अनुपात को संदर्भित करता है। इसे निम्नवत् परिकलित करते हैं-
ऋण पर नियोजित पूँजी अनुपात = `"दीर्घकालिक ऋण"/ ("नियोजित पूँजी"("निवल परिसंपत्तियाँ"))` - स्वामित्व अनुपात -
स्वामित्व अनुपात स्वामी (अंशधारक) निधि और निवल परिसंपत्तियों के मध्य संबंधों को व्यक्त करता है और इसे निम्नवत् परिकलित् किया जाता है।
स्वामित्व अनुपात = `"अंशधारक निधि"/"नियोजित पूँजी (या निवल परिसंपत्तियाँ)"` - कुल परिसंपत्तियों पर ऋण अनुपात -
यह अनुपात परिसंपत्तियों के द्वारा दीर्घकालिक ऋण की संरक्षण की व्यापकता को मापता है। इसे इस तरह 'परिकलित किया जाता है।कुल परिसंपत्तियों पर ऋण अनुपात = `"कुल परिसंपत्तियाँ"/" दीर्घकालिक ऋण"`
यह अनुपात मुख्यतः परिसंपत्तियों के वित्त हेतु बाह्य निधियों की दर को संकेत करता है और परिसंपत्तियों द्वारा ऋण के संरक्षण को दर्शाता है। - ब्याज व्याप्ति अनुपात -
यह वह अनुपात है जो ऋणों पर ब्याज की उपयुक्तता को दर्शाता हैं। यह दीर्घकालिक ऋणों पर देय ब्याज की सुरक्षा का मापक है। यह ब्याज के भुगतान हेतु उपलब्ध लाभ और देय ब्याज की राशि के बीच संबंध को दर्शाता है। इसे निम्नवत् परिकलित किया जाता है-
ब्याज व्यष्ति अनुपात = `"ब्याज व कर देने से पूर्व निवल लाभ"/"दीर्घकालिक ऋणों पर ब्याज"`
यह अनुपात प्रकट करता है कि दीर्घकालिक ऋणों पर ब्याज के लिए लाभों में से उपलब्धता संभव हो सकती है।
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संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित तुलन-पत्र 31 मार्च 2017 पर राज ऑयल लिमिटेड का है।
विवरण | रु. |
I. समता तथा देयताएँ | |
(i) अंशधारक निधि | |
(क) अंश पूँजी | 7,90,000 |
(ख) आरक्षित एवं अधिशेष | 35,000 |
(ii) चालू दायित्व | |
(क) व्यापारिक देय | 72,000 |
योग | 8,97,000 |
II. परिसंपत्तियाँ | |
(i) गैर-चालू परिसंपत्तियाँ | |
(क) स्थाई परिसंपत्तियाँ | |
मूर्त परिसंपत्तियाँ | 7,53,000 |
(ii) चालू परिसंपत्तियाँ | |
(क) रहतिया | 55,800 |
(ख) व्यापारिक प्राप्य | 28,800 |
(ग) रोकड् एवं रोकड़ तुल्यांक | 59,400 |
योग | 8,97,000 |
चालू अनुपात ज्ञात कीजिए।
निम्नलिखित जानकारी से ऋण समता अनुपात परिकलित कीजिए-
कुल परिसंपत्तियाँ |
15,00,000 |
चालू दायित्व | 6,00,000 |
कुल ऋण | 12,00,000 |
निम्न जानकारी से कार्यशील पूँजी आवर्त अनुपात, ऋण समता अनुपात तथा स्वामित्व अनुपात परिकलित कीजिए-
प्रदत पूँजी |
5,00,000 |
चालू परिसंपत्तियाँ |
4,00,000 |
प्रचालन से निवल आगम |
10,00,000 |
13% ऋण पत्र |
2,00,000 |
चालू दायित्व |
2,80,000
|
आपने एक कंपनी की दो वर्ष की निम्न सूचनाएँ एकत्र की हैं-
2015-16 | 2016-17 | |
01 अप्रैल को व्यापारिक प्राप्य | 4,00,000 | 5,00,000 |
31 मार्च को व्यापारिक प्राप्य | 5,60,000 | |
31 मार्च को व्यापारिक रहतिया | 6,00,000 | 9,00,000 |
प्रचालन से आगम (25 % के सकल लाभ पर) | 3,00,000 | 24,00,000 |
रहतिया आवर्त अनुपात तथा व्यापारिक प्राप्य आवर्त अनुपात परिकलित कीजिए।
निम्न सूचना के आधार पर परिकलित करें-
(क) ऋण समता अनुपात
(ख) कुल परिसंपत्तियों का ऋण से अनुपात
(ग) स्वामित्व अनुपात
रू. | |
समता अंश पूँजी | 75,000 |
अपूर्ण आबंटन पर आवेदन राशि | 25,000 |
सामान्य आरक्षत | 45,000 |
लाभ-हानि विवरण का शेष | 30,000 |
ऋणपत्र | 75,000 |
व्यापारिक देय | 40,000 |
बकाया व्यय | 10,000 |