Advertisements
Advertisements
प्रश्न
गद्य खंड पर आधारित प्रश्न के उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:
गाँधी जी के बारे में लोग क्या कहते थे, गाँधी जी ने सदा क्या प्रयास किया? 'गिन्नी का सोना' पाठ के संदर्भ में लिखिए।
उत्तर
'गिन्नी का सोना' पाठ के संदर्भ में, महात्मा गांधी को लोग 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' के रूप में याद करते थे। उनकी इस पहचान के पीछे कारण था उनकी व्यावहारिकता और आदर्शों के प्रति अटूट समर्पण। गांधीजी ने हमेशा यह प्रयास किया कि आदर्शों को जीवन में उतारा जा सके, लेकिन एक व्यावहारिक ढंग से जो लोगों के लिए सुलभ और समझने योग्य हो। उन्होंने कभी भी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर नहीं उतारा; बल्कि, व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर उठाया।
गांधीजी ने ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाई, न कि सोने में ताँबा मिलाकर। यह दर्शाता है कि कैसे उन्होंने व्यावहारिकता के माध्यम से आदर्शों की गरिमा को बढ़ाया और उन्हें सामान्य जन के लिए अधिक स्वीकार्य बनाया। उनका जीवन यह सिखाता है कि कैसे आदर्शवाद और व्यावहारिकता मिलकर एक सामाजिक परिवर्तन की नींव रख सकते हैं।
गांधीजी का यह प्रयास समाज में एक उदाहरण बन गया कि कैसे आदर्शों को साकार किया जा सकता है, बिना उन्हें हवाई या अव्यावहारिक बनाए। उनका जीवन दर्शाता है कि कैसे व्यावहारिक सूझ-बूझ के साथ आदर्शों को ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
संबंधित प्रश्न
शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?
प्रेक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?
पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?
जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए−
शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए−
चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब−
(1) शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो।
(2) शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
'शुद्ध सोने में ताबे की मिलावट या ताँबें में सोना', गाँधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए−
'गिरगिट' कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश 'गिन्नी का सोना' का संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि 'आदर्शवादिता' और 'व्यवहारिकता' इनमें से जीवन में किसका महत्व है?
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
समाज के पास अगर शाश्वत मुल्यों जैसा कुछ है तो वह आर्दशवादी लोगों का ही दिया हुआ है।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
जब व्यवहारिकता का बखान होने लगता है तब 'प्रेक्टिकल आइडियालिस्टों' के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यवहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है?
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।
लेखक के मित्र के अनुसार जापानी किस रोग से पीड़ित हैं और क्यों?
‘जीना इसी का नाम है’ लेखक ने ऐसा किस स्थिति को कहा है?
भारत में भी लोगों की जिंदगी की गतिशीलता में खूब वृद्धि हुई है। इसके कारण और परिणाम का उल्लेख ‘झेन की देन’ पाठ के आधार पर कीजिए।
मृगाक्षी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में मैनेजर के पद पर आसीन है। श्रेष्ठ संचालन व बहुमुखी प्रतिभा की धनी होने के साथ ही बुद्धिमानी से तथ्यों को सुलझाने और सभी कार्यों को व्यवस्थित करने में उसका कोई सानी नहीं। वह रात-दिन काम में जुटी रहती है। कंपनी के स्तर को बढ़ाने के लिए सदैव प्रयासरत रहती है। कुछ दिनों से उसके सिर में दर्द रहने लगा है तथा नींद भी ठीक से नहीं आती है। ज़रा-ज़रा सी बात में चिड़चिड़ापन होता है तथा अक्सर उदासी उसे घेरे रहती है। |
इसका क्या कारण हो सकता है? 'पतझर में टूटी पत्तियाँ पाठ में 'झेन की देन' हमें जो सीख प्रदान करती है, क्या वह मृगाक्षी के लिए सही साबित हो सकती है? स्थिति का मूल्यांकन करते हुए अपने विचार लिखिए।
वर्तमान समाज में मौजूद शाश्वत मूल्य किसकी देन हैं?