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गहनता प्रत्यक्षण के एकनेत्री संकेत क्या हैं? - Psychology (मनोविज्ञान)

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प्रश्न

गहनता प्रत्यक्षण के एकनेत्री संकेत क्या हैं?

दीर्घउत्तर

उत्तर

गहनता प्रत्यक्षण के एकनेत्री संकेत (मनोवैज्ञानिक संकेत): गहनता प्रत्यक्षण के एकनेत्री संकेत ठस स्थिति में

एकनेत्री संकेत ऊपर दिया चित्र आपको कुछ एकनेत्री संकेतों जैसे आच्छादन और सापेक्ष आकार को समझने में मदद करेगा (वृक्षों को देखिए)।

प्रभावी होते है जब वस्तुओं को केवल एक आँख से देखा जाता है। ऐसे संकेतों का उपयोग कलाकार अपनी द्विविम पेंटिंग में गहराई प्रदर्शित करने के लिए करते हैं। इसलिए इन्हें चित्रीय संकेत भी कहा जाता है। कुछ महत्त्वपूर्ण एकनेत्री संकेत जो द्विविम सतहों में गहराई एवं दूरी का निर्णय लेने में हमारी सहायता करते हैं उनका वर्णन नीचे किया जा रहा है।

  1. सापेक्ष आकार :
    समान वस्तुओं के साथ वर्तमान एवं भूतकाल के अनुभव के आधार पर दूरी के निर्णय में दृष्टिपटलीय प्रतिमा का आकार सहायता करता है। जैसे ही वस्तु दूर जाती है, दृष्टिपटलीय प्रतिमा छोटी से छोटी होती है। जब कोई वस्तु छोटी दिखती है तो हम उसे दूर में स्थित तथा बड़ी दिखने पर निकट में स्थित के रूप में उसका प्रत्यक्षण करते हैं।
  2. आच्छादन अथवा अतिव्याप्ति :
    ये संकेत उस स्थिति में प्रयुक्त होते हैं जब एक वस्तु के कुछ भाग किसी दूसरी वस्तु से आच्छादित हो जाते हैं। जो वस्तु आच्छादित होती है वह दूर तथा ज जो वस्तु आच्छादन करती है वह निकट दिखाई देती है।
  3. रेखीय परिप्रेक्ष्य :
    इससे इस गोचर का ज्ञान होता है कि जो वस्तुएँ दूर होती हैं वे निकट की वस्तुओं की तुलना में एक-दूसरे के निकट दिखती हैं। उदाहरण के लिए, समानान्तर रेखाएं- जैसे- रेल की पटरियाँ, दूरी बढ़ने पर एक-दूसरे में मिलती हुई दिखती हैं तथा लगता है कि वे क्षितिज पर समाप्त हो गई। रेखाएँ जितनी एक-दूसरे में मिलती हैं वे उतनी ही दूर दिखती हैं।
  4. आकाशी परिप्रेक्ष्य :
    हवा में धूल एवं आर्द्रता के सूक्ष्म कण होते हैं जिनसे दूर की वस्तुएँ धुंधली या अस्पष्ट दिखती हैं। इस प्रभाव को आकाशी परिप्रेक्ष्य कहते हैं। उदाहरण के लिए, के पहाड़ वातावरण में विकीर्ण नीले प्रकाश के कारण नीले दिखाई देते हैं, जबकि यही पहाड़ दिखाई देते हैं, जब वातावरण स्वच्छ होता है।
  5. प्रकाश एवं छाया :
    प्रकाश में वस्तु के कुछ भाग अधिक प्रकाशित होते हैं, जबकि कुछ भाग मई में पड़ जाते हैं। वस्तु की दूरी के संबंध में प्रकाशित भाग एवं छाया हमें सूचनाएँ प्रदान करती हैं।
  6. सापेक्ष ऊँचाई :
    लंबी वस्तुएँ प्रत्यक्षण करने पर प्रेक्षक के निकट दिखती हैं तथा छोटी वस्तुएँबहुत दूर दिखाई देती हैं। जब हम दो वस्तुओं को एकसमान आकार के होने की प्रत्याशा करते
    हैं और वे समान नहीं होती हैं, तो उसमें जो बड़ी होती है वह निकट की तथा जो छोटी होती है वह दूर की दिखाई देती है।
  7. रचनागुण प्रवणता :
    यह एक ऐसा गोचर है जिसके द्वारा हमारे चाक्षुष क्षेत्र, जिनमें तत्वों की सघनता अधिक होती है, दूरदिखाई देते हैं। नीचे दिए गए चित्र में जैसे-जैसे हम दूर देखते जाते हैं पत्थरों की सघनता बढ़ती जाती है।
  8. गतिविगतराभास :
    यह एक गतिक एकनेत्री संकेत होता है,इसलिए यह चित्रीय संकेत नहीं समझा जाता है। यह तब घटित होता है जब विभिन दूरी की वस्तुएँ एक भिन्न सापेक्ष गति सेगतिमान होती हैं। निकट की वस्तुओं की तुलना में दूरस्थ वस्तुएँ धीरे-धीरे गति करता हुई प्रतीत होती हैं। वस्तुओं की गति की दर उसकी दूरी का एक संकेत प्रदान करती है। उदाहरण के लिए जब हम एक बस में यात्रा करते हैं तो निकट की वस्तुएं बस की दिशा के विपरीत गतिमान होती हैं, जबकि दूर की वस्तुएँ बस की दिशा के साथ गतिमान होती हैं।
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स्थान, गहनता तथा दूरी प्रत्यक्षण
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पाठ 5: संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ - समीक्षात्मक प्रश्न [पृष्ठ ११०]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Psychology [Hindi] Class 11
पाठ 5 संवेदी, अवधानिक एवं प्रात्यक्षिक प्रक्रियाएँ
समीक्षात्मक प्रश्न | Q 9. (a) | पृष्ठ ११०
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