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प्रश्न
गिरमिटियों की भावना तथा कवि की संवेदना को समझतेहुए कविता का रसास्वादन कीजिए।
उत्तर
उन्नीसवीं सदी में ब्रिटिश सरकार ने लाखों भारतीय स्त्री- पुरुषों को जबरदस्ती स्वजनों से दूर अपने उपनिवेशों फीजी, सूरीनाम, पाक, गयाना, दक्षिण अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम, यू एस ए, कनाडा, फ्रांस, रेनियन आदि देशों में भेजा। जहाँ उन्हें गुलाम बनाकर बड़ी अमानवीय परिस्थितियों में रखा जाता था। हर प्रकार से उनका शोषण किया जाता था। अनुबंध समाप्त होने के बाद भी पास में पैसा न होने के कारण वे कभी स्वदेश नहीं लौट पाए। परंतु उन्होंने अपनी भारतीय संस्कृति को नहीं छोड़ा। भारतीय तीज-त्योहार, यहाँ के रीति-रिवाज, यहाँ के लोकगीत, लोकनृत्य सभी उन गिरमिटियों के जीवन सदैव हिस्सा रहे। प्रस्तुत कविता में कवि दानीश्वर जी भारतीयों को अपनी विगत दुखद स्मृति में भुलाकर मॉरिशस आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अब मॉरिशस माँ के घर के समान है, जहाँ अपने प्रियजनों से उनका मिलन होगा। मॉरिशस अब एक लघु भारत के समान है। कवि इस भारत में सभी का स्वागत कर रहा है। कवि ने प्रवासी भारतीयों के जीवन में आए सकारात्मक पहलुओं को तो उजागर किया ही है, साथ-साथ उनके मन में स्थित भारतीयों की संवेदनाओं तथा उनकी सृजनात्मक प्रतिभा के दर्शन भी कराए हैं।
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