मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएचएससी वाणिज्य (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १२ वी

‘गुरुनिष्ठा और भक्तिभाव से ही मानव श्रेष्ठ बनता है’ इस कथन के आधार पर कविता का रसास्वादन कीजिए । - Hindi

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

‘गुरुनिष्ठा और भक्तिभाव से ही मानव श्रेष्ठ बनता है’ इस कथन के आधार पर कविता का रसास्वादन कीजिए ।

टीपा लिहा

उत्तर

 गुरु नानक का कहना है कि बिना गुरु के मनुष्य को ज्ञान नहीं मिलता। मनुष्य के अंतःकरण में अनेक प्रकार के मनोविकार होते हैं, जिनके वशीभूत होने के कारण उसे वास्तविकता के दर्शन नहीं होते। वह अहंकार में डूबा रहता है और उसमें गलत-सही का विवेक नहीं रह जाता। ये मनोविकार दूर होता है गुरु से ज्ञान प्राप्त होने पर। यदि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा और उनमें पूरा विश्वास हो तो मनुष्य के अंतःकरण के इन विकारों को दूर होने में समय नहीं लगता। मन के विकार दूर हो जाने पर मनुष्य में सबको समान दृष्टि से देखने की भावना उत्पन्न हो जाती है। उसके लिए कोई बड़ा या छोटा अथवा ऊँच-नीच नहीं रह जाता। उसे मनुष्य में ईश्वर के दर्शन होने लगते हैं। उसके लिए ईश्वर की भक्ति भी सुगम हो जाती है। गुरु नानक ने अपने पदों में इस बात को सरल ढंग से कहा है।
इस तरह गुरु के प्रति सच्ची निष्ठा और भक्ति-भावना से मनुष्य श्रेष्ठ मानव बन जाता है।

shaalaa.com
गुरुबानी
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 5.1: गुरुबानी - रसास्वादन [पृष्ठ २५]

APPEARS IN

बालभारती Hindi - Yuvakbharati 12 Standard HSC Maharashtra State Board
पाठ 5.1 गुरुबानी
रसास्वादन | Q 1 | पृष्ठ २५

संबंधित प्रश्‍न

संजाल पूर्ण कीजिए :


कृति पूर्ण कीजिए :-


'गुरु बिन ज्ञान न होई' उक्ति पर अपने विचार लिखिए ।


'ईश्वर भक्ति में नामस्मरण का महत्व होता है', इस विषय पर अपना मंतव्य लिखिए।


गुरु नानक जी की रचनाओं के नाम लिखिए।


गुरु नानक जी की भाषाशैली की विशेषताएँ :


निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

तेरी गति मिति तूहै जाणहि किआ को आखि वखाणै
तू आपे गुपता, आपे परगटु, आपे सभि रंग माणै
साधिक सिध, गुरू बहु चेले खोजत फिरहि फुरमाणै
मागहि नामु पाइ इह भिखिआ तेरे दरसन कउ कुरबाणै
अबिनासी प्रभि खेलु रचाइआ, गुरमुखि सोझी होई।
नानक सभि जुग आपे वरतै, दूजा अवरु न कोई ।।

गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने।
तारिका मंडल जनक मोती।
धूपु मलआनलो, पवणु चवरो करे,
सगल बनराइ फूलंत जोती।
कैसी आरती होई।। भव खंडना, तेरी आरती।
अनहता सबद वाजंत भेरी ।।

(१) कृति पूर्ण कीजिए: (२)

(२) उचित मिलान कीजिए: (२)

(१) ईश्वर काल
(२) आकाश प्रभु
(३) समय खोजता
(४) खोज गगन

(३) ‘विद्यार्थी जीवन में गुरु का महत्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतिया कीजिए:

नानक गुरु न चेतनी मनि आपणे सुचेत। 
छूते तिल बुआड़ जिक सुएं अंदर खेत ॥ 
खेते अंदर छुट्टयां कहु नानक सऊ नाह।
'फली अहि फूली अहि बपुड़े भी तन बिच स्वाहं॥१॥
जलि मोह घसि मसि करि,
मति कागद करि सारु,
भाइ कलम करिं चितु, लेखारि,
गुरु पुछि लिखु बीचारि,
लिखु नाम सालाह लिखु,

1. संजाल पूर्ण कीजिए।  (2)

2. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए:   (2)

  1. मति 
  2. सुचेत
  3. लेखारि
  4. सऊ

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए:  (2)

'गुरु बिन ज्ञान न होइ' इस उक्ति पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'गुरुबानी' कविता का रसास्वादन कीजिए:

  1. रचनाकर का नाम (१) -
  2. पसंद की पंक्तियाँ (१) -
  3. पसंद आने के कारण (२) -
  4. कविता की केंद्रीय कल्पना (२) -

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए: 

जालि मोहु घसि मसि करि,
मति कागद करि सारु,
भाइ कलम करि चितु लेखारी
गुर पुछि लिखु बीचारि,
लिखु नामु सालाह लिखु,
लिखु अंतु न पारावार।।

मन रे अहिनिसि हरि गुण सारि।
जिन खिनु पलु नाम न बिसरे ते जन विरले संसारि।
जोती-जोति मिलाइये, सुरती सुरति संजोगु।
हिंसा हउमें गतु गए नाही सहसा सोगु।
गुरुमुख जिसु हरि मनि बसे तिसु मेले गुरु संजोग।।

  1. (१) सहसंबंध लिखिए:        [2]
    (१) मोह को जलाकर और घिसकर बनाइए विरले
    (२) श्रेष्ठ कागज बनाना है, इससे प्रभु के दर्शन
    (३) संसार में हरि का नाम न भूलने वाले स्याही
    (४) जिसने प्रभु के नाम की माला जपी उसे मति
  2. निम्नलिखित शब्दों के उपसिर्ग हटाकर पद्यांश में आए हुए मूलशब्द दूँढकर लिखिए:      [2]
    1. सुमति - ______
    2. सदगुण - ______
    3. निर्जन -  ______
    4. अहिंसा - ______
  3. "गुरु का महत्त्व" इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।       [2]

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×