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हैलोजेन रंगीन क्यों होते हैं? - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

हैलोजेन रंगीन क्यों होते हैं?

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

सभी हैलोजेन रंगीन होते हैं। इसका कारण यह है कि इनके अणु दृश्य क्षेत्र में प्रकाश अवशोषित कर लेते हैं जिसके फलस्वरूप इनके इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तरों में चले जाते हैं, जबकि शेष प्रकाश उत्सर्जित हो जाता है। हैलोजेनों का रंग वास्तव में इस उत्सर्जित प्रकाश का रंग होता है। उत्तेजन के लिए आवश्यक ऊर्जा की मात्रा परमाणु आकार के अनुसार F से I तक लगातार घटती है, अतः उत्सर्जित प्रकाश की ऊर्जा F से I तक बढ़ती है। दूसरे शब्दों में, हैलोजेन का रंग F2 से I2 तक गहरा होता जाता है।

उदाहरणार्थ – F2 बैंगनी प्रकाश अवशोषित करके हल्का पीला दिखाई देता है, जबकि आयोडीन पीला तथा हरा प्रकाश अवशोषित करके गहरा बैंगनी रंग का प्रतीत होता है। इसी प्रकार हम Cl2 के हरे-पीले तथा ब्रोमीन के नारंगी-लाल रंग की व्याख्या कर सकते हैं।

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हैलोजनों के ऑक्सोअम्ल
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पाठ 7: p-ब्लॉक के तत्व - अभ्यास [पृष्ठ २२२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Chemistry [Hindi] Class 12
पाठ 7 p-ब्लॉक के तत्व
अभ्यास | Q 7.27 | पृष्ठ २२२
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