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प्रश्न
‘होरी के जीवन में ‘परिवार और गाय’ दो ही शीर्षस्थ थे,’ सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
“होरी के जीवन में 'परिवार और गाय' दो ही शीर्षस्थ थे।” इस बात में निश्चित रूप से किसी प्रकार की शंका के लिए कोई स्थान नहीं है। होरी के मन में प्रबल लालसा थी कि उसके दरवाजे पर एक गाय हो। पर उसकी यह लालसा कभी पूरी नहीं हुई। होरी की बेटी रूपा ने अपनी ससुराल से एक गाय भेज दी। निश्चित रूप से होरी एक स्वाभिमानी व्यक्ति था। बेटी के यहाँ से गाय आने पर उसके मन में उतनी प्रसन्नता नहीं हुई होगी, जितनी प्रसन्नता उसे अपनी गाय खरीदने से होती। रामसेवक की गाय का पैसा चुकाने के लिए होरी चिलचिलाती धूप में अथक परिश्रम करता है और लू लगने के कारण उसकी मृत्यु भी हो जाती है। वह अपने परिवार का भी बहुत ध्यान देता था। जब होरी के छोटे भाई हीरा ने जहर देकर उसकी गाय की हत्या कर घर छोड़कर भाग गया, तो होरी ने ही उसके परिवार की देख-रेख की। इसलिए यह कहना बिलकुल सही है कि होरी के जीवन में 'परिवार और गाय' दो ही शीर्षस्थ थे।
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संजाल पूर्ण कीजिए:
होरी की आँखों में वह हीरा था जो ______
होरी अँधेरे मुँह उठा तो देखता है कि ______
परिच्छेद में आए हुए शरीर के किसी एक अंग पर प्रयुक्त मुहावरा लिखिए।
‘हीरा तो जैसे संसार ही से चला गया।’ ‘मेरा मन तो कहता है कि वह आवेगा, कभी-न-कभी जरूर।’ दोनों सोए। होरी अँधेरे मुँह उठा तो देखता है कि हीरा सामने खड़ा है, बाल बढ़े हुए, कपड़े तार-तार, मुहँ सूखा हुआ, देह में रक्त और मांस का नाम नहीं, जैसे कद भी छोटा हो गया है। दौड़कर होरी के कदमों में गिरा पड़ा। होरी ने उसे छाती से लगाकर कहा- ‘‘तुम तो बिलकुल घुल गए हीरा! कब आए? आज तुम्हारी बार-बार याद आ रही थी। बीमार हो क्या?’’ आज उसकी आँखों में वह हीरा न था, जिसने उसकी जिंदगी तल्ख कर दी थी; बल्कि वह हीरा था, जो मॉं-बाप का छोटा-सा बालक था। बीच के ये पचीस-तीस साल जैसे मिट गए, उनका कोई चिह्न भी नहीं था। हीरा ने कुछ जवाब न दिया। खड़ा रो रहा था। होरी ने उसका हाथ पकड़कर गद्गद कंठ से कहा- ‘‘क्यों रोते हो भैया, आदमी से भूलचूक होती ही है। कहॉं रहा इतने दिन?’’ |
‘आदमी से भूलचूक होती ही है’, इसपर अपने विचार लिखिए।
सूचनानुसार कृतियाँ कीजिए:-
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देहदान की संकल्पना स्पष्ट करते हुए उसका महत्व बताइए।