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प्रश्न
इस कहानी से आपको किस जीवन-मूल्य का बोध होता है?
उत्तर
इस कहानी के माध्यम से हमें अपनी आज़ादी का पता चलता है। हमें किसी प्रकार के लालच में फँसकर अपनी आज़ादी नहीं खोना चाहिए। आजकल लोग सुविधा संपन्न जीवन जीते हुए भी छोटे-छोटे पशुओं व सुंदर पक्षियों को पालतू बनाकर अपने घर की शोभा बढ़ाना चाहते हैं। वे भूल जाते हैं कि धरती का कोई भी प्राणी परतंत्रता में जीना पसंद नहीं करता। प्रत्येक प्राणी अपनी स्वाभाविक प्रवृत्तियों के अनुसार जीवन जीने में खुश होता है। धन दौलत कभी वास्तविक खुशी नहीं दे सकता। माँ के स्नेह एवं आत्मीयता को किसी वस्तु से तौला नहीं जा सकता। हमें हर कीमत पर अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करनी चाहिए।
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(ख) दुर्योधन ने कहा- "अगर बराबरी की बात है, तो मैं आज ही कर्ण को अंगदेश का राजा बनाता हूँ।"
(ग) धृतराष्ट्र ने दुर्योधन से कहा-"बेटा, मैं तूम्हारी भलाई के लिए कहता हूँ कि पाँडवों से वैर न करो। वैर दुख और मृत्यु का कारण होता है।"
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विस्मयाभिभूत शब्द विस्मय और अभिभूत दो शब्दों के योग से बना है। इसमें विस्मय के य के साथ अभिभूत के अ के मिलने से या हो गया है। अ आदि वर्ण है। ये सभी वर्ण ध्वनियों में व्याप्त हैं। व्यंजन वर्गों में इसके योग को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जैसे क + अ = क इत्यादि। अ की मात्रा के चिह्न (ा) से आप परिचित हैं। अ की भाँति किसी शब्द में आ के भी जुड़ने से अकार की मात्रा ही लगती है, जैसे-मंडल + आकार = मंडलाकार। मंडल और आकार की संधि करने पर (जोड़ने पर) मंडलाकार शब्द बनता है और मंडलाकार शब्द का विग्रह करने पर (तोड़ने पर) मंडल और आकार दोनों अलग होते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के संधि-विग्रह कीजिए
संधिविग्रह
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