Advertisements
Advertisements
प्रश्न
जितना उपलब्ध है, उससे कहीं ज़्यादा खर्च करने से पानी का संकट उत्पन्न होता है। क्या यही बात हम बिजली के संकट के बारे में भी कह सकते हैं?
उत्तर
हाँ, यही बात हम बिजली के संकट के बारे में भी कह सकते हैं। हमें बिजली को सावधानीपूर्वक खर्च करना चाहिए। यदि खर्च उपलब्धता से अधिक होगा तो जाहिर है संकट पैदा होगा ही।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
अपने आस-पास के बड़ों से पूछकर पता लगाओ-
तुम्हारे घर में पानी कहाँ से आता है?
अपने आस-पास के बड़ों से पूछकर पता लगाओ-
तुम्हारे घर का मैला पानी बहकर कहाँ जाता है?
अपने आस-पास के बड़ों से पूछकर पता लगाओ-
आज से पंद्रह वर्ष पहले यह पानी कितने नीचे था?
पाठ के आधार पर बताओ-
अपने घर के नल के पाइप में मोटर लगवाना दूसरों का हक छीनने के बराबर है। लेखक ऐसा क्यों मानते हैं?
पाठ के आधार पर बताओ-
धरती की गुल्लक किन-किन साधनों से भरती है?
क्या तुम्हारे इलाके में कभी बाढ़ आई है? यदि हाँ, तो उसके बारे में लिखो।
क्या तुम्हारे घर में पानी कुछ ही घंटों के लिए आता है? यदि हाँ, तो बताओ कि कैसे तुम्हारे परिवार की दिनचर्या नल में पानी आने के साथ बँधी होती है?
क्या तुम्हारे मोहल्ले में रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करने के लिए लोगों को पानी खरीदना पड़ता है? यदि हाँ, तो बताओ कि तुम्हारे घर में रोज़ औसतन कितने लीटर पानी खरीदा जाता है? इस पर कितना खर्चा होता है?
पाठ में पानी के संकट के किस प्रमुख कारण की बात की गई है?
पानी के संकट का एक और मुख्य कारण पानी की फ़िज़ूलखर्ची भी है। कक्षा में पाँच-पाँच के समूह में बातचीत करो और बताओ कि अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में पानी की बचत करने के लिए तुम क्या-क्या उपाय कर सकते हो?
पानी की समस्या या बचत से संबंधित पोस्टर और नारे तैयार करो। यह काम तुम चार-चार के समूह में कर सकते हो।
“पानी की बर्बादी, सबकी बर्बादी” इस नारे में ‘बर्बादी’ शब्द का एक अर्थ है या दो अलग अर्थ हैं? सोचो।
पानी हमारी जिंदगी में महत्वपूर्ण तो है ही, मुहावरों की दुनिया में भी उसकी खास जगह है। पानी से संबंधित कुछ मुहावरे इकट्ठे करो और उनका उचित संदर्भ में प्रयोग करो।