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प्रश्न
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए:
तुलसी के अनुसार पेट की आग कैसी है और इसे किस प्रकार बुझाया जा सकता है?
लघु उत्तर
उत्तर
तुलसीदास ने 'कवितावली' के एक पद में यह स्वीकार किया है कि 'पेट की आग' को केवल रामभक्ति रूपी मेघ ही बुझा सकते हैं। कवि के अनुसार, कर्म-फल पूरी तरह से ईश्वर के अधीन है, और ईश्वर को 'पेट की आग' का शमन के लिए ईश्वर की कृपा और भक्ति आवश्यक मानना आस्था का विषय है।
बिना कर्म किए फल प्राप्त नहीं हो सकता। ईश्वर को पेट की आग बुझाने वाला मानना न तो तुलसीदास के समय का युग सत्य था, न ही आज के युग का। जो व्यक्ति परिश्रम करता है, वही आगे बढ़ता है। आज के आर्थिक युग में ईश्वर की कृपा से अधिक श्रम की महत्ता है। जो व्यक्ति केवल ईश्वर के भरोसे रह जाता है, वह जीवन में पीछे छूट जाता है।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?