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कहानी लेखन- एक आदमी ---- भगवान ---- वरदान दिया ---- जन्म लिया। छोटा ---- हवा का झोंका ---- रात ---- तारे अच्छे लगते ---- बातें ---- दोनों की दोस्ती ---- फलदाब पेड़ ---- फल ---- तारे को भेजा, -

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प्रश्न

कहानी लेखन-

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 70 से 80 शब्दों में कहानी लिखकर उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख लिखिए-

एक आदमी ---- भगवान ---- वरदान दिया ---- जन्म लिया। छोटा ---- हवा का झोंका ---- रात ---- तारे अच्छे लगते ---- बातें ---- दोनों की दोस्ती ---- फलदाब पेड़ ---- फल ---- तारे को भेजा, ---- प्रसल हुआ ---- खुश रहने लगे ---- मित्रता इसी प्रकार निभानी चाहिए।

दीर्घउत्तर

उत्तर

सच्ची मित्रता

बहोत पुरानी कहानी है। चिनपुर गाँव में एक आदमी रहता था। वो हर पल उदास रहता था। घर में उसकी पत्नी के ताने सुन सुनके वो निराश होता और वो घर से बाहर निकल कर वो एक पेड़ के निचे बैठे रहता। जब तक उसका गुस्सा शांत तब तक वो वही बैठे रहता। एक दिन ही वो घर में झगड़ा करके उसी पेड़ के नीचे आया और वही लेट गया। लेट के वो उस पेड़ को देख रहा था। वो पेड़ बोहोत ही मजबूत था, उस पर बोहोत सारे फल थे। वो पेड़ लोगों को घनी छाया देता था। उस आदमी के मन में विचार आया की में भी अगर पेड़ होता तो में भी सबको छांव देता। रसभरे फल देता। फिर उसने ठान ली की मुझे पेड़ बनना है। फिर वो आदमी पेड़ बनने हेतु घोर तपस्या की। पुरे दो साल होने के बाद भगवान उस पर प्रसन्न हो गए। फिर भगवान ने उससे वरदान दिया।

कुछ समय बाद उसने एक छोटे पौधे में जन्म लिया। छोटे सा पौधा, जब भी हवा का झोंका आता तो वो सकपका जाता, परन्तु वह हार नहीं मानता। जब भी रात होते ही वह बहुत प्रसन्न जाता, क्योंकि रात के तारे उसे बहुत अचे लगते है। वह इन तारों से ढ़ेर सारी बातें कहता, तारे भी उससे बातें करते थे। इसी तरह उनकी दोस्ती बोहोत गहरी होती गयी। जैसे जैसे समय बितता गया वह पौधा अब बहुत बड़ा फलदायक पेड़ बन गया। उसने अपना फल सबसे पहले अपने मित्र तारे को भेजा। तारा फल खाकर बेहद खुश हुआ। दोनों भी साथ साथ बेहद खुश रहने लगे।

सीख - सच्ची मित्रता को हर हाल में निभाना चाहिए।

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