मराठी

कहानी लिखिए- 'एक गाँव ---- कुदिया बनाकर ---- वह जब भी नाचता ---- गाँव के लोगों को ---- तो वे नदी किनारे ---- जब वे नाचने लगते ----। कुछ दिन बाद ---- किसी साधु के नाचने ----। -

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प्रश्न

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर लगभग 70 से 80 शब्दों में कहानी लिखिए-

'एक गाँव ---- कुदिया बनाकर ---- वह जब भी नाचता ---- गाँव के लोगों को ---- तो वे नदी किनारे ---- जब वे नाचने लगते ----। 
कुछ दिन बाद ---- किसी साधु के नाचने ----। शहरी पढ़ाई-लिखाई ---- चुनौती दे दी ----। यदि-हमारे ---- तो साधु के नाचने ----। वह तुम ---- रहा है। फिर क्या था ---- लड़कों ने ----।

दीर्घउत्तर

उत्तर

साधु का चमत्कार

एक गाँव में एक साधु रहता था। साधुने गाँव के नजदीक एक नदी किनारे कुटिया बनाकर वह रहता था। वहाँ पे रहने वालों की ये मानता है की जब भी साधु नाचने लगता तभी बारिश होने लगती है। एक साल गाँव में बिलकुल बारिश नहीं हुई थी। बारिश न होने के कारन फसल नहीं हो पायी। यही समस्या लेकर सारे गाँव वाले साधु के पास चले गए और समस्या का हल पूछा। तो साधु ने ऊपर आसमान में देखा और वो अचानक नाचने लग गए। वो तब तक नाचते रहे जब तक बारिश नहीं होती। लोगों ने ये चमत्कार देख कर दंग रह गए। अतः गाँव के लोगों को जब भी बारिश की जरूरत होती थी, तो वे नदी किनारे साधु की कुटिया में जाते और उनसे अनुरोध करते की वे नाचें और जब वे नाचने लगते तो बारिश जरूर होती। 

कुछ दिनों बाद पाँच लड़के गाओं में घूमने आये थे। वे एक लड़के के रिश्तेदार के घर पर रहने लगे। उन लड़कों को यह बात मालूम हुई की किसी साधु के नाचने से बारिश होती है तो उन्हें यकीन न हुआ। शहरी होने घमंड में उन्होंने गाँव वालों को चुनौती दे दी कि हम भी नाचेंगे और बारिश होगी। यदि हमारे नाचने से बारिश नहीं हुई तो साधु के नाचने से भी नहीं होगी। वह तुम अज्ञानी लोगों को मुर्ख बना रहा है। अभी अगले दिन सुबह -सुबह ही गाँव वाले नदी किनारे साधु की कुटिया पर पहुँच गए।

साधु को सारी बात बताई गयी। फिर लड़कों ने एक-एक कर नाचना शुरू किया। वे आधे घण्टें में ही थककरें बैठ गये। उसके बाद साधु ने नाचना शुरू किया। एक घंटा, दो घण्टा बीत गए पर बारिश नहीं हुई, शाम हो गई औरें रातें भी गहराने लगी। अचानक बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगी, बिजली चमकी और बारिश होने लगी। तब लड़के भी इस चमत्कार को देख क्र हैरान हो गए। तब लड़कों को अपनीं गलती का एहसास हुआ और वह साधु के समक्ष नतमस्तक होकर पूछने लगे कि बाबा, “ऐसा क्यों हुआ कि हमारें नाचनें से बारिश नहीं हुई और आपके नाचने से बारिश हो गई।" तब साधु ने उन्हें ज्ञान दिया कि जब मैं नाचता हूँ तो यही सोचता हूँ कि बारिश होगी और मैं तब तक नाचता रहूँगा जब तक बारिश न हो जाए। उन चारों लड़कों को अपनी गलती अहेसास हुआ और उनको बहोत बड़ा सबक मिला। 

सीख - सफलता चाहते हो तो उस चीज को तब तक करते रहो जब तक कि उसमें सफल न हो जाओ।

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कहानी लेखन
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