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प्रश्न
किन पुरानी कहानियों से हमें मेसोपोटामिया की सभ्यता की झलक मिलती है?
उत्तर
हमें मेसोपोटामिया की सभ्यता की झलक बाइबल के प्रथम भाग ‘ओल्ड टेस्टामेंट’ के कई संदर्भो में देखने को मिलती है। उदाहरण के लिए, ‘ओल्ड टेस्टामेंट’ की ‘बुक ऑफ जेनेसिस’ (Book of Genesis) में ‘शिमार’ (Shimar) का उल्लेख है जिसका तात्पर्य सुमेर ईंटों से बने शहर की भूमि से है। यूरोपवासी इस भूमि को अपने पूर्वजों की भूमि मानते हैं और जब इस क्षेत्र में पुरातत्त्वीय खोज की शुरुआत हुई तो ओल्ड टेस्टामेंट को अक्षरशः सिद्ध करने का प्रयास किया गया।
सन् 1873 में ब्रिटिश समाचार-पत्र ने ब्रिटिश म्यूजियम द्वारा प्रारंभ किए गए खोज अभियान का खर्च उठाया जिसके अंतर्गत मेसोपोटामिया में एक ऐसी पट्टिका (Tablet) की खोज की जानी थी जिस पर बाइबल में उल्लिखित जलप्लावन (Flood) की कहानी अंकित थी।
बाइबल के अनुसार, यह जलप्लावन पृथ्वी पर संपूर्ण जीवन को नष्ट करने वाला था। किंतु परमेश्वर ने जलप्लावन के बाद भी जीवन को पृथ्वी पर सुरक्षित रखने के लिए नोआ (Naoh) नाम के एक मनुष्य को चुना। नोआ ने एक बहुत विशाल नाव बनाई और उसमें सभी जीव-जंतुओं का एक-एक जोड़ा रख लिया और जब जलप्लावन हुआ तो बाकी सब कुछ नष्ट हो गया, पर नाव में रखे सभी जोड़े सुरक्षित बच गए। ऐसी ही एक कहानी मेसोपोटामिया के परंपरागत साहित्य में भी मिलती है। इस कहानी के मुख्य पात्र को ‘जिउसुद्र’ (Ziusudra) या ‘उतनापिष्टिम’ (Utnapishtim) कहा जाता था।
1960 के दशक में ओल्ड टेस्टामेंट की कहानियाँ अक्षरशः सही नहीं पाई गईं, लेकिन ये इतिहास में हुए महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों के अतीत को अपने ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। धीरे-धीरे पुरातात्त्विक तकनीकें अधिकाधिक उन्नत और परिष्कृत होती गईं। यहाँ तक कि आम लोगों के जीवन की भी परिकल्पना की जाने लगी। बाइबल कहानियों की अक्षरशः सच्चाई को प्रमाणित करने का कार्य गौण हो गया। ऐसी ही जलप्लावन की घटना का उल्लेख छायावादी कवि ‘जयशंकर प्रसाद जी ने अपने महाकाव्य ‘कामायनी’ में वर्णित किया है। इस जलप्लावन में शेष जीवित प्राणियों में मनु-श्रद्धा व इड़ा को दिखाया गया है। उनके द्वारा सृष्टि की रचना का काम पुनः शुरू हो गया था।