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किसी अभिक्रिया उत्पादA⟶उत्पाद के लिए k = 2.0 × 10−2 s−1 है। यदि A की प्रारंभिक सांद्रता 1.0 mol L−1 हो तो 100 s पश्चात् इसकी सांद्रता क्या रह जाएगी? - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

किसी अभिक्रिया \[\ce{A -> {उत्पाद}}\] के लिए k = 2.0 × 10−2 s1 है। यदि A की प्रारंभिक सांद्रता 1.0 mol L−1 हो तो 100 s पश्चात् इसकी सांद्रता क्या रह जाएगी?

संख्यात्मक

उत्तर

k = 2.0 × 10−2 s1, T1 = 0, [A]1 = 1.0 M,

T2 = 100 s, [A]2 = ?

k = `1/("T"_2 - "T"_1) ln  (["A"]_1)/(["A"]_2)`

2.0 × 10−2 = `1/(100 - 0) ln  1.0/(["A"]_2)`

(2.0 × 10−2) × 100 = `ln  1.0/(["A"]_2)`

2 = `ln  1/(["A"]_2)`

7.389 = `1/(["A"]_2)`

∴ [A]2 = `1/7.389`

= 0.135 mol L1

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अभिक्रिया वेग की ताप पर निर्भरता
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 4: रासायनिक बलगतिकी - अभ्यास [पृष्ठ १२२]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Chemistry [Hindi] Class 12
पाठ 4 रासायनिक बलगतिकी
अभ्यास | Q 4.24 | पृष्ठ १२२

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ताप का वेग स्थिरांक पर क्या प्रभाव होगा?


हाइड्रोकार्बन का विघटन निम्न समीकरण के अनुसार होता है। Ea की गणना कीजिए।
k = `(4.5 xx 10^11  "s"^-1) "e"^(-28000 "K"//"T")`


उत्प्रेरक की उपस्थिति में, अभिक्रिया के दौरान ऊष्मा का अवशोषण अथवा उत्सर्जन ______।


निम्नलिखित में से कौन-सा ग्राफ ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया को प्रदर्शित करता है-

(क)

(ख) 

(ग) 


यौगिक 'A' और 'B' निम्नलिखित रासायनिक समीकरण के अनुसार अभिक्रिया करते हैं।

\[\ce{A(g) + 2B(g) -> 2C(g)}\]

किसी एक अभिक्रियक की सांद्रता स्थिर रखते हुए 'A' अथवा 'B' की सांद्रता में परिवर्तन किया गया और वेग को प्रारंभिक संद्रता के कारक के रूप में मापा गया। निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुए। इस अभिक्रिया के वेग समीकरण के लिए सही विकल्प चुनिए।

प्रयोग [A] की प्रारंभिक
सांद्रता/mol L-1
[B] की प्रारंभिक
सांद्रता/mol L-1
[C] के बनने की
प्रारंभिक दर/mol L-1 s-1
1. 0.30 0.30 0.10
2. 0.30 0.60 0.40
3. 0.60 0.30 0.20

उत्प्रेरक के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही कथन नहीं है?


गलत कथनों को चिह्नित कीजिए।

  1. उत्प्रेरक अभिक्रिया को वैकल्पिक पथ उपलब्ध कराता है।
  2. उत्प्रेरक सक्रियण ऊर्जा को बढाता है।
  3. उत्प्रेरक सक्रियण ऊर्जा को कम करता है।
  4. उत्प्रेरक अभिक्रिया के एन्थैल्पी परिवर्तन को बदल देता है।

ऊर्जा के मैक्सवेल बोल्ट्जमान वितरण के अनुसार ______।

  1. उच्च तापों पर अधिकतम सम्भाव्य गातिज ऊर्जा प्राप्त अणुओं का अंश घटता है।
  2. उच्च तापों पर अधिकतम सम्भाव्य गातिज ऊर्जा प्राप्त अणुओं का अंश बढ़ता है।
  3. उच्च तापों पर अधिकतम सम्भाव्य गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
  4. उच्च तापों पर अधिकतम सम्भाव्य गतिज ऊर्जा घटती है।

अभिक्रिया में अणुओं के बहुत बड़े अंश की ऊर्जा देहली ऊर्जा से अधिक है फिर भी अभिक्रिया वेग बहुत कम है, ऐसा क्यों है?


किसी अभिक्रिया की आणविकता शून्य क्यों नहीं हो सकती?


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