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प्रश्न
किसी अन्य कवि द्वारा रचित विरह वर्णन की दो कविताएँ चुनकर लिखिए और अपने अध्यापक को दिखाइए।
थोडक्यात उत्तर
उत्तर
- पदः मीराबाई
तोसों लाग्यो नेह रे प्यारे नागर नंदकुमार।
मुरली तेरी मन हरह्ह्यौ बिसरह्ह्यौ घर ब्यौहार।।
जबतैं श्रवननि धुनि परी घर अंगणा न सुहाय।
पारधि ज्यूं चूकै नहीं म्रिगी बेधि द आय।।
पानी पीर न जान ज्यों मीन तडफ मरि जाए।
रसिक मधुपके मरमको नहीं समुझत कमल सुभाय।।
दीपक को जो दया नहिं उडि उडि मरत पंतग।
मीरा प्रमु गिरधर मिले जैसे पाणी मिलि गयौ रंग।। - पदः मीराबाई
निसि दिन बरषत नैन हमारे।
सदा रहति बरषा रितु हम पर जब तें स्याम सिधारे।।
दृग अंजन न रहत निसि बासर कर कपोल भए कारे।
कंचुकि पद सूखत नहिं कबहूं उर बिच बहत पनारे।।
आंसू सलिल भई सब काया पल न जात रिस टारे।।
सूरदास प्रभु यहै परेखो गोकुल काहें बिसारे।।
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मलिक मुहम्मद जायसी
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?