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किसी माध्यम (जैसे जल) में प्रकाश की चाल निर्वात में प्रकाश की चाल से अधिक है। न्यूटन के कणिका सिद्धान्त द्वारा इस आशय की भविष्यवाणी कैसे की गई। - Physics (भौतिक विज्ञान)

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प्रश्न

किसी माध्यम (जैसे जल) में प्रकाश की चाल निर्वात में प्रकाश की चाल से अधिक है। न्यूटन के कणिका सिद्धान्त द्वारा इस आशय की भविष्यवाणी कैसे की गई। क्या जल में प्रकाश की चाल प्रयोग द्वारा ज्ञात करके इस भविष्यवाणी की पुष्टि हुई? यदि नहीं, तो प्रकाश के चित्रण का कौन-सा विकल्प प्रयोगानुकूल है?

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

न्यूटन के कणिका सिद्धान्त के अनुसार जब प्रकाश किसी विरल माध्यम से सघन माध्यम में प्रवेश करता है तो प्रकाश कणिकाओं पर, माध्यमों की सीमा पृष्ठ के अभिलम्बवत् दिशा में एक आकर्षण बल (विरल से सघने माध्यम की ओर) कार्य करने लगता है। इस बल के कारण कणिकाओं को, सीमा पृष्ठ के अभिलम्बवत् घटक बढ़ने लगता है, जबकि सीमा पृष्ठ के समान्तर घटक अपरिवर्तित रहता है। इससे प्रकाश किरण अभिलम्ब की ओर झुकती हुई सघन माध्यम में अपवर्तित हो जाती है।

सीमा पृष्ठ का समान्तर घटक अपरिवर्तित रहता है; अतः

v1 sin i = v2 sin r

`(sin "i")/(sin "r") = v_2/v_1 = "n"_21`

दूसरा माध्यम सघन है; अतः n21 > 1, v2 > v1

परन्तु प्रयोग द्वारा न्यूटन की इस भविष्यवाणी की पुष्टि नहीं हो पाई अपितु इसके विपरीत प्रयोग द्वारा यह ज्ञात हुआ कि सघन माध्यम में प्रकाश की चाल विरल माध्यम की तुलना में कम हाती है। इससे न्यूटन के कणिका सिद्धान्त को अमान्य करार दिया गया और हाइगेन्स के तरंगिका सिद्धान्त को मान्यता मिल गई। इससे ज्ञात होता है कि हाइगेन्स का तरंगिका सिद्धान्त प्रयोग संगत है।

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हाइगेंस सिद्धांत का उपयोग करते हुए समतल तरंगों का अपवर्तन तथा परावर्तन - समतल तरंगों का अपवर्तन
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पाठ 10: तरंग-प्रकाशिकी - अभ्यास [पृष्ठ ३८६]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Physics [Hindi] Class 12
पाठ 10 तरंग-प्रकाशिकी
अभ्यास | Q 10.12 | पृष्ठ ३८६

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