Advertisements
Advertisements
प्रश्न
कॉलम I और कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए।
कॉलम I | कॉलम II |
(i) कार इंजन में प्रयुक्त होने वाला प्रतिहिम | (a) उदासीन फेरिक क्लोराइड |
(ii) सुगंध में प्रयुक्त होने वाला विलायक | (b) ग्लिसरॉल |
(iii) पिक्रिक अम्ल का प्रारंभन पदार्थ | (c) मेथेनॉल |
(iv) काष्ठ स्पिरिट | (d) फ़ीनॉल |
(v) फ़ीनॉलिक समूह के संसूचन के लिए प्रयुक्त अभिकर्मक | (e) एथेलीनग्लाइकॉल |
(vi) साबुन उद्योग का अतिरिक्त उत्पाद जो कांतिवर्धकों में प्रयुक्त होता है | (f) एथेनॉल |
उत्तर
कॉलम I | कॉलम II |
(i) कार इंजन में प्रयुक्त होने वाला प्रतिहिम | (e) एथेलीनग्लाइकॉल |
(ii) सुगंध में प्रयुक्त होने वाला विलायक | (f) एथेनॉल |
(iii) पिक्रिक अम्ल का प्रारंभन पदार्थ | (d) फ़ीनॉल |
(iv) काष्ठ स्पिरिट | (c) मेथेनॉल |
(v) फ़ीनॉलिक समूह के संसूचन के लिए प्रयुक्त अभिकर्मक | (a) उदासीन फेरिक क्लोराइड |
(vi) साबुन उद्योग का अतिरिक्त उत्पाद जो कांतिवर्धकों में प्रयुक्त होता है | (b) ग्लिसरॉल |
स्पष्टीकरण:
(i) एथेलीनग्लाइकॉल का IUPAC नाम एथेन-1, 2-डाइऑल है। यह मुख्य रूप से कपड़े उद्योग के निर्माण में कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग प्रतिहिम योगों में किया जाता है।
(ii) एथेनॉल वसायुक्त पदार्थों के लिए एक अच्छा विलायक है। वसा और इत्र को गंध प्रदान करते हैं। एक अच्छा विलायक होने के अलावा, यह त्वचा को कम परेशान करता है। इसलिए इसका उपयोग इत्र में किया जाता है।
(iii) सांद्र नाइट्रिक अम्ल के साथ फ़ीनॉल 2,4,6-ट्राइनाइट्रोफ़ीनॉल में परिवर्तित हो जाती है। उत्पाद को सामान्यतः पिक्रिक अम्ल कहते हैं। अभिक्रिया उत्पाद की लब्धि बहुत कम होती है।
(iv) मेथेनॉल, CH3OH जिसे ‘काष्ठ स्पिरिट’ भी कहते हैं। लकड़ी के भंजक आसवन द्वारा प्राप्त की जाती थी।
(v) फ़ीनॉल से उपचारित करने पर उदासीन फेरिक क्लोराइड बैंगनी/लाल रंग देता है। यह फ़ीनॉलिक समूह का पता लगाने के लिए उपयोग किया जाने वाला अभिकर्मक है।
(vi) साबुन वसा अम्ल की NaOH के साथ प्रतिक्रिया द्वारा तैयार किया जाता हैं।
\[\begin{array}{cc}
\ce{O}\phantom{........................................}\\
||\phantom{........................................}\\
\phantom{..}\ce{CH2 - O - C - OC17H35}\phantom{...........................}\phantom{.......}\ce{CH2OH}\phantom{.}\\
\phantom{.}
\phantom{..........}|\phantom{..........}\ce{O}\phantom{..............................................}|\phantom{................}\\
||\phantom{..........................................}\\
\ce{CH - O - C - OC17H35 + 3NaOH -> \underset{{(साबुन)}}{\underset{{सोडियम स्टीयरेट}}{3C17H35COONa}} + CHOH}\phantom{.}\\
\phantom{...}|\phantom{.........................................................}|\phantom{.........}\\
\phantom{}\ce{CH2 - O - C -OC17H35}\phantom{..................................}\ce{\underset{{ग्लिसरॉल}}{CH2OH}}\phantom{}\\
||\phantom{.........................................}\\
\ce{O}\phantom{.........................................}\\
\end{array}\]
ग्लिसरॉल (प्रोपेन-1, 2, 3-ट्राइऑल) साबुन उद्योग का उप-उत्पाद है और सौंदर्य प्रसाधनों में उपयोग किया जाता है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
ऐल्किल हैलाइडों को ऐल्कोहॉलों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया में ______ निहित होती है।
m-क्रीसॉल का IUPAC ______ नाम है।
प्राथमिक ऐल्कोहॉलों को ऐल्डिहाइडों में ऑक्सीकृत करने के लिए निम्नलिखित में से कौन-से अभिकर्मक प्रयुक्त होते हैं?
(i) निर्जलीय माध्यम में CrO3
(ii) अम्लीय माध्यम में KMnO4
(iii) पिरीडिनियम क्लोरोक्रोमेट
(iv) Cu की उपस्थिति में 573 K पर तापन
o-नाइट्रोफ़ीनॉल और p-नाइट्रोफ़ीनॉल में से कौन-सा अधिक वाष्पशील है? स्पष्ट कीजिए।
ऐल्कोहॉल, सक्रिय धातु, उदाहरणार्थ Na, K इत्यादि से अभिक्रिया करके संगत ऐल्कॉक्साइड बनाती हैं। सोडियम धातु की प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐल्कोहॉलों के प्रति घटती हुई अभिक्रिया के क्रम को लिखिए।
स्पष्ट कीजिए कि फ़ीनॉलों का OH समूह ऐल्कोहॉलों के OH समूह से अधिक मजबूती से क्यों आबंधित रहता है।
कोल्बे अभिक्रिया में फ़ीनॉल के स्थान पर फ़ीनॉक्साइड आयन की अभिक्रिया कार्बन डाइआक्साइड के साथ की जाती है। क्यों?
स्पष्ट कीजिए कि कम द्रव्यमान की ऐल्कोहॉल जल में घुलनशील क्यों होती है?
स्पष्ट कीजिए कि p-नाइट्रोफ़ीनॉल, फ़ीनॉल से अधिक अम्लीय क्यों होती है?
कॉलम I और कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए।
कॉलम I | कॉलम II |
(i) मेथेनॉल | (a) फ़ीनॉल का o-हाइड्रॉक्सीसैलिसिलिक अम्ल में परिवर्तन |
(ii) कोल्बे अभिक्रिया | (b) एथिल ऐल्कोहॉल |
(iii) विलियम्सन संश्लेषण | (c) फ़ीनॉल का सैलिसिलऐल्डिहाइड मेंपरिवर्तन |
(iv) 2° ऐल्कोहॉल का कीटोन में परिवर्तन | (d) काष्ठ स्पिरिट |
(v) राइमर-टीमन अभिक्रिया | (e) 573 K पर तप्त कॉपर |
(vi) किण्वन | (f) ऐल्किल हैलाइड की सोडियम ऐल्कॉक्साइड के साथ अभिक्रिया |