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कॉलम I और कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए। कॉलम I कॉलम II (i) SN1 अभिक्रिया (a) विस-डाइब्रोमाइड (ii) अग्निशामक में रसायन (b) जेम-डाइहैलाइड (iii) ऐल्कीनों का ब्रोमीनन (c) रेसिमीकरण - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

कॉलम I और कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए।

कॉलम I कॉलम II
(i) SN1 अभिक्रिया (a) विस-डाइब्रोमाइड
(ii) अग्निशामक में रसायन (b) जेम-डाइहैलाइड
(iii) ऐल्कीनों का ब्रोमीनन (c) रेसिमीकरण
(iv) ऐल्किलिडीन हैलाइड (d) सेत्जेफ नियम
(v) ऐल्किल हैलाइड से HX का निकलना (e) क्लोरोब्रोमोकार्बन
जोड्या लावा/जोड्या जुळवा

उत्तर

कॉलम I कॉलम II
(i) SN1 अभिक्रिया (c) रेसिमीकरण
(ii) अग्निशामक में रसायन (e) क्लोरोब्रोमोकार्बन
(iii) ऐल्कीनों का ब्रोमीनन (a) विस-डाइब्रोमाइड
(iv) ऐल्किलिडीन हैलाइड (b) जेम-डाइहैलाइड
(v) ऐल्किल हैलाइड से HX का निकलना (d) सेत्जेफ नियम

स्पष्टीकरण:

  1. दो प्रतिबिंब रूपों के समान अनुपात में मिश्रण का ध्रुवण घूर्णन शून्य होगा, क्योंकि एक समावयवी के द्वारा उत्पन्न घूर्णन को दूसरा समावयवी निरस्त कर देगा। इस प्रकार के मिश्रण को रेसिमिक मिश्रण अथवा रेसिमिक अंशातरण कहते हैं। एक रेसिमिक मिश्रण को उसके नाम से पूर्व dl अथवा (±) पूर्वलग्न लगाकर प्रदर्शित करते हैं।उदाहरणार्थ, (±) ब्यूटेन-2-ऑल। प्रतिबिंब रूप के रेसिमिक मिश्रण में परिवर्तित होने के प्रक्रम को, रेसिमीकरण कहते हैं।
  2. क्लोरोब्रोमोकार्बन का उपयोग अग्निशामक यंत्रों में किया जाता है।
  3. यदि हैलोजन परमाणु श्रृंखला के दो निकटवर्ती कार्बन परमाणुओं पर उपस्थित हों तो उन्हें विसिनल हैलाइड कहा जाता है। ऐल्कीनों के ब्रोमीनन से विसिनल हैलाइड प्राप्त होते हैं।
  4. यदि समान हैलोजन परमाणुयुक्त डाइहैलो यौगिक में दोनों हैलोजन परमाणु श्रृंखला के एक ही कार्बन परमाणु पर उपस्थित हों तो इसे जेम-डाइहैलाइड कहते हैं। सामान्य नामकरणपद्धति में जेम-डाइहैलाइड को ऐल्किलिडीन हैलाइड के रूप में नामित करते हैं।
  5. सेत्जेफ नियम के माध्यम से ऐल्किल हैलाइड से HX का निष्कासन होता है। इस नियम में कहा गया है कि “विहाइड्रोजनन के फलस्वरूप वह ऐल्कीन मुख्य रूप से निर्मित होती हैं जिसमें द्विक्आबंधी कार्बन परमाणुओं पर ऐल्किल समूहों की संख्या अधिक होती हैं।”
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रासायनिक अभिक्रियाएँ
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पाठ 10: हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन - अभ्यास [पृष्ठ १५५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी एक्झांप्लर Chemistry [Hindi] Class 12
पाठ 10 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन
अभ्यास | Q IV. 80. | पृष्ठ १५५

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निम्नलिखित में से कौन-सी संरचना नीचे दिए अणु (A) का प्रतिबिंब रूप है?


वे अणु जिनके प्रतिबिंब उन पर अध्यासित नहीं हो सकते काइरल कहलाते हैं। निम्नलिखित अणुओं में से कौन-सा अणु काइरल है?


निम्न यौगिकों में से कौन-सा OH आयन द्वारा नाभिकरागी प्रतिस्थापन से रेसिमिक मिश्रण देगा।

(a) \[\begin{array}{cc}
\phantom{}\ce{CH3 - CH - Br}\\
\phantom{}|\\
\phantom{....}\ce{C2H5}\phantom{}
\end{array}\]

 

(b) \[\begin{array}{cc}
\phantom{..}\ce{Br}\\
\phantom{}|\\
\phantom{}\ce{CH3 - C - CH3}\\
\phantom{}|\\
\phantom{....}\ce{C2H5}\phantom{}
\end{array}\]

 

(c) \[\begin{array}{cc}
\ce{CH3 - CH - CH2Br}\\
|\phantom{.....}\\
\ce{C2H5}\phantom{..}
\end{array}\]


निम्नलिखित यौगिकों को नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया में अभिक्रिया दर के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

(a)
(b)
(c)

इस अभिक्रिया की क्रियाविधि के संबंध में कौन-से कथन सही हैं?

(i) अभिक्रिया में कार्बधनायन (कार्बोकैटायन) माध्यमिक बनेगा।

(ii) OHक्रियाधर (b) पर एक ओर से जुड़ेगा और उसी समय Cl इसे छोड़ेगा।

(iii) एक अस्थायी माध्यमिक बनेगा जिसमें OH और Cl दुर्बल आबंधों से जुड़े होंगे।

(iv) अभिक्रिया SN1 क्रियाविधि से बढ़ेगी।


इस अभिक्रिया की गतिकी के लिए कौन-से कथन सही हैं?

(i) अभिक्रिया की दर केवल (b) की सांद्रता पर निर्भर करती है।

(ii) अभिक्रिया की दर (a) और (b) दोनों की सांद्रता पर निर्भर करती है।

(iii) अभिक्रिया की आण्विकता एक है।

(iv) अभिक्रिया की आण्विकता दो है।


निम्नलिखित में से कौन-से यौगिक सेकेन्डी ब्रोमाइड हैं?

(i) (CH3)2CHBr

(ii) (CH3)3C CH2Br

(iii) CH3CH(Br)CH2CH3

(iv) (CH3)2CBrCH2CH3


निम्नलिखित यौगिकों में से कौन-सा यौगिक SN1 अभिक्रिया में OH आयन से अधिक तेजी से अभिक्रिया करेगा?

\[\ce{CH3-CH2-Cl}\] अथवा \[\ce{C6H5-CH2-Cl}\]


C4H9Br अणुसूत्र के यौगिक ‘क’ को KOH के जलीय विलयन से अभिकृत किया गया। इस अभिक्रिया की दर केवल यौगिक 'क' की सांद्रता पर निर्भर करती है। जब इस यौगिक के दूसरे ध्रुवण घूर्णक समावयव ‘ख’ को KOH के जलीय विलयन से अभिकत किया गया तो अभिक्रिया दर यौगिक और KOH दोनों की सांद्रता पर निर्भय पाई गई।

  1. दोनों यौगिकों ‘क’ और ‘ख’ संरचना सूत्र लिखिए।
  2. इन दोनों यौगिकों में से कौन-सा प्रतीपित विन्यास के उत्पाद में परिवर्तित होगा।

निम्नलिखित यौगिकों में से किसकी SN1 अभिक्रिया द्रुतगामी होगी और क्यों?

(क) (ख)

ऐल्किल हैलाइडों में निराकरण अभिक्रियाएँ (विशेषकर β-निराकरण) उतनी ही सामान्य हैं जितनी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ। दोनों के अभिकर्मकों का उल्लेख कीजिए।


ऐरिल हैलाइड नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति अत्यंत कम क्रियाशील होते हैं। निम्नलिखित यौगिकों की नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति अभिक्रियाशीलता का क्रम लिखिए और विवेचना कीजिए।

(I) (II) (III)

कॉलम I में दी गई संरचनाओं को कॉलम II में दिए गए नामों से सुमेलित कीजिए।

  कॉलम I कॉलम II
(i) (a) फिटिग अभिक्रिया
(ii) (b) वुर्ट्ज फिटिग अभिक्रिया
(iii) (c) फिंकेल्स्टाइन अभिक्रिया
(iv) \[\ce{C2H5Cl + NaI ->[{शुष्क ऐसीटोन}] C2H5I + NaCl}\] (d) सैन्डमायर अभिक्रिया

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