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प्रश्न
क्षार धातुओं के सामान्य रासायनिक गुण क्या हैं?
दीर्घउत्तर
उत्तर
क्षार धातुएँ बड़े आकार तथा कर्म आयनन एन्थैल्पी के कारण अत्यधिक क्रियाशील होती हैं। इनकी क्रियाशीलता वर्ग में ऊपर से नीचे क्रमशः बढ़ती जाती है। इस वर्ग के सदस्यों के महत्त्वपूर्ण रासायनिक गुण निम्नलिखित हैं-
- वायु के साथ अभिक्रियाशीलता (Reactivity with air):
क्षार धातुएँ वायु की उपस्थिति में मलिन (exposed) हो जाती हैं; क्योंकि वायु की उपस्थिति में इन पर ऑक्साइड तथा हाइड्रॉक्साइड की पर्त बन जाती है। ये ऑक्सीजन में तीव्रता से जलकर ऑक्साइड बनाती हैं। लीथियम और सोडियम क्रमशः मोनोक्साइड तथा परॉक्साइड का निर्माण करती हैं, जबकि अन्य धातुओं द्वारा सुपर ऑक्साइड आयन का निर्माण होता है। सुपर ऑक्साइड आयन \[\ce{O^-_2}\] बड़े धनायनों; जैसे- K+, RB+ तथा Cs+ की उपस्थिति में स्थायी होता है।
\[\ce{4Li + O2 -> 2Li2O}\] (ऑक्साइड)
\[\ce{2Na + O2 -> Na2O2}\] (परॉक्साइड)
\[\ce{M + O2 -> MO2 }\] (सुपर ऑक्साइड) (M = K, Rb, Cs)
इन सभी ऑक्साइडों में क्षार की ऑक्सीकरण अवस्था +1 होती है। लीथियम अपवादस्वरूप वायु में उपस्थित नाइट्रोजन से अभिक्रिया करके नाइट्राइड, Li3N बना लेता है। इस प्रकार लीथियम भिन्न स्वभाव दर्शाता है। क्षार धातुओं को वायु एवं जल के प्रति उनकी अति सक्रियता के कारण साधारणतया रासायनिक रूप से अक्रिय विलायकों; जैसे- किरोसिन में रखा जाता है। - जल के साथ अभिक्रियाशीलता (Reactivity with water):
क्षार धातुएँ, इनके ऑक्साइड, परॉक्साइड तथा सुपर ऑक्साइड भी जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रॉक्साइड, जो घुलनशील होते हैं तथा क्षार (alkalies) कहलाते हैं, बनाती हैं।
\[\ce{2Na + 2H2O -> 2Na+ + 2OH- + H2}\]
\[\ce{Li2O + H2O -> 2LiOH}\]
\[\ce{Na2O2 + 2H2O -> 2NaOH + H2O2}\]
\[\ce{2KO2 + 2H2O -> 2KOH + H2O2 + O2\uparrow}\]
यद्यपि लीथियम के मानक इलेक्ट्रोड विभव (E⊖) का मान अधिकतम ऋणात्मक होता है, परंतु जल के साथ इसकी अभिक्रियाशीलता सोडियम की तुलना में कम है, जबकि सोडियम के E⊖ का मान अन्य क्षार धातुओं की अपेक्षा न्यून ऋणात्मक होता है। लीथियम के इस व्यवहार का कारण इसके छोटे आकार तथा अत्यधिक जलयोजन ऊर्जा का होना है। अन्य क्षार धातुएँ जल के साथ विस्फोटी अभिक्रिया करती हैं। चूँकि अभिक्रिया उच्च ऊष्माक्षेपी होती है तथा विमुक्त होने वाली हाइड्रोजन आग पकड़ लेती है, इसलिए क्षार धातुओं को जल के सम्पर्क में नहीं रखते। क्षार धातुएँ प्रोटॉनदाता (जैसे- ऐल्कोहॉल, गैसीय अमोनिया, ऐल्काइन आदि) से भी अभिक्रियाएँ करती हैं। - डाईहाइड्रोजन से अभिक्रियाशीलता (Reactivity with dihydrogen)-
लगभग 673 K (लीथियम के लिए 1073 K) पर क्षार धातुएँ डाइहाइड्रोजन से अभिक्रिया कर हाइड्राइड बनाती हैं। सभी क्षार धातुओं के हाइड्राइड रंगहीन, क्रिस्टलीय एवं आयनिक होते हैं। इन हाइड्राइडों के गलनांक उच्च होते हैं।
\[\ce{2M + H2 ->[\triangle] 2M^+H-}\] (M = Li, Na, K, Rb, Cs)
हाइड्राइडों का आयनिक गुण Li से Cs तक बढ़ता है। क्षार धातुओं की कम आयनन एन्थैल्पी के कारण इनके परमाणु सरलता से संयोजी इलेक्ट्रॉन खोकर आयनिक हाइड्राइड (M+H–) बनाते हैं। चूँकि आयनन एन्थैल्पी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती है; अतः धनात्मक आयन बनाने की प्रवृत्ति उसी अनुसार बढ़ती है। इसलिए हाइड्रोइडों का आयनिक गुण भी बढ़ता है। - हैलोजेन से अभिक्रियाशीलता (Reactivity with halogens):
क्षार धातुएँ हैलोजेन से शीघ्र प्रबल अभिक्रिया करके आयनिक ऑक्साइड हैलाइड M+X– बनाती हैं।
\[\ce{2M + X2 -> 2M+X-}\]
यद्यपि लीथियम के हैलाइड आंशिक रूप से सहसंयोजक होते हैं। इसका कारण लीथियम की उच्च ध्रुवण-क्षमता है। (धनायन के कारण ऋणायन के इलेक्ट्रॉन अभ्र का विकृत होना ‘ध्रुवणता’ (polarisation) कहलाता है।) लीथियम आयन का आकार छोटा है; अत: यह हैलाइड आयन के इलेक्ट्रॉन अभ्र को विकृत करने की अधिक क्षमता दर्शाता है। चूँकि बड़े आकार का ऋणायन आसानी से विकृत हो जाता है, इसलिए लीथियम आयोडाइड सहसंयोजक प्रकृति सबसे अधिक दर्शाते हैं। अन्य क्षार धातुएँ आयनिक प्रवृत्ति की होती हैं। इनके गलनांक तथा क्वथनांक उच्च होते हैं। गलित हैलाइड विद्युत के सुचालक होते हैं। इनका प्रयोग क्षार धातुएँ बनाने में किया जाता है। - अपचायक प्रकृति (Reducing nature):
क्षार धातुएँ प्रबल अपचायक के रूप में कार्य करती हैं। जिनमें लीथियम प्रबलतम एवं सोडियम दुर्बलतम अपचायक है। मानक इलेक्ट्रोड विभव (E⊖), जो अपचायक क्षमता का मापक है, संपूर्ण परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है-
\[\ce{M(s) -> M(g)}\] ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी
\[\ce{M(g) -> M+(g) + e-}\] आयनन एन्थैल्पी
\[\ce{M+(g) + H2O -> M+(aq)}\] जलयोजन एन्थैल्पी
स्पष्ट है कि E⊖ का मान जितना कम होगा अपचायक गुण उतना ही अधिक होगा। लीथियम आयन का आकार छोटा होने के कारण इसकी जलयोजन एन्थैल्पी का मान अधिकतम होता है, जो इसके उच्च ऋणात्मक E⊖ मान तथा इसके प्रबल अपचायक होने की पुष्टि करता है। - द्रव अमोनिया में विलयन (Solution in liquid ammonia):
क्षार धातुएँ द्रव अमोनिया में घुलनशील हैं। अमोनिया में इनके विलयन का रंग गहरा नीला होता है एवं विलयन प्रकृति में विद्युत का सुचालक होता है।
\[\ce{M + (x + y)NH3 -> [M(NH3)_{{x}}]^+ + [(NH3)_{{y}}]^-}\]
विलयन का नीला रंग अमोनीकृत इलेक्ट्रॉनों के कारण होता है, जो दृश्य प्रकाश क्षेत्र की संगत ऊर्जा का अवशोषण करके विलयन को नीला रंग प्रदान करते हैं। अमोनीकृत विलयन अनुचुंबकीय (paramagnetic) होता है, जो कुछ समय पड़े रहने पर हाइड्रोजन को मुक्त करता है। फलस्वरूप, विलयन में ऐमाइड बनता है।
\[\ce{M+(am) + e- + NH3(1) -> MNH2(am) + 1/2H2(g)}\]
जहाँ ‘am’ अमोनीकृत विलयन दर्शाता है। सांद्र विलयन में नीला रंग ब्रॉन्ज रंग में बदल जाता है और विलयन प्रतिचुंबकीय (diamagnetic) हो जाता है। - सल्फर तथा फॉस्फोरस के साथ अभिक्रिया (Reaction with sulphur and phosphorus):
क्षार धातुएँ सल्फर तथा फॉस्फोरस से गर्म करने पर अभिक्रिया करके संबंधित सल्फाइड तथा फॉस्फाइड बनाती हैं।
\[\ce{16Na + S8 ->[\triangle] \underset{\text{सोडियम सल्फाइड}}{8Na2S}}\]
\[\ce{12Na + P4 ->[\triangle] \underset{\text{सोडियम फॉस्फाइड}}{4Na3P}}\]
सोडियम फॉस्फाइड सल्फाइड तथा फॉस्फाइड दोनों जल द्वारा जल-अपघटित हो जाते हैं।
\[\ce{\underset{\text{सोडियम सल्फाइड}}{Na2S + H2O} <=> \underset{\text{सोडियम हाइड्रॉक्साइड}}{NaOH} + \underset{\text{सोडियम हायड्रोसल्फाइड}}{NaHS}}\]
\[\ce{\underset{\text{सोडियम फॉस्फाइड}}{Na3P + 3H2O} <=> 3NaOH + \underset{\text{फ़ॉस्फ़ीन}}{PH3\uparrow}}\]
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वर्ग 1 के तत्त्व : क्षार-धातुएं
या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 10: s-ब्लॉक तत्त्व - अभ्यास [पृष्ठ ३१२]
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