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कविता का आरंभ 'तोड़ो तोड़ो तोड़ो' से हुआ है और अंत 'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' से। विचार कीजिए कि कवि ने ऐसा क्यों किया? - Hindi (Elective)

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प्रश्न

कविता का आरंभ 'तोड़ो तोड़ो तोड़ो' से हुआ है और अंत 'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' से। विचार कीजिए कि कवि ने ऐसा क्यों किया?

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

ऐसा करने के पीछे कवि का विशेष उद्देश्य है, 'तोड़ो तोड़ो तोड़ो' से कविता आरंभ करके कवि मनुष्य को विघ्न, बाधाएँ, खीझ इत्यादि को चकनाचूर करने के लिए प्रेरित करता है। इस तरह मनुष्य संकट से बाहर आ जाता है और उसके मन की सोचने-समझने की शक्ति का विकास होता है। विघ्न-बाधाएँ तथा खीझ मनुष्य के विचारों को प्रभावित किए रहती हैं और वह कुछ भी करने में असमर्थ होता है। 'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' से वह मन को मज़बूत बनाकर सृजन शक्ति को बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है। जैसे धरती के अंदर व्याप्त चट्टान और पत्थरों को तोड़ने से उसका बंजरपन समाप्त होता है तथा गुड़ाई करके उसे खेती करने योग्य बनाया जाता है। ऐसे ही इन शब्दों के द्वारा कवि मन को विशेष बल देने का प्रयास करता है ताकि वह अपने सम्मुख खड़ी कठिनाइयों से लड़ सके तथा सृजन शक्ति को और बलशाली बना सके। इस प्रकार ही मनुष्य का विकास संभव है।

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तोड़ो
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पाठ 1.06: रघुवीर सहाय (वसंत आया, तोड़ो) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ३९]

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एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
पाठ 1.06 रघुवीर सहाय (वसंत आया, तोड़ो)
प्रश्न-अभ्यास | Q 3. | पृष्ठ ३९

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'पत्थर' और 'चट्टान' शब्द किसके प्रतीक हैं?


भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को?
गोड़ो गोड़ो गोड़ो


ये झूठे बंधन टूटें
तो धरती को हम जानें
यहाँ पर झूठे बंधनों और धरती को जानने से क्या अभिप्राय हैं?


'आधे-आधे गाने' के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?


मिट्टी और बीज से संबंधित और भी कविताएँ हैं, जैसे सुमित्रानंदन पंत की 'बीज'। अन्य कवियों की ऐसी कविताओं का संकलन कीजिए और भित्ति पत्रिका में उनका उपयोग कीजिए।


‘तोड़ो’ कविता नवसृजन की प्रेरणा है। कथन के आलोक में अपने विचार प्रकट कीजिए।


निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

ये पत्थर ये चट्टानें
ये झूठे बंधन टूटें
तो धरती का हम जानें
सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है
अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है
आधे आधे गाने

तोड़ो तोड़ो तोड़ो
ये ऊसर बंजर तोड़ो
ये चरती परती तोड़ो
सब खेत बनाकर छोड़ो
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को?
गोड़ो गोड़ो गोड़ो


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