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कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है। - Hindi (Core)

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प्रश्न

कवितावली में उद्धृत छंदों के आधार पर स्पष्ट करें कि तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमता की अच्छी समझ है।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

इनमें व्याप्त उद्धृत छंदों में तुलसीदास को अपने युग की आर्थिक विषमताओं की बहुत अच्छी समझ है। इसमें उन्होंने इसका विस्तारपूर्वक उल्लेख किया है। समाज में भूखमारी की स्थिति है। लोग बेरोज़गार घूम रहे हैं। लोग पेट पालने के लिए अलग-अलग कार्य कर रहे हैं। लोग भीख माँग रहे हैं, व्यापार कर रहे हैं, छोटा-मोटा अभिनय करके पेट पालने का प्रयास कर रहे हैं, कोई लोगों को मूर्ख बना रहा है, तो कोई अमीरों के तलवे चाट रहा है। अतः इसमें बेरोज़गारी के कारण उत्पन्न दशा का चित्रण मिलता है। इसके अंदर किसानों की हीन दशा का मार्मिक वर्णन भी मिलता है। किसानों की दशा बहुत हीन थी। शायद प्रकृति की मार व राजाओं के शोषण ने उन्हें आत्महत्या तथा संतानों को बेचने के लिए विवश कर दिया था। गरीब और गरीब होता जा रहा था।

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कवितावली (उत्तर कांड से)
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पाठ 8: तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप) - अभ्यास [पृष्ठ ५१]

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एनसीईआरटी Hindi - Aaroh Class 12
पाठ 8 तुलसीदास (कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप)
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ ५१

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तुलसी ने यह कहने की ज़रूरत क्यों समझी?

धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूतु कहौ, जोलहा कहौ कोऊ/ काहू की बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ। इस सवैया में काहू के बेटासों बेटी न ब्याहब कहते तो सामाजिक अर्थ में क्या परिवर्तन आता?


धूत कहौ ______ वाले छंद में ऊपर से सरल व निरीह दिखलाई पड़ने वाले तुलसी की भीतरी असलियत एक स्वाभिमानी भक्त हृदय की है। इससे आप कहाँ तक सहमत हैं?


व्याख्या करें-
माँगि कै खैबो, मसीत को सोइबो, लैबोको एकु न दैबको दोऊ।।


व्याख्या करें-
ऊँचे नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी।।


पेट ही पचत, बेचत बेटा-बेटकी तुलसी के युग का ही नहीं आज के युग का भी सत्य है। भुखमरी में किसानों की आत्महत्या और संतानों (खासकर बेटियों) को भी बेच डालने की हृदय-विदारक घटनाएँ हमारे देश में घटती रही हैं। वर्तमान परिस्थितियों और तुलसी के युग की तुलना करें।

तुलसी के युग की बेकारी के क्या कारण हो सकते हैं? आज की बेकारी की समस्या के कारणों के साथ उसे मिलाकर कक्षा में परिचर्चा करें।

यहाँ कवि तुलसी के दोहा, चौपाई, सोरठा, कवित्त, सवैया- ये पाँच छंद प्रयुक्त हैं। इसी प्रकार तुलसी साहित्य में और छंद तथा काव्य-रूप आए हैं। ऐसे छंदों व काव्य-रूपों की सूची बनाएँ।

‘कवितावली’ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि तुलसीदास को अपने समय की आर्थिक-सामाजिक समस्याओं की समझ थी।


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