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प्रश्न
लेखक गुरदयाल सिंह अपने छात्र जीवन में छुटटियों के काम को पुरा करने के लिए योजनाएँ तैयार करते थे। क्या आप की योजनाएँ लेखक की योजनाओं से मेल खाती हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
लेखक गुरदयाल सिंह अपने छात्र जीवन में छुटटियों के काम को पूरा करने के लिए तरह-तरह की योजनाएँ बनाया करते थे, लेकिन वह अपनी योजनाओं को पूरा नहीं कर पाते थे और छुटटियाँ खत्म होते-होते अपनी योजना को हड़बड़ी में पूरा करते थे। इससे सारे काम बिगड़ जाते थे।
ऐसी ही स्थिति हमारी भी होती थी हमारे विद्यालय में जब छुटटियाँ पड़ती तो हम भी तमाम तरह की योजनाएँ बना लेते। वो योजना को अमल मे लाने के लिए रोज कल पर टालते रहते थे। हम पूरा छुटटियाँ मौज मस्ती में ही बिता देते थे और इस तरह छुटटियाँ बीत जाती हमें पता ही नहीं चलता था। जब छुटटियाँ खत्म होने को आती थी तब हमें सब याद आता था कि हमने पढ़ाई के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाईं थी। तब हमारे हाथ-पाँव फूल जाते थे और हम हड़बड़ी में सारे कार्य पूरे करते थे।
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