मराठी

लेखक ने स्पीति की यात्रा लगभग तीस वर्ष पहले की थी। इन तीस वर्षों में क्या स्पीति में कुछ परिवर्तन आया है? जानें, सोचें और लिखें। - Hindi (Core)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

लेखक ने स्पीति की यात्रा लगभग तीस वर्ष पहले की थी। इन तीस वर्षों में क्या स्पीति में कुछ परिवर्तन आया है? जानें, सोचें और लिखें।

थोडक्यात उत्तर

उत्तर

तीस वर्ष पहले लेखक ने जिस प्रकार स्पीति की परिस्थितियों का वर्णन किया है, मेरी सोच से वर्तमान में वहाँ कुछ परिवर्तन जरूर हुए होंगे। संचार, बिजली तथा परिवहन की सुविधाओं का विकास अवश्य हुआ होगा। पर्यटकों का आवागमन बढ़ा हो, ऐसा भी हो सकता है।

shaalaa.com
स्पीति में बारिश
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 1.06: स्पीति में बारिश - अभ्यास [पृष्ठ ७८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Aaroh Class 11
पाठ 1.06 स्पीति में बारिश
अभ्यास | Q 4. | पृष्ठ ७८

संबंधित प्रश्‍न

इतिहास में स्पीति का वर्णन नहीं मिलता। क्यों?


स्पीति के लोग जीवनयापन के लिए किन कठिनाइयों का सामना करते हैं?


लेखक माने श्रेणी का नाम बौद्धों के माने मंत्र के नाम पर करने के पक्ष में क्यों है?


ये माने की चोटियाँ बूढ़े लामाओं के जाप से उदास हो गई हैं- इस पंक्ति के माध्यम से लेखक ने युवा वर्ग से क्या आग्रह किया है?


वर्षा यहाँ एक घटना है, एक सुखद संयोग है – लेखक ने ऐसा क्यों कहा है?


स्पीति अन्य पर्वतीय स्थलों से किस प्रकार भिन्न है?


स्पीति में बारिश का वर्णन एक अलग तरीके से किया गया है। आप अपने यहाँ होने वाली बारिश का वर्णन कीजिए।


स्पीति के लोगों और मैदानी भागों में रहने वाले लोगों के जीवन की तुलना कीजिए। किन का जीवन आपको ज्यादा अच्छा लगता है और क्यों?


स्पीति में बारिश एक यात्रा-वृत्तांत है। इसमें यात्रा के दौरान किए गए अनुभवों, यात्रा-स्थलों से जुड़ी विभिन्न जानकारियों का बारीकी से वर्णन किया गया है। आप भी अपनी किसी यात्रा का वर्णन लगभग 200 शब्दों में कीजिए।


पाठ में से दिए गए अनुच्छेद में क्योंकि, और, बल्कि, जैसे ही, वैसे ही, मानो, ऐसे, शब्दों का प्रसंग करते हुए उसे दोबारा लिखिए –

लैंप की लौ तेज़ की। खिड़की का एक पल्ला खोला तो तेज हवा का झोंका मुँह और हाथ को जैसे छीलने लगा। मैंने पल्ला भिड़ा दिया। उसकी आड़ से देखने लगा। देखा कि बारिश हो रही थी। मैं उसे देख नहीं रहा था। सुन रहा था। अँधेरा, ठंड और हवा का झोंका आ रहा था। जैसे बरफ़ का अंश लिए तुषार जैसी बूंदें पड़ रही थीं।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×