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प्रश्न
मानव विकास अवधारणा के अंतर्गत समता और सतत पोषणीयता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर
मानव विकास अवधारणा के चार स्तम्भ हैं-समता, सतत पोषणीयता, उत्पादकता तथा सशक्तीकरण समता को आशय प्रत्येक व्यक्ति (स्त्री अथवा पुरुष) को बिना किसी भेदभाव के उपलब्ध अवसरों के लिए समान पहुँच की व्यवस्था करना है। इसके गहरे अर्थ होते हैं; जैसे-किसी भी देश में यह जानना जरूरी है कि विद्यालय से विरत अधिकांश छात्र किस वर्ग से हैं। छात्रों के विरत होने के कारणों का पता लगाना चाहिए। भारत में स्त्रियाँ और सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हुए वर्गों के व्यक्ति, बड़ी संख्या में विद्यालय से विरत होते हैं। जो इस बात का सूचक है कि शिक्षा तक पहुँच न होने से इन वर्गों के विकल्पों को सीमित कर दिया गया है। सतत पोषणीयता मानव विकास के लिए अति आवश्यक है। प्रत्येक पीढ़ी को समान अवसर मिलें, इसके लिए समस्त पर्यावरणीय, वित्तीय एवं मानव संसाधनों का उपयोग भविष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। इन संसाधनों में से किसी भी एक का दुरुपयोग भावी पीढ़ियों के लिए अवसरों को कम कर देगा। अतः सतत पोषणीय मानव विकास के लिए अवसरों की उपलब्धता में निरंतरता का होना अति आवश्यक है। उदाहरण-यदि एक समुदाय विशेष अपनी बालिकाओं को विद्यालय में पढ़ने हेतु भेजने पर जोर नहीं देता है तो युवा होने पर इन स्त्रियों के लिए रोजगार के अनेक अवसर समाप्त हो जाएँगे। इस तरह उनके जीवन के अन्य पक्षों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। अतः प्रत्येक पीढ़ी को अपनी भावी पीढ़ियों के लिए अवसरों और विकल्पों की उपलब्धता तथा निरंतरता को सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए।